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अफगानिस्तान में कहां तक जाएगी तालिबान की लड़ाई? पढ़ें News18 की ये रिपोर्ट

अफगानिस्तान में कहां तक जाएगी तालिबान की लड़ाई? पढ़ें News18 की ये रिपोर्ट

अफगानिस्तान में मई से तालिबान के हमले तेज हुए हैं. (AP)

अफगानिस्तान में मई से तालिबान के हमले तेज हुए हैं. (AP)

तालिबान (Taliban) के लड़ाकों ने उत्तर में कुंदुज, सर-ए-पुल और तालोकान राजधानी पर कब्जा कर लिया. अफगानिस्तान (Afghanistan) के सांसदों, सुरक्षा सूत्रों और निवासियों ने इसकी पुष्टि की. अफगानिस्तान को तबाह करने के लिए तालिबान के आतंकी कारनामों पर पढ़ें News18 की ये रिपोर्ट:-

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    काबुल. अफगानिस्तान (Afghanistan) में तालिबान (Taliban) ग्रामीण क्षेत्रों पर कब्जे के बाद अब प्रांतीय राजधानियों में भी तेजी से घुस रहा है. लगातार तीसरे दिन तालिबान ने तीन और प्रांतों की राजधानी पर कब्जा जमा लिया है. तालिबान के लड़ाकों ने उत्तर में कुंदुज, सर-ए-पुल और तालोकान राजधानी पर कब्जा कर लिया. अफगानिस्तान के सांसदों, सुरक्षा सूत्रों और निवासियों ने इसकी पुष्टि की.

    अफगानिस्तान को तबाह करने के लिए तालिबान के आतंकी कारनामों पर पढ़ें News18 की ये रिपोर्ट:-

    बारहमासी लक्ष्य
    अफगानिस्तान में मई से तालिबान के हमले तेज हुए हैं. मई के बाद से कुंदुज तालिबान का सबसे महत्वपूर्ण लाभ है. ये विद्रोहियों के लिए एक बारहमासी लक्ष्य रहा है. तालिबान ने 2015 और फिर 2016 में कुंदुज शहर पर कुछ समय के लिए कब्जा कर लिया था, लेकिन तालिबानी इसे लंबे समय तक बरकरार नहीं रख पाए.

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    रक्षा मंत्रालय ने कहा कि सरकारी बल और अफगान सेना प्रमुख प्रतिष्ठानों पर फिर से कब्जा हासिल करने के लिए तालिबान के लड़ाकों से लगातार संघर्ष कर रहे हैं. सरकार के प्रवक्ता मीरवाइस स्टानिकजई ने कहा कि सर-ए-पुल और शेबरघन में विशेष बलों सहित अतिरिक्त बल तैनात किए गए हैं. उन्होंने कहा, “ये शहर जिन पर तालिबान कब्जा करना चाहता है, जल्द ही उनके कब्रिस्तान बन जाएंगे.”

    उत्तरी इलाके को तालिबान से अब तक बचाए रखने की काबुल सरकार की क्षमता आगे जाकर उसके अस्तित्व के लिए काफी महत्वपूर्ण साबित हो सकती है. दरअसल, उत्तरी अफगानिस्तान को लंबे समय से तालिबान विरोधी गढ़ माना जाता रहा है, जिसने 1990 के दशक में उग्रवादी शासन के कुछ कड़े प्रतिरोध को देखा. यह क्षेत्र मिलिशियाओं का गढ़ भी है और देश के सशस्त्र बलों के लिए एक उपजाऊ भर्ती मैदान भी.

    इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप के सलाहकार इब्राहिम थुरियाल ने कहा, “कुंदुज पर कब्जा काफी महत्वपूर्ण है, क्योंकि अब इसके बाद बड़ी संख्या में तालिबानी लड़ाके उत्तर की ओर लामबंद होंगे.”

    इससे पहले शुक्रवार को विद्रोहियों ने ईरान की सीमा से सटे दक्षिण-पश्चिमी निमरोज में पहली प्रांतीय राजधानी जरंज पर कब्जा कर लिया था. इसके अगले दिन शनिवार को उत्तरी जवज्जान प्रांत के शेबरघन पर कब्जा कर लिया था.

    हफ्ते के आखिर में सोशल मीडिया पर तालिबान के हमले के कई फुटेज पोस्ट किए गए, जिसमें बड़ी संख्या में कैदी भी देखे जा सकते हैं. तालिबान अपने रैंकों को फिर से भरने के लिए जेलों में बंद लड़ाकों को रिहा करने के लिए अक्सर जेलों को निशाना बनाता है.

    अमेरिकी हवाई हमले
    इस बीच अमेरिका भी तालिबान को रोकने में लगा है. अमेरिका वायुसेना ने शनिवार की देर रात शेबर्गन में तालिबान के ठिकानों पर बमबारी की. अमेरिका के लड़ाकू विमान B-52 बॉम्बर ने तालिबानी खेमे में तबाही मचा दी है. अफगान सेना के मुताबिक पिछले 24 घंटे में की गई एयर स्ट्राइक (Air Strike) में 572 तालिबानी लड़ाके मारे गए हैं. हमले में 309 से ज्यादा तालिबानी घायल हुए हैं.

