• Home
  • »
  • News
  • »
  • world
  • »
  • मुल्ला बरादर ने अमेरिका के खिलाफ खाई थी जिहाद की कसम, अब बनेंगे अफगानिस्तान के राष्ट्रपति

मुल्ला बरादर ने अमेरिका के खिलाफ खाई थी जिहाद की कसम, अब बनेंगे अफगानिस्तान के राष्ट्रपति

शांति वार्ता में भाग लेने के लिए अमेरिका के अनुरोध पर बरादर को अक्टूबर 2018 में रिहा किया गया था. (फ़ाइल फोटो)

शांति वार्ता में भाग लेने के लिए अमेरिका के अनुरोध पर बरादर को अक्टूबर 2018 में रिहा किया गया था. (फ़ाइल फोटो)

Mullah Abdul Ghani Baradar: कभी अमेरिका की गिरफ्त में रहने वाले अब्दुल गनी बरादर की गिनती तालिबान के टॉप कमांडर में होती है. कहा जाता है कि दशकों तक तालिबान के लिए फंड का इंतज़ाम इसी शख्स ने किया.

  • Share this:

    काबुल. अफगानिस्तान में सोमवार को एक नई सुबह की शुरुआत हुई. एक ऐसी सुबह जिसको लेकर लोगों में उम्मीद की नई किरण से ज़्यादा ‘डर’ है. लोगों को बार-बार एक ही सवाल परेशान कर रहा है, वो ये कि क्या अफगानिस्तान में फिर से लोगों की आज़ादी पर पाबंदी लग जाएगी? इस बीच काबुल पर कब्जे के बाद तालिबान ने अफगानिस्तान का मोर्चा संभाल लिया है. औपचारिक तौर पर देश पर शासन करने की तैयारियां चल रही हैं. अब्दुल गनी बरादर (Mullah Abdul Ghani Baradar) अफगानिस्तान के नए राष्ट्रपति बन सकते हैं.

    कभी अमेरिका की गिरफ्त में रहने वाले अब्दुल गनी बरादर की गिनती तालिबान के टॉप कमांडर में होती है. कहा जाता है कि दशकों तक तालिबान के लिए फंड का इंतज़ाम इसी शख्स ने किया. आइए एक नज़र डालते हैं कि आखिर कौन हैं अब्दुल गनी बरादर और क्यों मध्य पूर्व में इनकी तूती बोलती है…

    तालिबान आंदोलन की स्थापना
    मुल्ला अब्दुल गनी बरादर उन चार लोगों में से एक हैं जिन्होंने 1994 में अफगानिस्तान में तालिबान आंदोलन की स्थापना की थी. साल 2001 में जब अमेरिका ने तालिबान को उखाड़ फेंका तभी से उन्होंने अपनी मुहिम तेज़ कर दी. आखिरकार फरवरी 2010 में दक्षिणी पाकिस्तानी शहर कराची में एक संयुक्त यूएस-पाकिस्तानी छापे में उन्हें पकड़ लिया गया. गिरफ्तारी के समय उन्हें तालिबान के आध्यात्मिक नेता, मुल्ला मोहम्मद उमर और उनके सबसे भरोसेमंद कमांडरों में गिना जाता था.

    उमर के थे बेहद करीबी
    इंटरपोल ने कहा है कि बरादर का जन्म अफगानिस्तान के उरुजगान प्रांत के वीतमक गांव में 1968 में हुआ था. यानी आज वो करीब 53 साल के हैं. तालिबान के पूर्व प्रमुख मुल्ला मोहम्मद उमर उनके दोस्त और बहनोई थे. लिहाज़ा मुल्ला उमर के साथ घनिष्ठ संबंधों के कारण उन्हें मुल्ला बरादर के रूप में जाना जाता है, जिसका मतलब है भाई. 1980 के दशक में उन्होंने उमर के साथ मिलकर सोवियत सैनिकों के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी.

    ये भी पढ़ें:- तालिबान नेता बरादर ने कहा- अफगानिस्तान में इतनी आसान जीत की नहीं थी उम्मीद, असली इम्तिहान अब शुरू

    अमेरिका के कहने पर हुई थी रिहाई
    कहा जाता है कि 1996 से 2001 तक तालिबान शासन के दौरान, बरादर ने दो प्रांतों के गवर्नर, एक शीर्ष सेना कमांडर और उप रक्षा मंत्री के रूप में कार्य किया था. शांति वार्ता में भाग लेने के लिए अमेरिका के अनुरोध पर बरादर को अक्टूबर 2018 में रिहा किया गया था. कथित तौर पर अफगानिस्तान में तालिबान और अमेरिकी अधिकारियों के बीच गुप्त वार्ता के बाद उनकी रिहाई हुई थी.

    जिहाद की खाई थी कसम
    जुलाई 2009 में मुल्ला बरादर ने न्यूजवीक पत्रिका के साथ बातचीत में कहा था कि तालिबान अमेरिकियों को अधिक से अधिक नुकसान पहुंचाना चाहता है. उन्होंने कहा था कि उनका जिहाद तब तक जारी रहेगा जब तक कि उनकी जमीन से दुश्मन न चले जाएं. बरादर का इशारा अमेरिका की तरफ था.

    पढ़ें Hindi News ऑनलाइन और देखें Live TV News18 हिंदी की वेबसाइट पर. जानिए देश-विदेश और अपने प्रदेश, बॉलीवुड, खेल जगत, बिज़नेस से जुड़ी News in Hindi.

    हमें FacebookTwitter, Instagram और Telegram पर फॉलो करें.

    विज्ञापन
    विज्ञापन

    विज्ञापन

    टॉप स्टोरीज