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बीते 6 महीनों से नहीं है कोई अता-पता, आखिर कहां है तालिबानी चीफ हैबतुल्लाह अखुंदजादा?

तालिबानी चीफ हैबतुल्लाह अखुंदजादा (फाइल फोटो)

तालिबानी चीफ हैबतुल्लाह अखुंदजादा (फाइल फोटो)

बीते दिनों रिपोर्ट्स में ये दावा किया गया कि हिबतुल्लाह अखुंदजादा (Hibatullah Akhundzada) पाकिस्तान सेना (Pakistani Army) की हिरासत में है. संगठन के ही एक सदस्य ने बताया कि अखुंदजादा को बीते छह महीने से नहीं देखा गया है.

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    काबुल. आखिरकार तालिबान का सर्वोच्च नेता हैबतुल्लाह अखुंदजादा (Hibatullah Akhundzada) कहां है? अफगानिस्तान (Afghanistan) में तालिबान के कब्जे के बाद भी उसके चीफ का पता नहीं चल पा रहा है. ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि आखिर तालिबान का सुप्रीम लीडर हैबतुल्लाह अखुंदजादा कहां है? वह क्यों सामने नहीं आ रहा, क्या किसी ने उसे कैद कर रखा है? बता दें, तालिबान के पूर्व नेता अख्तूर मंसूर के अमेरिकी ड्रोन हमले में मारे जाने के बाद मई 2016 में हैबतुल्लाह अखुंदजादा को आतंकी समहू का चीफ नियुक्त किया गया था. उस वक्त तालिबान द्वारा शेयर किए गए एक वीडियो संदेश के मुताबिक, हैबतुल्लाह अखुंदजादा आतंकी मंसूर का डिप्टी था, मगर ड्रोन हमले में उसकी मौत के बाद उसे गद्दी मिली थी. पाकिस्तान में एक बैठक के दौरान प्रमोट कर उसे तालिबान का सुप्रीम लीडर बनाया गया था.

    समाचार एजेंसी एएफपी की एक रिपोर्ट ने तालिबान के चीफ 50 वर्षीय हैबतुल्लाह अखुंदजादा को एक सैनिक के बजाय एक धार्मिक कानूनी विद्वान के रूप में वर्णित किया है. रिपोर्ट के मुताबिक, उसे आतंकी समूह द्वारा इस्लाम की चरम व्याख्याओं को जारी करने का श्रेय दिया जाता है. अखुंदजादा को ‘अमीर अल मुमीमीन’ या वफादारों का कमांडर के रूप में भी जाना जाता है. हालांकि, उसे यह विशेषण अल कायदा प्रमुख अयमान अल-जवाहिरी ने 2016 में दिया था.

    बीते दिनों रिपोर्ट्स में ये दावा किया गया कि हिबतुल्लाह अखुंदजादा पाकिस्तान सेना की हिरासत में है. संगठन के ही एक सदस्य ने बताया कि अखुंदजादा को बीते छह महीने से नहीं देखा गया है. उसने बताया कि मई में उसने (अखुंदजादा) ईद के मौके पर एक बयान जारी किया था. हालांकि ये बयान अखुंदजादा ने ही जारी किया था, ये बात साबित नहीं हो पाई है.

    फरवरी में आई थी मौत की खबर
    अखुंदजादा अफगानिस्तान के कंधार प्रांत का एक धार्मिक विद्वान और कट्टरपंथी हैं. वह 1980 के दशक में अफगानिस्तान पर सोवियत आक्रमण के समय इस्लामी प्रतिरोध में शामिल था, लेकिन उसे एक सैन्य कमांडर कम और धार्मिक विद्वान अधिक माना जाता है. इससे पहले इसी साल फरवरी महीने में ऐसी जानकारी सामने आई थी कि अखुंदजादा की मौत हो गई है. रिपोर्ट्स में कहा गया कि तालिबानी प्रमुख की मौत अभी नहीं बल्कि महीनों पहले अप्रैल 2020 में पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में एक धमाके के कारण हुई थी.

    मौत की खबरें छिपाता है तालिबान
    ऐसी संभावना है कि हिबतुल्लाह अखुंदजादा की मौत पहले ही हो गई है लेकिन तालिबान इसे छिपा रहा है, ताकि संगठन दुनिया के सामने कमजोर ना दिखाई दे. इससे पहले भी वो ये कर चुका है. अख्तर मंसूर को भी तालिबान के संस्थापक नेता मुल्ला उमर की 2013 में हुई मौत के बाद संगठन के प्रमुख का पद मिला था. लेकिन उमर की मौत की घोषणा 2015 में की गई. जब भी मौत से जुड़ी रिपोर्ट्स आती हैं, तो तालिबान उसे सिरे से खारिज कर देता है. हश्त-ए-शुभ अखबार ने एक सूत्र के हवाले से बताया था कि अखुंदजादा की मौत क्वेटा के एक घर में धमाका होने के कारण हुई है. लेकिन फिर तालिबानी नेता अहमदुल्लाह वासिक ने इसे ‘झूठी और आधारहीन अफवाहें’ करार दिया.

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    बेटा और भाई भी मारे गए
    साल 2017 में अखुंदजादा का बेटा अब्दुर रहमान (23) आत्मघाती हमले में मारा गया था. जो अफगानिस्तान के हेल्मंद प्रांत में हुआ था. रहमान को हाफिज खालिद के नाम से भी जाना जाता था. प्रांतीय राजधानी लश्कर गाह के उत्तर में गेरेशक शहर में एक अफगान सैन्य अड्डे को निशाना बनाते समय विस्फोटकों से लदे वाहन को चलाते हुए रहमान की मौत हुई थी. इसकी जानकारी तालिबान के मुख्य प्रवक्ता कारी यूसुफ अहमदी ने दी थी. वहीं उसका भाई हाफिज अहमदुल्लाह क्वेटा से 25 किलोमीटर दूर एक मस्जिद में 16 अगस्त, 2019 में मारा गया था.

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