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Taliban on India: तालिबान के शीर्ष नेता ने कहा- भारत हमारे लिए अहम, चाहते हैं व्यापारिक और सांस्कृतिक रिश्ते

Taliban on India: तालिबान के शीर्ष नेता ने कहा- भारत हमारे लिए अहम, चाहते हैं व्यापारिक और सांस्कृतिक रिश्ते

तालिबान अफगानिस्तान में एक समावेशी सरकार बनाने के लिए संघर्ष कर रहा है. (फाइल फोटो)

तालिबान अफगानिस्तान में एक समावेशी सरकार बनाने के लिए संघर्ष कर रहा है. (फाइल फोटो)

Taliban on India: दोहा में तालिबान कार्यालय के उपप्रमुख शेर मोहम्मद अब्बास स्तानकजई ने 1980 में अफगान आर्मी कैडेट के रूप में देहरादून स्थित इंडियन मिलिट्री एकेडमी में ट्रेनिंग ली थी. 1996 में काबुल पर तालिबान के कब्जे के बाद उन्होंने केयर टेकर सरकार में उप विदेश मंत्री का कार्यभार संभाला था.

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    काबुल. नई दिल्ली के साथ भविष्य में अपने रिश्तों का संकेत देते हुए ताबिलान (Taliban) के एक शीर्ष नेता ने कतर (Qatar) की राजधानी दोहा (Doha) में कहा कि भारत, उपमहाद्वीप के लिए बहुत मायने रखता है और तालिबान पहले की तरह ही भारत के साथ सांस्कृतिक, आर्थिक, राजनीतिक और व्यापारिक रिश्ते बरकरार रखना चाहेगा. इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक ये बयान दोहा में तालिबान कार्यालय के डिप्टी हेड शेर मोहम्मद अब्बास स्तानकजई (Sher Mohammad Abbas Stanekzai) ने दिया है. स्टैनकजई ने शनिवार को तालिबान के सोशल मीडिया अकाउंट और अफगानिस्तान के मिल्ली टेलीविजन (Afghanistan Milli Television) पर 46 मिनट के एक वीडियो पर भारत के साथ तालिबान के रिश्तों पर अपनी बात रखी.

    तालिबान नेता का ये बयान बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि पाकिस्तान के रिश्ते ताालिबान के साथ बेहद घनिष्ठ हैं, और इस्लामाबाद (Islamabad) भारत के साथ अफगानिस्तान के मजबूत संबंधों को अपने नकारात्मक तौर पर देखता रहा है. साथ ही 15 अगस्त को काबुल पर कब्जे के बाद तालिबान के किसी वरिष्ठ नेता का यह पहला बयान है, जिसमें सीधे तौर पर भारत के साथ रिश्तों पर बात की गई है. बता दें कि भारत की अध्यक्षता वाले संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) ने अफगानिस्तान पर अपने बयान में तालिबान का संदर्भ नहीं दिया और कहा कि अफगान समूह आतंकियों का समर्थन न करें और ना ही किसी देश के खिलाफ अपनी जमीन का इस्तेमाल होने दें.

    देहरादून स्थित IMA में ली है ट्रेनिंग
    बता दें कि स्टैनकजई ने 1980 में अफगान आर्मी कैडेट के रूप में देहरादून स्थित इंडियन मिलिट्री एकेडमी में ट्रेनिंग ली थी. 1996 में काबुल पर तालिबान के कब्जे के बाद उन्होंने केयर टेकर सरकार में उप विदेश मंत्री का कार्यभार संभाला था. स्टैनकजई का बयान उस समय आया है, जब भारत ने काबुल से अपने सभी राजनयिकों को वापस बुला लिया है और काबुल स्थित दूतावास को खाली कर दिया गया है.

    स्टैनकजई ने कहा, “उपमहाद्वीप के लिए भारत बेहद महत्वपूर्ण है. हम पहले की तरह ही भारत के साथ सांस्कृतिक, आर्थिक और व्यापारिक रिश्ते बनाए रखना चाहते हैं. हम भारत के साथ अपने राजनीतिक, आर्थिक और व्यापारिक संबंधों को महत्व देंगे और उन्हें बनाए रखना चाहेंगे. हम इस संदर्भ में भारत के साथ काम करने के बारे में विचार कर रहे हैं.”

    भारत के साथ व्यापार पर भी रखी अपनी बात
    क्षेत्र में व्यापार के मामले में स्टैनकजई ने कहा, “पाकिस्तान से होकर भारत के व्यापार हमारे लिए बेहद महत्वपूर्ण है. साथ ही भारत के साथ व्यापार के लिए हमारे हवाई रास्ते भी खुले रहेंगे.” तालिबान का नेता का ये बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि पाकिस्तान ने अफगानिस्तान और भारत के बीच जमीनी रास्तों द्वारा व्यापार और संपर्क हमेशा बंद किया है.

    तुर्कमेनिस्तान के साथ अफगानिस्तान के संबंधों पर बात करते हुए स्टैनकजई ने तुर्केमेनिस्तान, अफगानिस्तान, पाकिस्तान और भारत के साझे वाले तापी गैस पाइपलाइन प्रोजेक्ट का जिक्र किया और कहा कि सरकार बनने के बाद तालिबान विचार करेगा कि किन वजहों से प्रोजेक्ट पूरा होने में समस्या आ रही है. उन्होंने भारत द्वारा विकसित किए जा रहे चाबहार प्रोजेक्ट का जिक्र किया और ईरान के साथ अपने रिश्तों का जिक्र करते हुए इसके व्यापारिक महत्व को रेखांकित किया.

    बयानों का विश्लेषण कर रहा साउथ ब्लॉक
    बता दें कि पिछले दो हफ्ते से तालिबान के प्रवक्ता सुहैल शाहीन और जबीउल्लाह मुजाहिद भारत के साथ संबंधों पर संगठन के विचार को साझा कर रहे हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक नई दिल्ली स्थित साउथ ब्लॉक तालिबान के इन बयानों का सावधानीपूर्वक विश्लेषित कर रहा है, लेकिन अधिकारियों ने इस बात को रेखांकित किया है कि तालिबान ने भारतीय नागरिकों और राजनयिकों के काबुल से निकलने में पूरा सहयोग किया.

    Tags: Afghanistan, Doha, Indian Military Academy, Qatar, Sher Mohammad Abbas Stanekzai, Taliban

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