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अफगानिस्तान में फिर से फैल रहा तालिबान का आतंक, भारत ने लिया ये बड़ा फैसला

अफगानिस्तान में बीते दो दशक तक चले युद्ध के बाद अमेरिका और नाटो देशों के सैनिक यहां से वापस जा रहे हैं.  (AP)

अफगानिस्तान में बीते दो दशक तक चले युद्ध के बाद अमेरिका और नाटो देशों के सैनिक यहां से वापस जा रहे हैं. (AP)

अफगान (Afghanistan) शहरों और भीतरी इलाकों सुरक्षा की स्थितियों को देखते हुए कई देश दूतावासों और वाणिज्य दूतावासों के संचालन के लिए असमर्थ होते जा रहे हैं. तालिबान (Taliban) के हमले के डर से अफगान अधिकारी खुद अपने सरकारी नियंत्रण वाले क्षेत्रों से भागने लगे हैं.

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    काबुल. अफगानिस्तान (Afghanistan) से अमेरिकी सैनिकों (US Forces) की वापसी जारी है. इस बीच तालिबान (Taliban) ने कई इलाकों में कब्जा जमा लिया है. अफगानिस्तान की मौजूदा स्थिति को लेकर भारत समेत कई देशों ने चिंता जाहिर की है. वहीं, भारत ने वहां रहे रहे नागरिकों की सुरक्षा को लेकर बड़ा फैसला किया है.

    इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, अफगानिस्तान में तालिबान के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए भारत ने अपने अधिकारियों और नागिरकों को निकालने की तैयारी में है. इंडिया टुडे ने एक शीर्ष अधिकारी के हवाले से कहा है कि अफगानिस्तान में काबुल, कंधार और मजार-ए-शरीफ शहरों में मौजूद हमारे कर्मचारियों और अन्य कर्मियों को निकालने की योजना पर काम किया जा रहा है.

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    अफगान शहरों और भीतरी इलाकों सुरक्षा की स्थितियों को देखते हुए कई देश दूतावासों और वाणिज्य दूतावासों के संचालन के लिए असमर्थ होते जा रहे हैं. तालिबान के हमले के डर से अफगान अधिकारी खुद अपने सरकारी नियंत्रण वाले क्षेत्रों से भागने लगे हैं.

    देश छोड़ना चाहते हैं 50 हजार से ज्यादा अफगान नागरिक
    करीब 50 हजार से ज्यादा अफगान नागरिक देश छोड़कर जाना चाहते हैं. अमेरिकी सेना की मदद करने वाले अनुवादकों सहित अन्य अफगानिस्तानियों के पड़ोसी देशों में शरण लेने की प्लानिंग है. इसमें अमेरिका मदद कर रहा है. मध्य एशिया के तीन देशों- कजाखस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान से इस मामले पर बातचीत चल रही है.

    अमेरिकी सेना ने छोड़ा बरगाम एयरफील्ड
    इस बीच अफगानिस्तान से विदेशी सैनिकों की वापसी हो रही है. इसी कड़ी में अमेरिकी सेना ने करीब 20 साल के बाद बगराम एयरफील्ड को छोड़ दिया है, जो कभी तालिबान को उखाड़ फेंकने के लिए हुए युद्ध और अमेरिका पर 9/11 में हुए आतकंवादी हमले के जिम्मेदार अल-कायदा के साजिशकर्ताओं की धर-पकड़ के लिए सेना का केंद्र रहा था.

    अधिकारियों ने बताया कि एयरफील्ड ‘अफगान राष्ट्रीय सुरक्षा एवं रक्षा बल’ को पूरी तरह से सौंप दिया गया है. एक अधिकारी ने बताया कि बलों की रक्षा का अधिकार और क्षमताएं अभी भी अफगानिस्तान में अमेरिका के शीर्ष कमांडर जनरल ऑस्टिन एस मिलर के पास हैं. अधिकारी ने अपनी पहचान ना बताने की शर्त पर कहा, ‘गठबंधन की पूरी सेना ने बाग्राम को छोड़ दिया है.’ हालांकि उन्होंने ये नहीं बताया कि काबुल के 50 किमी उत्तर में स्थित इस बेस को सैनिकों ने कब छोड़ा.

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    11 सितंबर तक अमेरिकी सेना की पूरी तरह हो जाएगी वापसी
    इसके साथ ही अधिकारी ने ये भी साफ नहीं बताया कि बेस आधिकारिक तौर पर अफगान सेना को कब सौंपा जाएगा. पहचान न बताने की शर्त पर समाचार एजेंसी एएफपी से वरिष्ठ अफगान अधिकारी ने कहा, ‘हमें अभी तक अफगान सेना को आधिकारिक तौर पर बेस सौंपने को लेकर कोई जानकारी नहीं मिली है.’ अफगानिस्तान में बीते दो दशक तक चले युद्ध के बाद अमेरिका और नाटो देशों के सैनिक यहां से वापस जा रहे हैं. अमेरिका ने इसकी समयसीमा 11 सितंबर रखी है.

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