श्रीलंका: संसदीय चुनाव में राजपक्षे की पार्टी की शानदार जीत, महिंदा राजपक्षे बने रहेंगे पीएम

श्रीलंका:  संसदीय चुनाव में राजपक्षे की पार्टी की शानदार जीत, महिंदा राजपक्षे बने रहेंगे पीएम
जीत के बाद दोनों भाई

Sri Lanka election: महिंदा राजपक्षे को पहले से ही जीत की पूरी उम्मीद थी. उन्होंने कहा था कि उनकी पार्टी को दो-तिहाई बहुमत से जीत की उम्मीद है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 7, 2020, 7:01 AM IST
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कोलंबो. श्रीलंका पीपुल्स पार्टी (SLPP) को एक बार फिर से संसदीय चुनाव में भी जबरदस्त जीत मिली है. यानी अब महिंदा राजपक्षे (Mahinda Rajapaksa) श्रीलंका के प्रधानमंत्री बने रहेंगे. पिछले साल नवंबर से वो देश के केयरटेकर प्रधानमंत्री बने थे. उनकी पार्टी को दो तिहाई बहुमत मिला है. 9 महीने पहले महिंदा राजपक्षे की पार्टी को राष्ट्रपति के चुनाव में जीत मिली थी. महिंदा के छोटे भाई गोटाबाया राजपक्षे  (Gotabaya Rajapaksa ) पहले से ही देश के राष्ट्रपति हैं. कोरोना वायरस के बावजूद श्रीलंका में चुनाव कराए गए. हालांकि महामारी के चलते दो बार चुनाव की तारीखों को टालना भी पड़ा था.

धमाकेदार जीत
महिंदा राजपक्षे को पहले से ही जीत की पूरी उम्मीद थी. उन्होंने कहा था कि उनकी पार्टी को दो-तिहाई बहुमत से जीत की उम्मीद है. और हुआ भी वही. उन्होंने कहा था कि उनके छोटे भाई को पिछले साल दिसंबर में 69 लाख मतदाताओं ने समर्थन देकर राष्ट्रपति बनाया था और उन्हें इसी तरह का समर्थन इस बार मिलने की उम्मीद थी.

पीएम मोदी ने दी बधाई
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को श्रीलंका के पीएम महिंदा राजपक्षे से बात की और कल संसदीय चुनावों के सफल आयोजन के लिए उन्हें बधाई दी. कोरोना महामारी की बाधाओं के बावजूद चुनावों को प्रभावी ढंग से आयोजित करने के लिए पीएम मोदी ने श्रीलंका की सरकार और चुनावी संस्थानों की सराहना की.





चुनाव में क्या रहा खास
महामारी की वजह से दो बार इस चुनाव को टालना पड़ा था. संसद के 225 सदस्यों के पांच साल तक निर्वाचन के लिए चुनाव हुए. यहां 1.6 करोड़ से अधिक लोगों को 225 सांसदों में से 196 के निर्वाचन के लिए मतदान करने का अधिकार है. वहीं 29 अन्य सांसदों का चयन प्रत्येक पार्टी द्वारा हासिल किए गए मतों के अनुसार बनने वाली राष्ट्रीय सूची से हुआ.

दो बार टले चुनाव
पहले ये चुनाव 25 अप्रैल को होने वाले थे लेकिन कोरोना वायरस महामारी के मद्देनजर इसकी तारीख बढ़ाकर 20 जून की गई. बाद में फिर से इसे टाल दिया गया. इसके बाद स्वास्थ्य अधिकारियों के निर्देशों को ध्यान में रखते हुए चुनाव की तारीख आगे बढ़ाकर पांच अगस्त कर दी गई. करीब 20 राजनीतिक दलों और 34 स्वतंत्र समूहों के 7,200 से ज्यादा उम्मीदवार 22 चुनावी जिलों से मैदान में थे.
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