चीन में अकेले लोगों को सच्चा प्यार दिलाने के लिए चलाई गई स्पेशल ट्रेन

इस 'लव-परस्यूट ट्रेन' (Love-Pursuit Train) का हिस्सा बने हुआंग सांग (Huang Song) नाम के शख्स ने बताया, 'भले ही आप अपने लिए सही जोड़ीदार नहीं खोज पाएं, फिर भी आप ट्रेन में बहुत सारे अच्छे दोस्त बना सकते हैं.'

News18Hindi
Updated: August 31, 2019, 2:27 PM IST
चीन में अकेले लोगों को सच्चा प्यार दिलाने के लिए चलाई गई स्पेशल ट्रेन
लव-परस्यूट ट्रेन.
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Updated: August 31, 2019, 2:27 PM IST
चीन (China) में 1,000 से ज्यादा युवा पुरुषों और महिलाओं ने एक साथ इस महीने की शुरुआत में एक खास तरह की ट्रेन से यात्रा की. उनकी इस ट्रेन का मकसद पर्फेक्ट लाइफ पार्टनर तलाशना है. 1970 के दशक के दौरान अपनाई गई 'एक बच्चे की नीति' (One Child Policy) की वजह से देश के भितर एक विशाल लिंग अंतर की स्थिति उत्पन्न हो गई है. इस अंतर की वजह से वहां लोगों को अच्छे जीवनसाथी ढूंढने में दिक्कत हो रही है. एशिया वन मीडिया के मुताबिक, चोंगकिंग नॉर्थ स्टेशन से कियानजियांग स्टेशन तक की दो दिन और एक रात की ये यात्रा 10 अगस्त को शुरू हुई थी.

'लव-परस्यूट ट्रेन'
डेली मेल यूके की रिपोर्ट में बताया गया है कि 10 डब्बों वाली 'लव-परस्यूट ट्रेन' को तीन साल पहले देश के 200 मिलियन सिंगल लोगों के लिए रोस्टिंग मैच-मेकिंग सेवा के तौर पर लॉन्च किया गया था. तब से इस ट्रेन में 3,000 से अधिक युवाओं ने यात्रा की है और एक-दूसरे से मिलने के बाद 10 से ज्यादा जोड़ों ने शादी की है. इस तरह की गतिविधियां बाकी तरीकों से ज्यादा रचनात्मक हैं. ट्रेन एक मैगपाई पुल की तरह है, जो यात्रा के दौरान एक-दूसरे को जानने के लिए अलग-अलग जगहों के लोगों को एक साथ लाती है.

हुआंग सांग ने बताई अपनी कहानी

इस खास ट्रेन का हिस्सा बने हुआंग सांग नाम के शख्स ने बताया, 'भले ही आप अपने लिए सही जोड़ीदार नहीं खोज पाएं, फिर भी आप ट्रेन में बहुत सारे अच्छे दोस्त बना सकते हैं.' कई तरह के खेल और भोजन विकल्पों के अलावा यात्रियों के पास पारंपरिक प्रदर्शनों को देखने और 1,000 लोगों के साथ भोज का आनंद लेने के लिए प्राचीन 'पानी के शहर' झूओ शुई में भी रुकने का अवसर होता है. यांग हुआन ने कहा कि वह पहले से ही 'लव-परस्यूट ट्रेन' की यात्रा के दौरान खुद को एक अच्छा प्रेमी पाया. उन्होंने समाचार वेबसाइट यूथ.एनएन को बताया, "हमें केवल वापसी यात्रा पर एक-दूसरे का पता चला और हमें मेल खाने वाले मूल्यों का एहसास हुआ."

चीन में लड़कियों की संख्या में आई कमी की वजह
उन्होंने कहा, "हमें एहसास हुआ कि हम दोनों उस तरह का प्यार चाहते थे, जिस तरह 'टू द ओक ट्री' कविता में दर्शाया गया है. जब दोनों पक्ष एक-दूसरे की तारीफें करते हैं और आजाद रहते हैं. हमें साथ में रहना अच्छा लगता था.'
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30 मिलियन चीनी पुरुषों को एक बच्चे की नीति की वजह से एहसास हुआ कि वो आगले 30 सालों में बिना पत्नी की स्थिति में पहुंच जाएंगे. एक बच्चे वाली नीति को 2016 में खत्म कर दिया गया था. इस नीति की वजह से कई जोड़ों ने लड़का पैदा करने के लिए अजन्मी लड़कियों को गर्भ में ही मार देने का फैसला लिया, जिस वजह से ये जेंडर असंतुलन कायम हुआ. 2018 में देश में हर 1,000 में से केवल 7.2 लोगों को शादी करने का अवसर मिला. इन आंकड़ों की वजह से चीन में शादी की दर पिछले एक दशक में सबसे कम रही.

चेयरमैन माओ ने क्यों अपनाई थी ये नीति
1970 के दशक के उत्तरार्ध में अनिवार्य एक बच्चे की नीति को लॉन्च किया गया था, जो चेयरमैन माओ द्वारा गृह युद्ध के बाद तेजी से बढ़ रही आबादी को रोकने के लिए उठाया गया कदम था. ये नियम 20 वीं सदी के अंत तक चीनी आबादी को 1.2 बिलियन से कम रखने के उद्देश्य से लागू किया गया था. शहरी क्षेत्रों में महिलाओं को दूसरी बार गर्भधारण करने से रोकने के लिए कहा गया. नियम को नहीं मानने वाले जोड़े पर जुर्माना लगाया गया. जुर्माना आमतौर पर उनकी सालाना आमदनी का तीन गुना होता था.

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First published: August 31, 2019, 1:54 PM IST
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