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दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति चुनाव में गंजापन बना बड़ा मुद्दा, उम्मीदवार ली जे मांयग के वादे ने उनकी हवा बना दी

दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति चुनाव में गंजापन बना बड़ा मुद्दा, उम्मीदवार ली जे मांयग के वादे ने उनकी हवा बना दी

दक्षिण कोरिया में राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार ली जे मांयग. (Twitter)

दक्षिण कोरिया में राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार ली जे मांयग. (Twitter)

South Korea election: दक्षिण कोरिया (South Korea) में राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार ली जे मांयग ने वादा किया है कि अगर वह राष्ट्रपति बनते हैं तो वह हेयर ट्रांसप्लांट की लागत को कवर करने के लिए राज्य के वित्त पोषण को बढ़ा देंगे. दक्षिण कोरिया जहां का एक बड़ा वर्ग बालों के झड़ने से परेशान है, ऐसे में इस वादे ने एक अलग ही हवा बना दी है. ली, जो दक्षिण कोरिया की सत्तारूढ दल, डेमोक्रेटिक पार्टी के राष्ट्रपति के उम्मीदवार हैं. उन्होंने बालों के झड़ने को एक राष्ट्रीय समस्या के तौर पर घोषित करके चुनावों को दिलचस्प बना दिया है.

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    नई दिल्ली. चुनाव का मौसम आते ही तमाम तरह के वादे और चुनाव जीतने के लिए अपनाए जा रहे हथकंडों की खबरें आती रहती हैं. प्रत्याशी चुनाव जीतने के लिए बिजली, पानी से लेकर कंप्यूटर, स्कूटी तक देने का वादा करते हैं. भारत में इस तरह की खबरें आना आम है. लेकिन दक्षिण कोरिया में राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार ली जे मांयग के एक चुनावी वादे ने लोगों को हैरानी में डाल दिया है. दरअसल ली ने वादा किया है कि अगर वह राष्ट्रपति बनते हैं तो वह हेयर ट्रांसप्लांट की लागत को कवर करने के लिए राज्य के वित्त पोषण को बढ़ा देंगे. दक्षिण कोरिया जहां का एक बड़ा वर्ग बालों के झड़ने से परेशान है, ऐसे में इस वादे ने एक अलग ही हवा बना दी है.

    वादा तेरा वादा
    ली, जो दक्षिण कोरिया की सत्तारूढ दल, डेमोक्रेटिक पार्टी के राष्ट्रपति के उम्मीदवार हैं. उन्होंने बालों के झड़ने को एक राष्ट्रीय समस्या के तौर पर घोषित करके चुनावों को दिलचस्प बना दिया है. ली ने वादा किया है कि बालों के झड़ने के प्रत्यारोपण के लिए इंश्योरेंस कंपनियों को कवर की लागत का भुगतान राज्य करेगा. उन्होंने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा था कि बालों को दोबारा उगाए जाने वाले उपचार को राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा कार्यक्रम में शामिल किया जाना चाहिए.

    1 करोड़ लोग जूझ रहे हैं गंजेपन की समस्या से
    राष्ट्रपति के उम्मीदवार ली का कहना है कि दक्षिण कोरिया में करीब 1 करोड़ लोग गंजेपन की समस्या से जूझ रहे हैं, हालांकि इसका सही आंकड़ा तो अभी तक पता नहीं है. लेकिन ली के इस वादे का असर 5 करोड़ आबादी वाले देश के हर पांचवें इंसान पर ज़रूर पड़ सकता है. इससे यह भी अंदाजा लगाया जा सकता है कि ऐसे तमाम लोग जो वोट देने की उम्र में पहुंच चुके हैं, वह गंजेपन की समस्या से जूझ रहे हैं. यही नहीं प्रत्यारोपण की लागत ज्यादा होने की वजह से कोरिया निवासी इसका इलाज नहीं करवा पाते हैं. ली का कहना है कि बालों के झड़ने की समस्या से जूझ रहे लोग रोजमर्रा की जिंदगी में उम्र और लिंग से जुड़े भेदभाव का सामना करते हैं.

    ली को चंद ही मिनट में सैकड़ों लाइक्स मिले
    रिपोर्ट बताती हैं कि बालों की झड़ने की समस्या अगर अनुवांशिक या उम्र के चलते हो रही है तो वह वर्तमान में सरकार की बीमा योजना में नहीं आती है, इस योजना के तहत सिर्फ किसी बीमारी के चलते हुए बालों के झड़ने का ही उपचार की लागत वापस होती है. ली की फेसबुक पोस्ट, मैं बालों के झड़ने के उपचार की दवा के यूनिवर्सल हेल्थ इंश्योरेंस में बढ़ोतरी करूंगा और गंभीर रूप से बालों के झड़ने के लिए प्रत्यारोपण को भी कवर करने करने पर भी विचार करूंगा. को चंद ही मिनट में सैकड़ों लाइक्स मिल गए थे.
    क्या है प्रतिक्रिया
    ली के इस वादे को लेकर जहां सोशल मीडिया पर उनके समर्थन की बाढ़ आई हुई है. जिसने चुनाव में सनसनी पैदा कर दी है. इसके चलते ली जनमत संग्रह में अग्रणी हो गए हैं. वहीं देश के एक पुराने अखबार में प्रकाशित संपादकीय में लिखा गया है कि हो सकता है कि ऐसे कई लोग जो बालों के झड़ने की समस्या से ग्रस्त हों उनके लिए यह एक अच्छी खबर हो, लेकिन राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा कार्यक्रम की वित्तीय स्थिरता के लिए यह बिल्कुल सही नहीं होगा, वहीं दक्षिण कोरिया के जेजु नेशनल यूनिवर्सिटी के मेडिकल स्कूल के प्रोफेसर का गार्डियन में बयान है कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा में बालों के झड़ने के उपचार को शामिल करना इस कार्यक्रम पर बहुत बुरा असर डालेगा और ज्यादा गंभीर बीमारियों के इलाज के कवरेज को कमजोर कर सकता है.

    दक्षिण कोरिया में कौन हैं राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार
    वकील से राजनेता बने ली को डेमोक्रेटिक पार्टी ने राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के तौर पर चुना है. इससे पहले राष्ट्रपति मून जे को अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा करने के चलते अपने पद को छोड़ना होगा, दक्षिण कोरिया के संविधान के मुताबिक राष्ट्रपति 4 साल के कार्यकाल के लिए ही चुना जा सकता है. ली के सामने कन्जर्वेटिव पीपुल पॉवर पार्टी के यून सुक योल हैं. हालांकि ली ने ओपिनियन पोल में यून से बढ़त हासिल की हुई है. दोनों ही उम्मीदवार कभी भी दक्षिण कोरिया की राष्ट्रीय सभा के सदस्य नहीं रहे हैं. ली को ग्योंगी के पूर्व गवर्नर के तौर पर जाना जाता है वहीं यून को मून जे के प्रशासन में प्रोस्यूक्यूटर जनरल के तौर पर पहचान मिली थी. रिपोर्ट बताती हैं कि पिछली बार का राष्ट्रपति चुनाव उत्तर कोरिया के साथ संबंधों और आर्थिक दिक्कतों पर केंद्रित था. वहीं इस बार बाल झड़ने की समस्या चुनाव में क्या रंग लाती है यह तो आने वाला वक्त बताएगा .

    Tags: Election, South korea

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