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तालिबान ने छिनी नौकरी, अब परिवार को पालने के लिए पिता बेच रहा 4 साल की बिटिया

तालिबान ने छिनी नौकरी, अब परिवार को पालने के लिए पिता बेच रहा 4 साल की बिटिया

अफगानिस्तान में आम लोगों में अस्थिरता और दहशत का माहौल है (AP)

अफगानिस्तान में आम लोगों में अस्थिरता और दहशत का माहौल है (AP)

नाजिर बस 580 डॉलर यानी भारतीय रुपयों में करीब 43,000 रुपये के लिए अपनी बेटी को बेचने के लिए तैयार हैं. उनके परिवार में सात लोग हैं और वो इन सातों को भूख से बचाने के लिए मजबूर हैं. 4 साल की उनकी बेटी साफिया घर में सबसे छोटी है और नाजिर को उम्‍मीद है कि ऐसा करने से उनकी गुड़‍िया की जिंदगी भी बच सकेगी.

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  • News18Hindi
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    काबुल. अफगानिस्‍तान (Afghanistan) पर कब्जा करने के बाद तालिबान (Taliban)ने सरकार बना ली है. भले ही तालिबान समावेशी सरकार का दावा कर रहा हो, मगर ये हकीकत है कि अफगानी पुलिसकर्मियों के बुरे दिन शुरू हो गए हैं. ऐसी ही एक कहानी है पूर्व पुलिसकर्मी मीर नाजिर की. तालिबान ने तमाम पुलिस स्टेशन पर कब्जा कर लिया है. पुरानी सरकार के वफादरों को आतंकियों के डर से नौकरी छोड़नी पड़ी है. नाजिर की भी नौकरी छूट गई, अब परिवार को भूख से बचाने के लिए वह अपनी चार साल की बच्ची को बेचने के लिए तैयार हो गए हैं.

    ब्रिटिश अखबार द टाइम्‍स ऑफ लंदन की एक खबर के मुताबिक, नाजिर बस 580 डॉलर यानी भारतीय रुपयों में करीब 43,000 रुपये के लिए अपनी बेटी को बेचने के लिए तैयार हैं. उनके परिवार में सात लोग हैं और वो इन सातों को भूख से बचाने के लिए मजबूर हैं. 4 साल की उनकी बेटी साफिया घर में सबसे छोटी है और नाजिर को उम्‍मीद है कि ऐसा करने से उनकी गुड़‍िया की जिंदगी भी बच सकेगी. नाजिर ने बताया है कि वो अपनी बच्‍ची को बेचने के लिए बातचीत भी कर रहे हैं.

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    नाजिर 15 अगस्त के पहले तक अफगान पुलिस में एक छोटे से कर्मचारी थे. तालिबान ने देश पर कब्‍जा किया और उनकी नौकरी चली गई. सारी सेविंग्‍स खत्‍म हो गई हैं और अब परिवार का पेट कैसे भरें, ये बड़ा सवाल हो गया है. घर का किराया भी चुकाना है.

    ‘मैं मर जाता, मगर मेरे मरने से कुछ नहीं होगा’
    38 साल के नाजिर ने बताया, ‘मैं अपनी बेटी को बेचने की जगह मरना पसंद करूंगा. मगर मेरी मौत से मेरे परिवार के किसी सदस्‍य का कोई भला नहीं होगा. फिर मेरे बाकी के बच्‍चों को कौन खिलाएगा.’ आंखों में आंसू लिए नाजिर ने आगे कहा, ‘ये मेरी पसंद या मेरे पास मौजूद विकल्‍प का मसला नहीं है, बल्कि यह निराशा और बेचैनी के बारे में है.’

    दुकान पर काम करेगी साफिया
    लंदन टाइम्स के रिपोर्टर एंथनी लॉयड ने नाजिर की स्‍टोरी को कवर किया है. लॉयड से बात करते हुए नाजिर ने कहा, ‘एक दुकानदार मिला. उसकी कोई औलाद नहीं है. उसने मुझे ऑफर दिया कि वो मेरी साफिया को खरीदना चाहता है. वो उसकी दुकान पर काम भी करेगी. हो सकता है, आगे आने वाले समय में उसकी तकदीर संवर जाए.’ दुकानदार ने हालांकि पहले 20 हजार अफगानीस यानी करीब 17 हजार रुपए में बेटी को खरीदने की इच्‍छा जताई थी. फिर मोल-तोल करके 50 हजार अफगानीस यानी करीब 43 हजार रुपये पर बात पक्की हुई है.

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    नाजिर आगे कहते हैं, ‘उस दुकानदार ने मुझसे वादा किया है कि अगर मैंने भविष्य में उसके पैसे लौटा दिए, तो वो मुझे मेरा लख्त-ए-जिगर (कलेजे का टुकड़ा) लौटा देगा. खुशी है कि मुल्क में अब जंग थम गई है, लेकिन गरीबी और भुखमरी नया दुश्मन है. ये मत समझिए कि मैं अपनी साफिया से प्यार नहीं करता. लेकिन, मजबूर हूं और कोई विकल्प भी तो नहीं.’

    Tags: Afghanistan Crisis, Afghanistan Taliban conflict, Afghanistan Terrorism

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