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तालिबान के कब्जे के बाद करजई ने भारतीय दूत को दी थी ये सलाह! वापसी पर जताई खुशी

तालिबान के कब्जे के बाद करजई ने भारतीय दूत को दी थी ये सलाह! वापसी पर जताई खुशी

हामिद करजई ने भारतीय राजदूत रुद्रेंद्र टंडन से देश नहीं छोड़ने का आग्रह किया था (twitter.com/KarzaiH)

हामिद करजई ने भारतीय राजदूत रुद्रेंद्र टंडन से देश नहीं छोड़ने का आग्रह किया था (twitter.com/KarzaiH)

अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई ने कहा कि ‘बिल्कुल, बहुत साफ तौर पर मैंने उनको न जाने की सलाह दी थी. भारत के वापस जाने का कोई कारण नहीं था, मुझे खुशी है कि वे वापस आ रहे हैं.’

हाइलाइट्स

हामिद करजई ने भारतीय राजदूत रुद्रेंद्र टंडन से देश नहीं छोड़ने का आग्रह किया था
हामिद करजई ने कहा- भारत के वापस जाने का कोई कारण नहीं था
हामिद करजई ने कहा- मुझे खुशी है कि वे वापस आ रहे हैं

काबुल. पिछले साल 15 अगस्त को तालिबान के अफगानिस्तान पर  कब्जा करने के बाद भारत जब काबुल में अपने दूतावास को बंद करने की तैयारी कर रहा था, तो पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई ने भारतीय राजदूत रुद्रेंद्र टंडन से देश नहीं छोड़ने का आग्रह किया था. बहरहाल करजई ने भारतीय राजदूत से हुई बातचीत का खुलासा करने के इनकार किया.

अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई ने इंडियन एक्सप्रेस को दिए एक साक्षात्कार में कहा कि ‘बिल्कुल, बहुत साफ तौर पर मैंने उनको न जाने की सलाह दी थी. भारत के वापस जाने का कोई कारण नहीं था, मुझे खुशी है कि वे वापस आ रहे हैं. मैं भारत सरकार के नेताओं से दूतावास को फिर से पूरी तरह खोलने का आग्रह कर रहा हूं. अफगानिस्तान और भारत के बीच इतने संबंध हैं कि यहां भारत की मौजूदगी की जरूरत है. इसलिए मुझे खुशी है कि वे लौट रहे हैं और मैं चाहता हूं कि वे पूरी ताकत से लौटें.’

करजई ने 1979-1983 तक भारत में पढ़ाई की है और उन्होंने कहा कि दिल्ली को प्राथमिकता के आधारTalibanTaliban पर अफगानिस्तान के उन कॉलेज छात्रों को फिर से वीजा जारी करना चाहिए, जो भारत में पढ़ाई कर रहे हैं. उन्हें वीजा मिलने में कठिनाई हो रही है. उन्होंने कहा कि अफगान छात्रों की भारत वापसी महत्वपूर्ण है.

करजई ने कहा कि भारत और अफगानिस्तान के लोगों के पुराने संबंधों के कारण अफगानिस्तान में भारत की जगह है और भारत में अफगानिस्तान का स्थान है. इसलिए, अफगान लोगों के साथ यह जुड़ाव जरूरी है और भारत को वापस लौटना चाहिए.  करजई ने 2002 से 2014 तक अफगानिस्तान के राष्ट्रपति का पद संभाला था. तालिबान के कब्जे के पहले राष्ट्रपति अशरफ गनी के देश से पलायन की खबरों के बीच करजई और अब्दुल्ला अब्दुल्ला ऐसे दो नेता थे, जो काबुल में बने रहे. इससे काबुल के निवासियों को बहुत भरोसा मिला.

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तब से अब्‍दुल्‍ला इस साल की शुरुआत में भारत समेत विदेश यात्रा कर चुके हैं. जबकि करजई को घर पर और पूरे काबुल शहर में मेहमानों से मिलने की इजाजत है, लेकिन उनको काबुल से निकलने की इजाजत नहीं है. तालिबान ने उनके विदेश यात्रा के अनुरोध को ठुकरा दिया है. यह पूछे जाने पर कि क्या वह तालिबान के कैदी हैं? उन्होंने कहा कि ‘नहीं, मैं अभी विदेश नहीं जा सका हूं. फिर भी मैं इसे कैद नहीं कहूंगा.’

Tags: Afghanistan, India, Kabul, Taliban

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