भारत के किसान आंदोलन की ब्रिटेन में गूंज, बढ़ाई गई भारतीय दूतावास की सुरक्षा

फोटो सौ. (ANI)

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भारत में जारी किसान आंदोलन को लेकर ब्रिटेन (Britain) में भी प्रदर्शन (Protest) किये जा रहे हैं. इसी के मद्देनजर रविवार को लंदन पुलिस ने भारतीय दूतावास की सुरक्षा को कड़ा कर दिया गया है. यहां स्कॉर्टलैंड यार्ड के अतिरिक्त दस्ते को तैनात किया गया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 6, 2020, 10:36 PM IST
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लंदन. भारत में जारी किसान आंदोलन की गूंज अब ब्रिटेन (Britain), कनाडा और अमेरिका में भी सुनाई दे रही है. बड़ी संख्या में सिख और दूसरे समुदाय के लोग किसानों के समर्थन में भारतीय दूतावासों के सामने प्रदर्शन (Protest) कर रहे हैं. इस कारण इन देशों में भारतीय मिशनों की सुरक्षा के लिए खतरा भी बढ़ गया है. विदेश मंत्रालय के अनुरोध पर रविवार को लंदन पुलिस ने भारतीय दूतावास की सुरक्षा को कड़ा कर दिया है. यहां स्कॉर्टलैंड यार्ड के अतिरिक्त दस्ते को तैनात किया गया है.

दो दिन पहले ही 36 ब्रिटिश सांसदों ने भारत के किसान कानून के विरोध में ब्रिटेन के विदेश सचिव को चिट्ठी लिखी थी. इसमें पंजाबी मूल के लेबर पार्टी के सांसदों के अलावा पाकिस्तानी और ब्रिटिश मूल के भी कई सांसद शामिल थे. इन्होंने ब्रिटिश सरकार से भारत के सामने इन तीन किसान कानूनों के खिलाफ विरोध दर्ज करवाने की मांग की गई थी. हालांकि, ब्रिटिस सरकार की ओर से इस चिट्ठी पर अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है.

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वहीं, भारत में नए कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे भारतीय किसानों के समर्थन में अमेरिका के कई शहरों में सैकड़ों सिख अमेरिकियों ने शांतिपूर्वक विरोध रैलियां निकालीं. कैलिफोर्निया के विभिन्न हिस्सों के प्रदर्शनकारियों के सैन फ्रांसिस्को में भारतीय वाणिज्य दूतावास की ओर बढ़ने वाली कारों के बड़े काफिले ने शनिवार को ‘बे ब्रिज’ पर यातायात बाधित कर दिया.
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इसके अलावा सैकड़ों प्रदर्शनकारी इंडियानापोलिस में एकत्र हुए. इंडियाना निवासी प्रदर्शनकारी गुरिंदर सिंह खालसा ने कहा, ‘किसान देश की आत्मा हैं. हमें अपनी आत्मा की रक्षा करनी चाहिए. अमेरिका और कनाडा के कई शहरों समेत दुनियाभर में लोग उन विधेयकों (कानूनों) के खिलाफ एकजुट हुए हैं, जो भारत के कृषि बाजार को निजी क्षेत्र के लिए खोल देंगे, जो बड़े कॉरपोरेट घरानों को स्वतंत्र कृषि समुदायों का अधिग्रहण करने की अनुमति देंगे और इससे फसलों के बाजार मूल्य में कमी आएगी.’
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