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न घायल हुआ और न भागा, तालिबान में भी कोई दिक्कत नहीं- मुल्ला बरादर का इंटरव्यू

न घायल हुआ और न भागा, तालिबान में भी कोई दिक्कत नहीं- मुल्ला बरादर का इंटरव्यू

तालिबान सरकार में मतभेद की खबरें उप-प्रधानमंत्री मुल्ला अब्दुल गनी बरादर के सार्वजनिक मंच से गायब होने के बाद से ही जोर पकड़ रही थीं (AP)

तालिबान सरकार में मतभेद की खबरें उप-प्रधानमंत्री मुल्ला अब्दुल गनी बरादर के सार्वजनिक मंच से गायब होने के बाद से ही जोर पकड़ रही थीं (AP)

मुल्ला अब्दुल गनी बरादर (Mullah Abdul Ghani Baradar) ने कहा कि अफगान में विदेशी सेनाओं के कब्जे को खत्म करने के लिए हमने बलिदान दिया है और कई सालों तक संघर्ष किया है. यह बलिदान और संघर्ष न सत्ता के लिए है और न पद के लिए.

  • News18Hindi
  • Last Updated :

    काबुल. अफगानिस्तान (Afghanistan) में तालिबान सरकार (Taliban) बनने के बाद से ही संगठन में फूट और संघर्ष की खबरें आ रही थीं. हक्कानी नेटवर्क (Haqqani Network) के नेता के साथ हुए संघर्ष के बाद पहले मुल्ला अब्दुल गनी बरादर (Mullah Abdul Ghani Baradar) के मारे जाने या घायल होने की अफवाहें थीं. फिर उसके काबुल छोड़कर कंधार जाने की खबर आई. अब खुद मुल्ला बरादर ने सामने आकर इन सभी अटकलों को खारिज किया है. मुल्ला बरादर ने कहा कि वो न तो जख्मी हुआ है और न काबुल से भागा है. तालिबान में भी सबकुछ ठीक चल रहा है.

    सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, अफगान नेशनल टीवी के साथ एक इंटरव्यू में मुल्ला बरादर ने इन खबरों को अफवाह बताकर इसका खंडन किया कि वह पिछले हफ्ते काबुल में राष्ट्रपति भवन में एक विवाद में घायल हो गया था.
    बरादर ने कहा, ‘नहीं, यह बिल्कुल भी सच नहीं है. अल्लाह का शुक्र है कि मैं फिट हूं. मीडिया के दावे में कोई सच्चाई नहीं है कि हमारे बीचे आतंरिक असहमति है या फिर आंतरिक रार है.’

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    इससे पहले बुधवार को तालिबान सरकार में डिप्टी प्रधानमंत्री मुल्ला अब्दुल गनी बरादर (Mullah Abdul Ghani Baradar) और हक्कानी नेटवर्क (Haqqani Network) के खलील उर-रहमान (Khalil-ur-Rahman) के समर्थकों में भिड़ंत की खबर आई थी. बताया जा रहा था कि दोनों के बीच कहासुनी इतनी बढ़ गई है कि बरादर ने काबुल छोड़ दिया. हालांकि, बरादर ने इससे इनकार किया है. उसका कहना है कि वह काबुल में ही है.

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    बरादर ने कहा कि अफगान में विदेशी सेनाओं के कब्जे को खत्म करने के लिए हमने बलिदान दिया है और कई सालों तक संघर्ष किया है. यह बलिदान और संघर्ष न सत्ता के लिए है और न पद के लिए.

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    मालूम हो कि तालिबान सरकार में मतभेद की खबरें उप-प्रधानमंत्री मुल्ला अब्दुल गनी बरादर के सार्वजनिक मंच से गायब होने के बाद से ही जोर पकड़ रही हैं. सोशल मीडिया पर यह भी दावा किया गया था कि राष्ट्रपति भवन में हक्कानी नेटवर्क और तालिबानी लड़ाकों के बीच हुए संघर्ष में मुल्ला बरादर मारा गया है. हालांकि, इससे पहले भी मुल्ला बरादर ने बाद में एक ऑडियो संदेश जारी कर अपनी मौत की खबरों को बेबुनियाद करार दिया था.

    Tags: Afghanistan Crisis, Afghanistan Taliban conflict, Mullah Abdul Ghani Baradar

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