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श्रीलंका के राष्ट्रपति होंगे गोटबाया, महिंदा राजपक्षे के पास ही रहेगी कमान

D P Satish | News18Hindi
Updated: November 17, 2019, 4:13 PM IST
श्रीलंका के राष्ट्रपति होंगे गोटबाया, महिंदा राजपक्षे के पास ही रहेगी कमान
पूर्व राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे के छोटे भाई गोटाबाया राजपक्षे एक विवादास्पद व्यक्ति हैं. उन पर गंभीर युद्ध अपराधों का आरोप है.

श्रीलंका (Sri lanka) में घातक आतंकवादी हमले के सात महीने बाद कड़ी सुरक्षा के बीच मतदान हुआ था. गोटबाया राजपक्षे (Gotabaya Rajapaksa) का झुकाव चीन (China) की तरफ बताया जाता है.

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  • Last Updated: November 17, 2019, 4:13 PM IST
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कोलंबो. श्रीलंका (Sri lanka) में राष्ट्रपति चुनाव (President Elections) के नतीजे लगभग साफ हो चुके हैं. पूर्व रक्षा सचिव और विपक्षी दल SLPP के नेता गोटाबाया राजपक्षे (Gotabaya Rajapaksa) ने भारी बहुमत के साथ जीत का दावा किया है. रविवार दोपहर तक उन्हें 51.7% वोट मिले थे. वहीं सत्तारूढ़ दल UNP के नेता सजीत प्रेमदासा (Sajith Premadasa) को अब तक 42.46% वोट मिले हैं. प्रेमदासा ने अपनी हार स्वीकार कर ली है. उन्होंने कहा कि 'लोगों के निर्णय का सम्मान करना और श्रीलंका के सातवें राष्ट्रपति के तौर पर चुने जाने के लिए गोटबाया राजपक्षे को बधाई देना मेरे लिए सौभाग्य की बात है.'

पूर्व रक्षा सचिव और पूर्व राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे के छोटे भाई गोटाबाया राजपक्षे एक विवादास्पद व्यक्ति हैं. उन पर साल 2008-09 में तमिल अलगाववादी गुरिल्ला लिट्टे के साथ युद्ध के अंतिम चरण के दौरान गंभीर युद्ध अपराधों का आरोप लगा था.

कुछ महीने पहले ही अपनी अमेरिकी नागरिकता छोड़ दी
फ्री मीडिया, गैर-सरकारी संगठनों और मानव अधिकारों की गतिविधियों को कमतर आंकने वाले गोटबाया ने राष्ट्रपति चुनाव से कुछ महीने पहले ही अपनी अमेरिकी नागरिकता छोड़ी थी. विपक्ष का आरोप है कि उसके पास अभी भी अमेरिकी पासपोर्ट है और उन्होंने झूठे दावे किए हैं कि वह अब अमेरिकी नागरिक नहीं हैं.

जो लोग उन्हें करीब से जानते हैं, वे कहते हैं कि वह एक ऐसे व्यक्ति हैं जो बात करने में विश्वास नहीं करते हैं. अपने बड़े भाई के राष्ट्रपति रहने के दौरान, गोटाबाया को शहरी विकास के प्रभारी के रूप में द्वीप राष्ट्र को विकसित करने का श्रेय दिया गया. बौद्ध-बहुल देश में गोटाबाया को सिंहली और पादरियों की पसंद हैं.

अपने चुनाव अभियान के दौरान, उन्होंने बहुसंख्यक समुदाय के समर्थन पर जीत हासिल करने के लिए सिंहली और राष्ट्रवाद का कार्ड खेला. परिणाम साबित करते हैं कि बहुसंख्यक सिंहली ने उन्हें बड़ी संख्या में समर्थन दिया है और अल्पसंख्यकों - तमिलों और मुसलमानों ने उनके खिलाफ मतदान किया है.

गोटाबाया ने वादा किया है कि देश पर परिवार की सरकार नहीं चलेगी. हालांकि आलोचकों का कहना है कि उन्हें देश का प्रशासन संभालने के लिए अपने भाई महिंदा राजपक्षे को अगले प्रधानमंत्री और परिवार के अन्य सदस्यों के रूप में जल्द ही नियुक्त करना होगा.
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चीन समर्थक नेता
गोटाबाया को चीन समर्थक नेता के रूप में जाना जाता है और अमेरिका के साथ उनके करीबी संबंध भी प्रसिद्ध हैं. चूंकि तमिल मुद्दा भारत-श्रीलंका संबंधों में एक बड़ी बाधा है, इसलिए तमिल विरोधी माने वाले नेता गोटाबाया अपने विशाल पड़ोसी को स्वतंत्र और निष्पक्ष प्रशासन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के बारे में कैसे समझाएंगे कि यह बड़ा सवाल है.

भले ही गोटाबाया ने भारत से वादा किया है कि वह तमिल मामले के प्रति सहानुभूति रखेंगे और भारत के साथ सबसे अच्छे संबंध बनाए रखना चाहते हैं लेकिन उनके आगे के फैसलों पर भी नजर रहेगी.

गोटाबाया के भाई के करीबी एक वरिष्ठ राजनीतिक नेता ने कहा कि 'पूरा राजपक्षे परिवार चीन के बहुत करीब है. उन्हें राजनीतिक और भौगोलिक मजबूरियों के कारण भारत के साथ एक अच्छा रिश्ता बनाए रखना होगा, लेकिन वह एक सख्त इंसान हैं और उन्हें किसी मुद्दे पर एक समान विचार पर साथ लाना मुश्किल होगा. उनके लिए व्यक्तिगत हित और बहुसंख्यक सिंहली हित सर्वोपरि हैं.'

महिंदा राजपक्षे श्रीलंका में उनसे बड़े नेता हैं
साल 2005 और साल 2015 के बीच गोटाबाया के भाई महिंदा राजपक्षे के 10 साल के शासन के दौरान चीन ने श्रीलंका में भारी निवेश किया है. साल 2015 और 2019 के बीच यूएनपी के पांच साल के शासन के दौरान इसकी कई परियोजना धीमी हो गई. उनकी जीत से श्रीलंका में चीनी व्यापार को बढ़ावा मिलने की संभावना है. श्रींलंका में कई और रुके हुए प्रोजेक्ट जल्द ही फिर से शुरू होने की संभावना है,

श्रीलंका के कई मीडिया पेशेवरों, गैर-सरकारी संगठनों, नागरिक समाज के नेताओं ने जीत पर नुकसान की आशंका जताई है. उन्हें डर है कि अपने परिवार के खिलाफ चल रहे करप्शन की जांच और वॉर क्राइम की जांच को भी प्रभावित कर सकते हैं.

गोटाबाया भले ही अपनी मर्जी चलाते हों, लेकिन उनके भाई महिंदा राजपक्षे श्रीलंका में उनसे बड़े नेता हैं. कई लोगों को डर है कि महिंदा अब प्रधानमंत्री की भूमिका में बैकसीट ड्राइवर का पद संभालेंगे. कुछ लोगों का कहना है कि गोटाबाया राष्ट्र को विकास के ट्रैक पर वापस ले जाएंगे, जबकि कुछ को डर है कि उनके शासन में नस्ल और धर्म के नाम पर श्रीलंका को विभाजित किया जाएगा.

यह भी पढ़ें: प्रेमदासा Vs राजपक्षे: श्रीलंका में किसके राष्ट्रपति बनने से भारत का फायदा?

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First published: November 17, 2019, 1:04 PM IST
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