    शेबरघन कुख्यात अफगान सरदार अब्दुल रशीद दोस्तम का गढ़ है, जिसके लड़ाके कथित तौर पर बल्ख प्रांत में मजार-ए-शरीफ से पूर्व की ओर पीछे हट रहे थे. उनके लड़ाकों के पीछे हटने से सरकार की हाल की उम्मीदों पर पानी फिर गया कि मिलिशिया सेना की मदद कर सकती है.

    अमेरिकी B-52 बॉम्बर ने 24 घंटे में किए 572 तालिबानी ढेर, देखें एयर स्ट्राइक के वीडियो

    अफगानिस्तान में हाल की लड़ाई से हज़ारों अफगान विस्थापित हुए हैं. शनिवार को पक्तिया प्रांत में तालिबानी लड़ाकों के हमले से भागने की कोशिश कर रहे 12 लोग सड़क किनारे बम की चपेट में आने से मारे गए थे. इनमें से बाल-बाल बची नूर जान ने आपबीती सुनाई. नूर ने कहा, “मैंने अपनी मां, पिता, दो भाइयों, दो बहनों और परिवार के अन्य सदस्यों को खो दिया.”

    अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन पर दाग
    काबुल में वॉशिंगटन के पूर्व राजदूत रयान क्रोकर ने रविवार को कहा कि अफगानिस्तान में तालिबान के बढ़ते आतंक की तुलना में लंबे समय तक चल रहा गृहयुद्ध महत्वपूर्ण है. ऐसे समय में जब संयुक्त राज्य अमेरिका की सेना यहां से पूरी तरह वापसी के करीब है. रयान क्रोकर ने एबीसी चैनल के ‘दिस वीक’ को बताया, “लंबे समय तक गृहयुद्ध पूरे देश में तालिबान के तेजी से बढ़ने की तुलना में ज्यादा खतरा है. तालिबान इस बारे में बहुत होशियार है. इसलिए वह काबुल में बड़े हमले नहीं कर रहा.”

    क्रोकर ने तालिबान का जिक्र करते हुए कहा, “तालिबान वही कर रहा है, जो वह लोगों में डर और दहशत का माहौल बनाने के लिए कर सकता है. इसमें वह आश्चर्यजनक रूप से सफल भी रहा है.”

    वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों ने रविवार को कहा कि तालिबान की सैन्य जीत की हालिया कड़ी ने बेशक अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन को महीने के अंत तक अमेरिकी युद्ध मिशन को समाप्त करने के अपने फैसले पर फिर से विचार करने के लिए प्रेरित न किया हो, लेकिन मौजूदा हिंसा से पता चलता है कि बाइडन के लिए अमेरिका को युद्ध से निकालना कितना मुश्किल होगा. अमेरिका बार-बार इस बात पर जोर दे रहा है कि उसे अफगानिस्तान छोड़ा है, मगर तालिबान के खिलाफ जंग जारी रहेगी.

    अमेरिकी रक्षा अधिकारियों ने कहा कि सीमित हवाई हमलों के अलावा इस बार तालिबान पर कार्रवाई करने की कोई योजना नहीं है. अधिकारियों ने कहा कि पिछले तीन हफ्तों में, संयुक्त राज्य अमेरिका ने भारी तोपखाने सहित तालिबान के ठिकानों को निशाना बनाने के लिए सशस्त्र रीपर ड्रोन और एसी -130 हवाई गनशिप का इस्तेमाल किया है. इससे जनसंख्या केंद्रों, विदेशी दूतावासों और अफगान सरकारी भवनों को खतरा है.

    तालिबान हताहतों की संख्या
    अफगान रक्षा मंत्रालय के अधिकारी के अनुसार, तालिबान को रविवार को उस समय भारी नुकसान का सामना करना पड़ा, जब अमेरिकी वायु सेना ने शेबरघन शहर में उनकी सभाओं और ठिकानों को निशाना बनाया. ताजा जानकारी के मुताबिक इस हमले में आतंकवादी संगठन के 572 सदस्य मारे गए.

    भारत का रुख
    इस बीच भारत ने शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से अफगानिस्तान में बिगड़ती सुरक्षा स्थिति की समीक्षा करने का आग्रह किया. भारत ने कहा कि सफल शांति प्रक्रिया के लिए यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि तालिबान “अच्छे विश्वास में बातचीत में शामिल हो, हिंसा का रास्ता छोड़े. तालिबान को यह सुनिश्चित करना होगा कि वह एक राजनीतिक समाधान तक पहुंचने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है.

    भारत ने अफगानिस्तान के पूर्वी पक्तिया प्रांत में एक गुरुद्वारे की छत से एक सिख धार्मिक ध्वज को तालिबान द्वारा कथित तौर पर हटाने की भी निंदा की. अफगानिस्तान की रिपोर्टों में कहा गया है कि तालिबान ने कथित तौर पर पख्तिया प्रांत के चमकनी क्षेत्र में गुरुद्वारा थाला साहिब के संरक्षक को निशान साहिब या पवित्र ध्वज को दरगाह की छत से हटाने के लिए मजबूर किया था.

    (अंग्रेजी में इस आर्टिकल को पूरा पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.)

    Tags: America, Taliban, Taliban rise in Afghanistan

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