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तालिबान को लेकर इमरान खान की फिर फजीहत, सार्क देशों ने ठुकराई तालिबान को शामिल करने की मांग

नेपाल ने पाकिस्तान से तालिबान को शामिल करने से इनकार कर दिया.

नेपाल ने पाकिस्तान से तालिबान को शामिल करने से इनकार कर दिया.

पहले पाकिस्तानी पीएम इमरान खान (Imran Khan) ने SCO समिट में तालिबान की जमकर तरफदारी की, उसके बाद सीएनएन इंटरव्यू में पूरी दुनिया से तालिबान सरकार (Taliban Government) को मान्यता देने की गुजारिश की थी.

  • News18Hindi
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    नई दिल्ली. तालिबान (Taliban) के लिए पाकिस्तान (Pakistan) हर जगह समर्थन जुटाने का प्रयास कर रहा है. पहले पाकिस्तानी पीएम इमरान खान (Imran Khan) ने SCO समिट में तालिबान की जमकर तरफदारी की, उसके बाद सीएनएन इंटरव्यू में पूरी दुनिया से तालिबान सरकार (Taliban Government) को मान्यता देने की गुजारिश की. अमेरिका से उसके फंड को अनफ्रीज करने को कहा. लेकिन हर जगह पाकिस्तान को निराशा हाथ लगी. ताजा मामला सार्क देशों से जुड़ा है, जहां इमरान ने तालिबान को सार्क में शामिल करने की बात कही तो सार्क देशों की बैठक ही रद्द हो गई. बता दें कि सार्क में बांग्लादेश, भूटान, भारत, मालदीव, नेपाल, पाकिस्तान, श्रीलंका और अफगानिस्तान शामिल है।

    क्या है पूरा मामला?
    सार्क देशों के विदेश मंत्रियों की शनिवार को होने वाली बैठक में एक सीट देने की अनुमति को अस्वीकार कर दिया. सार्क की अगुआई कर रहे नेपाल ने ना सिर्फ पाकिस्तान की इस मांग को दो-टूक  ठुकरा दिया. नेपाल ने कहा है कि संयुक्त राष्ट्र में अफगानिस्तान की अपदस्थ सरकार का प्रतिनिधित्व करने वाले अफगान राजदूत गुलाम इसाकजई को लिखित आश्वासन प्रदान करने की अनुमति नहीं दी जाएगी.

    फिर रद्द हो गई बैठक
    सार्क सदस्य पाकिस्तान के अनुरोध पर आम सहमति तक नहीं पहुंच सके या तालिबान की गारंटी नहीं दे सके कि वह संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान होने वाली बैठक में शामिल हो सकता है. इस कारण आठ दक्षिण एशियाई देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक रद्द कर दी गई. भारत सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पाकिस्तान ने तालिबान को बैठक में शामिल होने पर जोर दिया, लेकिन कोई अन्य देश इस मांग पर सहमत नहीं हुआ।

    सार्क देशों ने ऐसा क्यों किया
    दरअसल, तालिबान को भारत ने अफगान लोगों के प्रतिनिधि के रूप में मान्यता नहीं दी है. इसे अन्य देशों द्वारा भी मान्यता प्राप्त नहीं है. इसकी सरकार में बने मंत्री यूएन की ब्लैक लिस्ट में डाले गए हैं. अधिकांश अमेरिकी एजेंसियों द्वारा ‘वांटेड’ लिस्ट में भी हैं. भारत सरकार के एक अधिकारी ने कहा कि तालिबान शासन के पास कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह समूह ग्लोबल प्लेटफार्मों पर बोलने का दावा नहीं कर सकता है.

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