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Nepal Political Crisis : सीपीएन-यूएमएल ने 11 बागी सांसदों को दिखाया बाहर का रास्ता, सियासी ड्रामा जारी

ओली ने पार्टी के 11 बागी सांसदों को निष्कासित किया.

पड़ोसी देश नेपाल में कोरोना महामारी के बीच सियासी ड्रामा जारी है. नेपाल में पिछले 5 महीने के अंदर दूसरी बार संसद भंग की जा चुकी है. राष्ट्रपति ने मध्यावधि चुनाव का आदेश दे दिया है. इधर पीएम केपी शर्मा ओली ने अपनी पार्टी के उन सांसदों को बाहर का रास्ता दिखा दिया है, जिन्होंने विपक्ष के महागठबंधन में अपनी जगह बनाई.

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    काठमांडू. नेपाल में सत्तारूढ़ नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी-यूनिफाइड मार्कसिस्ट लेननिस्ट (सीपीएन-यूएमएल) ने सोमवार को अपने 11 सांसदों को पार्टी से निष्कासित कर दिया. सांसदों पर ये कार्रवाई प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की सरकार गिराने की कोशिश में विपक्षी गठबंधन को समर्थन देने की वजह से की गई. सीपीएन-यूएमएल की स्थायी समिति ने सोमवार को हुई एक बैठक के दौरान पूर्व प्रधानमंत्रियों माधव कुमार नेपाल और झालानाथ खनल समेत 11 सांसदों के खिलाफ कार्रवाई का निर्णय लिया. ओली सरकार को गिराने के लिये विपक्षी दलों का साथ देने के आरोपी निष्कासित सांसद अब पार्टी के महासचिव के पद पर भी नहीं रहेंगे.

    इन सांसदों को अपने कृत्य पर सोमवार सुबह तक स्पष्टीकरण देने का समय दिया गया था, जिसके पूरा होने के बाद उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया गया. 'द हिमालियन टाइम्स' की खबर के मुताबिक सांसदों ने पार्टी के खिलाफ जाने और विपक्षी गठबंधन को समर्थन देने के फैसले पर समिति को स्पष्टीकरण देने से इनकार कर दिया. प्रधानमंत्री ओली की ओर से पेश किये गए निष्कासन प्रस्ताव को सत्तारूढ़ दल में टूट की आधिकारिक शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है. ओली ने नेपाल-खनल धड़े के 12 और नेताओं को 24 घंटे का अल्टीमेटम देकर विपक्षी गठबंधन को समर्थन देने पर स्पष्टीकरण मांगा है.

    नेपाल में 5 महीने में दूसरी बार सदन भंग
    उधर नेपाल के विपक्षी गठबंधन ने प्रतिनिधि सभा को बहाल करने और नेपाली कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शेर बहादुर देउबा को पीएम नियुक्त करने का अनुरोध करते हुए सुप्रीम कोर्ट में रिट याचिका दाखिल की है. पीएम केपी शर्मा ओली की सिफारिश पर राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी ने सदन को भंग करने का आदेश दे दिया था और 12 से 19 नवंबर के बीच मध्यावधि चुनाव की घोषणा की थी. नेपाल में 5 महीने के अंदर दूसरी बार सदन भंग किया गया है.

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    विपक्ष के गठबंधन ने किया न्यायालय का रुख
    जिसके दो दिन बाद गठबंधन ने न्यायालय का रुख किया है. नेपाल में 10 मई को ओली की सरकार विश्वासमत हासिल करने में नाकामयाब रहने के बाद अल्पमत में आ गई थी. इसके बाद शुक्रवार को देउबा ने 149 सांसदों के समर्थन के साथ सरकार बनाने का दावा पेश किया था. विपक्षी गठबंधन की याचिका में कहा गया है कि संसद को भंग करने का फैसला असंवैधानिक है क्योंकि नेपाल संविधान के अनुच्छेद 76 (5) के मुताबिक नई सरकार के गठन की गुंजाइश है. ऐसे में नेपाल का प्रधानमंत्री बनाया जाना चाहिए. याचिका में महामारी के बीच चुनाव से संबंधित कार्यक्रमों को रोकने और नवंबर में चुनाव की घोषणा को रद्द करने की भी मांग की गई है. इस याचिका पर प्रतिनिधि सभा के 146 सदस्यों के दस्तखत हैं.
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