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Nepal Crisis: सत्ता बचाने और मतभेद दूर करने के लिए ओली ने गठित किया संयुक्त कार्यबल

नेपाल के पीएम के सामने अब चुनौती विश्वासमत पाने की है.

पड़ोसी राज्य नेपाल में एक बार फिर राजनीतिक उठापटक जारी है. प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली विश्वासमत हारने के बाद फिर पीएम बनने का मौका पा चुके हैं. अब उनके सामने चुनौती विश्वासमत हासिल करने की है, हालांकि इस वक्त उनकी पार्टी में दो फाड़ स्पष्ट रूप से नजर आ रहा है.

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    काठमांडू. नेपाल इस वक्त कोरोना के कहर के अलावा राजनीतिक उठापटक से भी जूझ रहा है. एक बार फिर सीपीएन-यूएमएल के नेता केपी शर्मा ओली को प्रधानमंत्री पद की शपथ दिलाई गई है. वो बात अलग है कि इस शपथ को लेकर भी काफी विवाद हुआ. फिलहाल प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की अगुआई वाले नेपाल के सत्तारूढ़ दल सीपीएन-यूएमएल के सामने अपनी सरकार बचाना ही सबसे बड़ी चुनौती है. अल्पमत वाली सरकार के लिए खतरा बन रहे पार्टी के अंदरूनी मतभेदों को दूर करने के लिए दोनों विरोधी धड़ों से 10 सदस्यीय संयुक्त कार्यबल गठित किया गया है.

    हिमालय टाइम्स अखबार की ओर से मिली खबर के मुताबिक नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (एकीकृत मार्क्सवादी लेनिनवादी) के प्रमुख ओली ने रविवार को माधव कुमार नेपाल के साथ अकेले में बातचीत की थी और अंदरूनी मतभेदों को दूर करने के लिए दोनों धड़ों के पांच-पांच सदस्यों का एक कार्यबल बनाने का फैसला किया था. माधव कुमार नेपाल प्रतिद्वंद्वी धड़े के अग्रसर नेता हैं. माई रिपब्लिका न्यूज पोर्टल के अनुसार, इस कार्यबल की जिम्मेदारी पार्टी को 16 मई, 2018 के स्वरूप में लाने और सुलह कायम कराने की है. खबर के अनुसार, नेपाल के धड़े की अगुआई भीम बहादुर रावल करेंगे जबकि ओली धड़े का नेतृत्व संसदीय दल के उप नेता सुभाष चंद्र नेम्बांग करेंगे.

    विश्वास मत जीतने की है चुनौती
    सीपीएन-यूएमएल में नेपाल धड़े के सांसदों ने सामूहिक रूप से प्रतिनिधि सभा से इस्तीफा देने की धमकी दी थी. हालांकि तब उन्होंने अपना विचार बदल लिया जब ओली ने विश्वास मत से पहले पार्टी के विरुद्ध काम करने को लेकर नेपाल समेत 4 बागी नेताओं के खिलाफ कार्रवाई वापस ले ली. दोनों धड़ों के नेताओं के बीच बैठक गुरुवार को हुई थी. 10 मई को ओली ने विश्वास मत हासिल करने का प्रयास किया था. लेकिन नेपाल धड़े के 28 सदस्य अनुपस्थित रहे. ऐसी परिस्थिति में 69 वर्षीय प्रधानमंत्री प्रतिनिधि सभा में विश्वासमत हार गए. ओली को गुरुवार को फिर प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया क्योंकि नेपाली कांग्रेस और नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी केंद्र) अगली सरकार के गठन के लिए बहुमत नहीं जुटा पाई. नेपाल के मौजूदा नियमों के अनुसार, ओली को नियुक्ति के 30 दिनों के अंदर विश्वासमत जीतने की चुनौती है. ऐसे में ओली मतभेद खत्म कर सरकार को स्थिर रखने की कोशिश में जुटे हैं.