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बांग्लादेशी लेखक मुश्ताक अहमद की मौत पर अमेरिकी ने जताई चिंता, कहा-निष्पक्ष जांच हो

बांग्लादेशी लेखक मुश्ताक अहमद की मौत पर अमेरिकी ने जताई चिंता, कहा-निष्पक्ष जांच हो

प्रदर्शनकारी ढाका विश्वविद्यालय परिसर के पास डिजिटल कानून रद्द करने की मांग की (फटो- AP)

प्रदर्शनकारी ढाका विश्वविद्यालय परिसर के पास डिजिटल कानून रद्द करने की मांग की (फटो- AP)

Mushtaq Ahmed Custodial Death: 53 साल के मुश्ताक अहमद को सोशल मीडिया पर टिप्पणी करने को लेकर पिछले साल मई में गिरफ्तार कर लिया गया था

    ढाका. बांग्लादेश के लेखक मुश्ताक अहमद (Mushtaq Ahmed Custodial Death) की मौत का मामला अब गरमाता जा रहा है. अमेरिका (United States) ने भी उनकी मौत को लेकर चिंता जताई है. साथ ही कहा है कि तुरंत उनकी मौत की जांच निष्पक्ष तरीके से हो. बता दें कि पिछले दिनों मुश्ताक की मौत जेल में हो गई थी. डिजिटल सुरक्षा कानून (Digital Security Act) का उल्लंघन करने के आरोप में उन्हें पिछले साल गिरफ्तार किया गया था. देश भर में उनकी मौत को लेकर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं.

    अमेरिकी सरकार के प्रवक्ता नेड प्राइस ने इसको लेकर बांग्लादेश के दूतावास को एक बयान जारी किया है. इसते तहत निष्पक्ष जांच की मांग की गई है. इसमें कहा गया है, ‘हम डिजिटल सुरक्षा अधिनियम के तहत हिरासत में रहते हुए बांग्लादेशी लेखक मुश्ताक अहमद की मौत से चिंतित हैं. हम बांग्लादेश सरकार से पारदर्शी जांच कराने और सभी देशों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार को बनाए रखने का आह्वान करते हैं.’

    अमेरिका ने जताया विरोध

    कैसे हुई मौत?
    अभी ये स्पष्ट नहीं हो पाया है कि बृहस्पतिवार को अहमद की मौत कैसे हुई. वो जेल में बंद थे. गृह मंत्री असदुज्जमान खान ने शुक्रवार को कहा कि घटना की जांच की जाएगी. बांग्लादेश के इस कानून को आलोचकों ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का गला घोंटने वाला बताया है.

    पिछले साल हुई थी गिरफ्तारी
    53 साल के मुश्ताक अहमद को सोशल मीडिया पर टिप्पणी करने को लेकर पिछले साल मई में गिरफ्तार कर लिया गया था. दरअसल, उन्होंने कोरोना वायरस महामारी से निपटने में प्रधानमंत्री शेख हसीना के नेतृत्व वाली सरकार के तौर-तरीकों की आलोचना की थी. अहमद की जमानत याचिका कम से कम छह बार नामंजूर कर दी गई थी.

    ये भी पढ़ें:- खशोगी हत्याकांड: नाजुक मोड़ पर पहुंचा सकता है अमेरिका और सऊदी का रिश्ता

    देशभर में विरोध प्रदर्शन
    इस बीच, सैकड़ों की संख्या में प्रदर्शनकारी ढाका विश्वविद्यालय परिसर के पास जुट गये, जबकि कई अन्य ने सोशल मीडिया पर अपना रोष प्रकट किया. प्रदर्शनकारियों ने डिजिटल कानून रद्द करने की मांग की और ‘हम न्याय चाहते हैं’ का नारा लगाया. मानवाधिकार संगठनों, ह्यूमन राइट्स वाच और एमनेस्टी इंटरनेशनल ने बांग्लादेश से मामले की जांच करने का अनुरोध किया है। न्यूयार्क की ‘कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स’ (सीपीजे) ने भी यह मांग की है कि बांग्लादेश सरकार को यह कानून रद्द करना चाहिए और अहमद की मौत की जांच करनी चाहिए.(भाषा इनपुट के साथ)

    Tags: Bangladesh

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