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कभी 'हानिकारक' पर रोक नहीं, कभी सामान्‍य शब्‍द पर प्रतिबंध लगा देता है फेसबुक

कभी 'हानिकारक' पर रोक नहीं, कभी सामान्‍य शब्‍द पर प्रतिबंध लगा देता है फेसबुक

फेसबुक स्थानीय बोली और विशेषज्ञों के साथ अधिक कर्मचारियों की भर्ती पर जोर दे रहा है. (प्रतीकात्‍मक फोटो)

फेसबुक स्थानीय बोली और विशेषज्ञों के साथ अधिक कर्मचारियों की भर्ती पर जोर दे रहा है. (प्रतीकात्‍मक फोटो)

विभिन्‍न भाषाओं में फेसबुक (Facebook) कभी तो हानिकारक, भड़काऊ और गलत शब्‍दों को प्रतिबंधित नहीं करता तो कभी सामान्‍य शब्‍दों को पूर्ण प्रतिबंधित कर देता है. ऐसी असफलताओं पर फेसबुक माफी मांग लेता है. हालांकि फाइलों की जांच से पता चलता है कि दुनिया के कुछ सबसे अस्थिर क्षेत्रों में, आतंकवादी सामग्री और अभद्र भाषा का प्रसार होता है क्योंकि कंपनी के पास ऐसे मध्यस्थों की कमी है जो स्थानीय भाषा बोलते हैं और सांस्कृतिक संदर्भों को समझते हैं.

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  • ए पी
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    दुबई . विभिन्‍न भाषाओं में फेसबुक (Facebook) कभी तो हानिकारक, भड़काऊ और गलत शब्‍दों को प्रतिबंधित नहीं करता तो कभी सामान्‍य शब्‍दों को पूर्ण प्रतिबंधित कर देता है. ऐसी असफलताओं पर फेसबुक माफी मांग लेता है. गत मई में गाजा युद्ध और पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के बीच इंस्टाग्राम (Instagram) ने हैशटैग (Hashtags) अल अक्सा पर कुछ समय के लिए प्रतिबंध लगा दिया, जो कि यरूशलम के पुराने शहर में अल-अक्सा मस्जिद का संदर्भ है, जो संघर्ष में एक मुख्य बिन्दु रहा है. इंस्टाग्राम का स्वामित्व रखने वाले फेसबुक ने बाद में माफी मांगते हुए कहा था कि इसके एल्गोरिदम ने इस्लाम के तीसरे सबसे पवित्र स्थल को आतंकवादी समूह अल-अक्सा मार्टर्स ब्रिगेड, धर्मनिरपेक्ष फतह पार्टी की सशस्त्र शाखा समझ लिया था.

    कई अरबी भाषी उपयोगकर्ताओं के लिए यह इस बात का नवीनतम उदाहरण था कि कैसे सोशल मीडिया की दिग्गज कंपनी इस क्षेत्र में राजनीतिक आवाज को दबा देती है. अरबी फेसबुक के प्लेटफॉर्म पर सबसे आम भाषाओं में से एक है, और कंपनी इसी तरह की खराब सामग्री को हटाने के बाद लगातार सार्वजनिक माफी जारी करती है. पूर्व फेसबुक उत्पाद प्रबंधक से व्हिसलब्लोअर बनीं फ्रांसेस हौगेन के आंतरिक कंपनी दस्तावेज़ दिखाते हैं कि समस्याएं कुछ अनजानी गलतियों की तुलना में कहीं अधिक व्यवस्थित हैं, और फेसबुक ने इन विफलताओं के स्तर को वर्षों तक समझा है, लेकिन इस बारे में किया कुछ नहीं है.

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    ऐसी त्रुटियां अरबी तक सीमित नहीं हैं. फाइलों की जांच से पता चलता है कि दुनिया के कुछ सबसे अस्थिर क्षेत्रों में, आतंकवादी सामग्री और अभद्र भाषा का प्रसार होता है क्योंकि कंपनी के पास ऐसे मध्यस्थों की कमी है जो स्थानीय भाषा बोलते हैं और सांस्कृतिक संदर्भों को समझते हैं. कंपनी के प्लेटफॉर्म कृत्रिम मेधा समाधान विकसित करने में विफल रहे हैं, जो विभिन्न भाषाओं में हानिकारक सामग्री को पकड़ सकते हैं.

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    अफगानिस्तान और म्यांमा जैसे देशों में, इन खामियों ने सोशल मीडिया मंच पर भड़काऊ भाषा को पनपने दिया है, जबकि सीरिया और फलस्तीन क्षेत्रों में, फेसबुक कई बार सामान्य शब्दों पर भी पूर्ण प्रतिबंध लगा देता है. यह मामला हौगेन के सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन संबंधी खुलासे पर आधारित है, जो कांग्रेस को उनकी कानूनी टीम द्वारा संशोधित रूप में भी प्रदान किया गया था. संशोधित संस्करणों की समीक्षा समाचार संगठनों के एक संघ द्वारा की गई, जिसमें एसोसिएटेड प्रेस शामिल है.

    एपी को दिए एक बयान में, फेसबुक के एक प्रवक्ता ने कहा कि पिछले दो वर्षों में कंपनी ने दुनिया भर में अपनी समीक्षा क्षमता को बढ़ाने के लिए स्थानीय बोली और विषय विशेषज्ञता के साथ अधिक कर्मचारियों की भर्ती पर जोर दिया है. लेकिन अरबी सामग्री के संबंध में कंपनी ने कहा, “हमें अभी और काम करना है. … हम इस जटिलता को बेहतर ढंग से समझने और यह पहचानने के लिए अनुसंधान करते हैं कि हम कैसे सुधार कर सकते हैं.’

    Tags: Ban, Facebook, Hashtags, Instagram

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