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तालिबान सरकार में जंग, हक्कानी नेता से कहासुनी के बाद बरादर ने छोड़ा काबुल- रिपोर्ट

तालिबान सरकार में जंग, हक्कानी नेता से कहासुनी के बाद बरादर ने छोड़ा काबुल- रिपोर्ट

मुल्ला बरादर को तालिबान सरकार में डिप्टी पीएम बनाया गया है (AP)

मुल्ला बरादर को तालिबान सरकार में डिप्टी पीएम बनाया गया है (AP)

15 अगस्त को अफगानिस्तान (Afghanistan) की राजधानी काबुल पर कब्जे के बाद से ही तालिबान (Taliban) और हक्कानी समूहों (Haqqani Network) के बीच नेतृत्व और सरकार गठन को लेकर संघर्ष रहा है. इसलिए सरकार बनाने में देरी हो रही थी. अब मुल्ला अब्दुल गनी बरादर (Mullah Abdul Ghani Baradar) के काबुल छोड़ने की खबर आ रही है.

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  • News18Hindi
  • Last Updated :

    काबुल. अफगानिस्‍तान (Afghanistan) पर तालिबान के कब्जे को एक महीने हो चुके हैं. अंतरिम सरकार भी बन चुकी है, मगर तालिबानी (Taliban) आतंकियों के शीर्ष नेतृत्‍व में अब आपस में ही ‘जंग’ शुरू हो गई है. दरअसल, तालिबान सरकार में डिप्टी प्रधानमंत्री मुल्ला अब्दुल गनी बरादर (Mullah Abdul Ghani Baradar) और हक्कानी नेटवर्क (Haqqani Network) के खलील उर-रहमान (Khalil-ur-Rahman) के समर्थक आपस में भिड़ गए. दोनों के बीच कहासुनी इतनी बढ़ गई है कि बरादर के काबुल छोड़ने की खबर है.

    बीबीसी ने अपनी एक रिपोर्ट में इसकी जानकारी दी है. एक वरिष्ठ तालिबानी नेता के हवाले से बीबीसी ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि काबुल के राष्ट्रपति कार्यालय में अंतरिम कैबिनेट को लेकर दोनों नेताओं के बीच बहस हुई थी. 15 अगस्त को काबुल पर कब्जे के बाद से ही तालिबान और हक्कानी समूहों के बीच नेतृत्व और सरकार गठन को लेकर संघर्ष रहा है. इसलिए सरकार बनाने में देरी हो रही थी.

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    बीबीसी पश्तो ने तालिबान के एक सूत्र के हवाले से अपनी रिपोर्ट में कहा है कि बरादर और हक्कानी के बीच तीखी बहस हुई है. इसके अलावा उनके समर्थकों के बीच भी झड़प हुई है. कतर में स्थित इस पूरे मामले की जानकारी रखने वाले एक और तालिबान सदस्य ने कहा है कि दोनों के बीच बीते सप्ताह बहस हुई थी.

    बीबीसी ने तालिबान सूत्रों के हवाले से कहा है कि बरादर काबुल छोड़ कंधार चले गए हैं. एक प्रवक्ता ने पहले कहा कि बरादर कंधार सुप्रीम नेता से मिलने गए हैं, बाद में बताया गया कि वह थक गए थे और अभी आराम करना चाहते हैं.

    हक्कानी नेटवर्क को पाकिस्तान का पूरा समर्थन है. हक्कानी खुद को तालिबान की सबसे फाइटर यूनिट मानता है. वहीं, बरादर के धड़े का मानना है कि उनकी कूटनीति के कारण तालिबान को अफगानिस्तान में सत्ता मिली है, जबकि हक्कानी नेटवर्क के लोगों को लगता है कि अफगानिस्तान में जीत लड़ाई के दम पर मिली है.

    तालिबान की अंतरिम सरकार के ऐलान के बाद मुल्‍ला बरादर को सार्वजनिक रूप से देखा नहीं गया है. इससे अटकलों को और ज्‍यादा बल मिल रहा है. हाल ही में ऐसी खबरें थी कि हक्कानी के साथ हुए झड़प में बरादर या तो घायल है या मारा गया है. हालांकि, तालिबान ने एक ऑडियो जारी करके कहा कि मुल्‍ला बरादर ठीक हैं और वह कंधार में है.

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    बरादर और हक्‍कानी के बीच विवाद की क्या है वजह
    तालिबानी नेतृत्‍व का मानना है कि उन्‍हें अमेरिका पर जीत कूटनीति की वजह से मिली है और उधर, हक्‍कानी नेटवर्क का दावा है कि हमें अफगानिस्‍तान पर जीत युद्ध के जरिए मिली है. मुल्‍ला बरादर कतर की राजधानी दोहा में तालिबान के राजनीतिक कार्यालय का प्रमुख था. यही पर अमेरिका और तालिबान के बीच बातचीत शुरू हुई और अंत में समझौता हुआ. पहले चर्चा थी कि बरादर ही पीएम बनाया जाएगा. मगर मुल्ला हसन अखुंद को पीएम बनाया गया और बरादर को डिप्टी पद से ही संतोष करना पड़ा.

    इसके बाद मुल्‍ला बरादर और हक्‍कानी नेटवर्क के बीच विवाद बढ़ने की खबरें तेज हो गईं. मुल्‍ला बरादर के लापता होने की खबर को उस समय हवा मिली जब कतर के विदेश मंत्री की बेहद अहम यात्रा के दौरान मुल्‍ला बरादर नहीं दिखाई दिया. अफगानिस्‍तान के वरिष्‍ठ पत्रकार हिज्‍बुल्‍ला खान कहते हैं कि इस पूरे विवाद की जड़ में अमेरिका पर जीत की वजह है.

    Tags: Afghanistan Crisis, Afghanistan Taliban conflict

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