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बांग्लादेश के रोहिंग्या रिफ्यूजी कैंप में फायरिंग, 7 लोगों की मौत

बांग्लादेश के रोहिंग्या रिफ्यूजी कैंप में फायरिंग, 7 लोगों की मौत

 ये हमला रोहिंग्या रिफ्यूजी कैंप में स्थित मदरसे में हुआ. (AP)

 ये हमला रोहिंग्या रिफ्यूजी कैंप में स्थित मदरसे में हुआ. (AP)

बांग्लादेश (Bangladesh) के कॉक्स बाजार (Cox’s Bazar) में दुनिया का सबसे बड़ा रोहिंग्या रिफ्यूजी (Rohingya refugees) कैंप है. यहां करीब 10 लाख रोहिंग्या रहते हैं. ये रोहिंग्या 2017 में म्यांमार से भागकर आए थे. 2017 में बौद्ध बहुसंख्यक देश म्यांमार में  वहां की सेना ने रोहिंग्या के खिलाफ कार्रवाई की थी.

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    ढाका. बांग्लादेश (Bangladesh) के कॉक्स बाजार (Cox’s Bazar) स्थित रोहिंग्याओं के रिफ्यूजी कैंप (Rohingya refugees) में शुक्रवार को गोलीबारी हुई. इस दौरान 7 लोगों के मारे जाने की खबर है. समाचार एजेंसी एएफपी ने बांग्लादेश पुलिस के हवाले से यह जाकारी दी.

    ढाका ट्रिब्यून के मुताबिक, ये हमला रोहिंग्या रिफ्यूजी कैंप में स्थित मदरसे में हुआ. सुबह करीब 4 बजे उखिया में कैंप नंबर 18 के ब्लॉक एच-52 में मदरसे पर अज्ञात हमलावरों ने हमला किया. पहले इस हमले को दो प्रतिद्वंद्वी रोहिंग्या ग्रुप्स में संघर्ष बताया गया. फायरिंग में 4 लोगों की मौके पर मौत हो गई, जबकि 3 लोगों ने अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ा.

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    बांग्लादेश के कॉक्स बाजार में दुनिया का सबसे बड़ा रोहिंग्या रिफ्यूजी कैंप है. यहां करीब 10 लाख रोहिंग्या रहते हैं. म्यांमार की सेना की बर्बरता का शिकार होकर 2017 में समुदाय के लाखों लोग जान बचाकर बांग्लादेश पहुंचे थे. अधिकांश रोहिंग्या मुसलमानों ने कॉक्स बाजार कैंप में शरण ली है और इसे दुनिया का सबसे बड़ा शरणार्थी शिविर कहा जाता है.

    बांग्लादेश को उम्मीद थी कि म्यांमार में हालात सुधरने के बाद ये वापस लौट जाएंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. अब रोहिंग्या मुसलमानों को कॉक्स बाजार से भाषणचार द्वीप पर शिफ्ट किया जा रहा है. कॉक्स बाजार से यहां करीब 1 लाख लोगों को लाए जाने की योजना है.

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    2016-17 संकट से पहले म्यांमार में करीब 8 लाख रोहिंग्या लोग रहते थे. यह लोग इस देश की सरज़मीन पर सदियों से रहते आए हैं, लेकिन बर्मा (म्यांमार का पुराना नाम) के बौद्ध लोग और वहां की सरकार इन लोगों को अपना नागरिक नहीं मानते. यहां रोहिंग्याओं को अत्याचार और उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है. बड़ी संख्या में रोहिंग्या लोग बांग्लादेश और थाईलैंड की सरहदों पर स्थित शरणार्थी कैंपों में अमानवीय हालातों में रहने को मजबूर हैं.

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