प्लास्टिक कचरे से इंडोनेशिया को मुक्त करने में जुटीं सगी बहनें, कहा- कोरोना से बड़ा संकट

प्लास्टिक कचरे से इंडोनेशिया को मुक्त करने में जुटीं सगी बहनें, कहा- कोरोना से बड़ा संकट
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इंडोनेशिया की दो बहनें मालती विजसेन (Malti Wijsen) और इसाबेल विजसेन (Isabel Wijsen) पिछले कई सालों से बाली द्वीप को प्लास्टिक कचरे से मुक्त करने में लगी हुई हैं. यह काम उन्होंने सात साल पहले शुरू किया था.

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बाली. दुनियाभर में प्लास्टिक के कचरे (Plastic Garbage) का बोझ बढ़ता जा रहा है. यह उन जगहों पर ज्यादा है, जहां टूरिज्म अधिक है. ऐसी ही एक जगह है- इंडोनेशिया (Indonesia) का बाली द्वीप (Bali Island) . इस द्वीप पर इन दिनों दो सगी सुबह से शाम तक अक्सर देखी जाती हैं. ये बहनें समुद्र तट को कचरा मुक्त बनाने के लिए अपने अभियान में स्कूल के छात्र और छात्राओं को जोड़ रही हैं. इन बहनों के नाम हैं- मेलाती विजसेन (Melati Wisjen) और इसाबेल विजसेन (Isabel Wijsen). पर्यावरण के लिए दुनियाभर में अलख जगाने वाली दोनों बहनों का अभियान बाय बाय प्लास्टिक बैग्स 2013 में शुरू हुआ था.

मानसून सीजन में समुद्र तट पर इकट्ठा हो जाता है कचरा

दोनों बहनों से जब यह पूछा गया कि आप कोरोना संक्रमण के इस भयावह दौर में घर से बाहर निकलकर समुद्र तट पर रोज आ रही हैं और यहां प्लास्टिक कचरा चुन रही हैं? इसके जवाब में विजसेन बहनों ने कहा कि मानूसन सीजन के शुरू होते ही प्लास्टिक कचरों की यहां बाढ़ सी आ जाती है. उन्होंने कहा कि कोरोना काल के चलते यह समस्या इस साल और बड़ी हो गई. लॉकडाउन और सोशल डिस्टेंसिंग के चलते इस काम में सक्रिय रहना मुश्किल हो रहा है. हालांकि अगर हम यह काम रोक देते हैं तो बरसों की मेहनत बेकार चली जाएगी.




'कोरोना के चलते प्लास्टिक का उपभोग बढ़ा'

मेलाती ​विजसेन ने बताया कि कोरोना वायरस की सुरक्षा के मद्देनजर प्लास्टिक का कचरा बढ़ा है. अब सामान की होम डिलिवरी के चलते पैकेजिंग में प्लास्टिक का उपयोग बढ़ रहा है तब हमें ज्यादा मेहनत की जरूरत है. वहीं समुद्र तट पर इन दिनों लोगों की आवाजाही कम है, इसलिए प्लास्टिक कचरे को हटाने का काम बेहतर ढंग से किया जा सकता है.

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विजसेन बहनों ने बताया कि सरकार को कोरोना वायरस से लड़ने की तर्ज पर बिल्कुल युद्ध स्तर पर पर्यावरण बचाने की लड़ाई लड़नी पड़ेगी. उन्होंने कहा कि जाहिर सी बात है कि लॉकडाउन से पर्यावरण को बहुत फायदा पहुंचा है और यही वजह है कि हम सरकार से यह अनुरोध करते हैं कि जलवायु में आ रहे नकारात्मक परिवर्तन की गति को रोकने के लिए आगे आना चाहिए.
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