नेपाल के ऊपरी सदन ने भी नए विवादित नक्‍शे को दी मंजूरी, भारत के कई हिस्सों को बताया अपना

नेपाल के ऊपरी सदन ने भी नए विवादित नक्‍शे को दी मंजूरी, भारत के कई हिस्सों को बताया अपना
नेपाल के विदेश मंत्री प्रदीप ग्वाली नक्शा दिखाते हुए (फोटो- Ap)

Nepal New Map: सभी 57 मौजूद सदस्यों ने विधेयक के समर्थन में मतदान किया. इसके बाद नेपाल के राष्ट्रीय प्रतीक में नक्शे को बदलने का रास्ता साफ हो गया है.

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काठमांडू. नेपाल (Nepal) की नेशनल असेम्बली ने भी देश के नए नक्शे को मंजूरी दे दी है. नेपाल ने नए नक्शे (New Map of Nepal) में भारत के तीन क्षेत्रों को अपना बताया है. संविधान संशोधन विधेयक को बृहस्पतिवार को सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया. सभी 57 मौजूद सदस्यों ने विधेयक के समर्थन में मतदान किया. इसके बाद नेपाल के राष्ट्रीय प्रतीक में नक्शे को बदलने का रास्ता साफ हो गया है. निचले सदन में इसे पहले ही पास करा लिया गया था. नेपाल के कई सांसदों ने देश के इस कदम पर सवाल उठाए हैं.

नक्शे पर क्या है नेपाल की दलील
संशोधित नक्शे में भारत की सीमा से लगे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण लिपुलेख, कालापानी और लिंपियाधुरा इलाकों पर दावा किया गया है. नेपाल का कहना है कि जिन इलाकों को उसने नए नक्शे में अपना हिस्सा बताया है, वहां साल 1962 तक उनका कब्जा था. उनकी दलील है कि वहां वो जनगणना करवाते थे. इसके अलावा जमीन रजिस्ट्री की लोगों को सर्टिफिकेट भी देते थे. हालांकि भारत ने नेपाल के दावों को पहले ही खारिज कर दिया है.

भारत ने दावों को किया खारिज
भारत ने शनिवार को नेपाल के मानचित्र में बदलाव करने से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक को नेपाली संसद के निचले सदन में पारित किए जाने पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा था कि ये कृत्रिम विस्तार साक्ष्य एवं ऐतिहासिक तथ्यों पर आधारित नहीं है और यह मान्य नहीं है.



रिश्तों में कब आई खटास
भारत और नेपाल के बीच रिश्तों में उस वक्त तनाव पैदा हो गया था, जब रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने आठ मई को उत्तराखंड में लिपुलेख दर्रे को धारचूला से जोड़ने वाली रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण 80 किलोमीटर लंबी सड़क का उद्घाटन किया था. नेपाल ने इस सड़क के उद्घाटन पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए दावा किया था कि यह सड़क नेपाली क्षेत्र से होकर गुजरती है. भारत ने नेपाल के दावों को खारिज करते हुए दोहराया कि यह सड़क पूरी तरह उसके भू-भाग में स्थित है.

अब तलाश करेंगे कागज़
दरअसल नेपाल भी ये खुद मान रहा है कि उसके पास कोई सबूत नहीं है. नए नक्शे को संसद में पास कराने के बाद नेपाल की सरकार ने एक कमेटी बनाई है. इस कमेटी से कहा गया है कि वो उन डॉक्यूमेंट्स की तलाश करे जो साबित कर सकें कि जिन इलाकों पर नेपाल ने दावा किया है ये उनका है. ये किसी भी सरकार का बड़ा ही हास्यास्पद कदम है. इस कमेटी में 9 लोगों को रखा गया है, जिसका नेतृत्व बिष्णु राज उप्रेती करेंगे. वो फिलहाल सरकार के पॉलिसी रिसर्च इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर हैं.
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