Opinion: पाकिस्तान का धार्मिक कट्टरपंथ और कोरोना वायरस का प्रसार

Opinion: पाकिस्तान का धार्मिक कट्टरपंथ और कोरोना वायरस का प्रसार
पाकिस्तान में कोरोना संक्रमित मरीज़ों की तादाद लगातार बढ़ती जा रही है

Coronavirus in Pakistan: पाकिस्तान का धार्मिक कट्टरपंथ , पाकिस्तान की जनता का सबसे बड़ा शत्रु बनकर सामने आ रहा है. अधिकांश इस्लामिक धर्म गुरु और मदरसे इस बात पर अड़े हुए हैं कि वह सरकार की लॉक डाउन जैसी मुहीम में हरगिज़ भाग नहीं लेंगें.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 25, 2020, 1:41 PM IST
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कोरोना वायरस जनित महामारी एक वैश्विक आपदा बनकर सामने आई है. विश्व के 195 देश इसकी जद में आ चुके हैं और इससे प्रभावित व्यक्तियों की संख्या लगातार बढ़ती ही जा रही है. अब दुनिया भर के देश इसकी रोकथाम के लिए सोशल डिस्टेंसिंग को स्वीकार कर चुके हैं और बड़े पैमाने पर दुनिया भर में लॉक डाउन दिखाई दे रहा है. पाकिस्तान इस बीमारी के लिए खतरनाक रूप से एक्स्पोस है परन्तु एक बार फिर पाकिस्तान का धार्मिक कट्टरपंथ इसके आड़े आ रहा है. अभी एक हफ्ते पहले ही पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान अपने शहरों के शटडाउन के कारण पढ़ने वाले आर्थिक प्रभावों के बारे में सार्वजनिक रूप से बात कर चुके हैं, जिसमें इसके आर्थिक दुष्प्रभावों की गहन चिंता परिलक्षित हो रही थी. और इसके पूर्व ही प्रधानमंत्री विश्व के देशों से यह मांग कर चुके हैं कि पाकिस्तान जैसे देशों के लिए एक कर्ज के भुगतान में रियायत की व्यवस्था शुरू करें जिससे वह अपनी आर्थिक बदहाली को कुछ हद तक संभाल सके.

कोरोना महामारी के बाद से पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था लगातार तबाही की ओर बढ़ती जा रही है. मार्च महीने में अब तक 1.388 अरब अमेरिकन डॉलर वैश्विक निवेशकों द्वारा पाकिस्तान के कैपिटल मार्केट से बाहर निकाले जा चुके हैं, और इसके साथ-साथ हॉट मनी जिसके बाहर जाने की मात्रा 1.2 अरब अमेरिकन डॉलर तक पहुंच चुकी है, यह एक बड़ा झटका है. साथ ही साथ इस बात का भी अनुमान है कि आने वाले महीनों में पाकिस्तान 2 से 4 अरब अमेरिकी डॉलर का नुकसान, इस मूल्य के आयात आर्डर कैंसिल होने के कारण उठा सकता है. अगर हम पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को होने वाले नुकसान को समग्रता में देखें तो एक अनुमान के अनुसार 1.3 ट्रिलियन पाकिस्तानी रूपये का नुकसान ( या 8.2 अरब अमेरिकी डॉलर) कोरोना वायरस के कारण होने वाली इस आपदा के कारण पाकिस्तान को निकट भविष्य में झेलना पड़ सकता है. अब पाकिस्तान एक गंभीर परिस्थिति में फंसता नज़र आ रहा है. अब पाकिस्तान के सामने सबसे बड़ा संकट यह है कि अगर वह शटडाउन नहीं करता तो उसकी बड़ी आबादी के सामने जीवन का संकट उत्पन्न हो जाएगा. वहीं दूसरी ओर अगर वह शट डाउन करता है तो उसकी आर्थिक व्यवस्था चौपट हो जाएगी और लोग बड़ी मात्रा में भुखमरी का शिकार हो सकते हैं.

धार्मिक कट्टरपंथ की भूमिका
इस सब में पाकिस्तान का धार्मिक कट्टरपंथ , पाकिस्तान की जनता का सबसे बड़ा शत्रु बनकर सामने आ रहा है. पाकिस्तान के अधिकांश इस्लामिक धर्म गुरु और मदरसे इस बात पर अड़े हुए हैं कि वह सरकार की लॉक डाउन जैसी मुहीम में हरगिज़ भाग नहीं लेंगें. साथ ही मस्जिदों में होने वाले जनसमुदाय के एकत्रीकरण और नमाज इत्यादि को रोकने से सख्त गुरेज़ प्रदर्शित किया है. पिछले शुक्रवार को ही सरकार के स्पष्ट आदेशों के बावजूद इन मौलानाओं के नेतृत्व में जुमे की नमाज के लिए भारी हुजूम इकट्ठा हुआ. और यह सब शासन की अधिकारिता को धत्ता बताते हुए इकट्ठा हुए थे कि उन्हें सरकार के आदेशों की जरा भी परवाह नहीं है.



पाकिस्तान में सत्ता का इस्लामिक कट्टरपंथ के प्रति गहरा झुकाव रहा है जिसके निहित राजनैतिक निहितार्थ भी रहे हैं. परन्तु जिया के बाद से यह सरकार कट्टरपंथ के सम्मुख सर्वाधिक असहाय और साधनहीन सिद्ध होने जा रही है. उल्लेखनीय है पाकिस्तान में कोरोना का सर्वाधिक बड़ा ख़तरा चीन के साथ उसकी नजदीकियों में निहित है. परन्तु “सागर से गहरी और शहद से मीठी” इस मित्रता के लिए पाकिस्तान के शासकों ने अपनी जनता की बलि चढाने में कोई कसर बाकी न रखी. दिसम्बर में वुहान में कोरोना का प्रकोप होते ही दुनिया भर के देश पाकिस्तान से अपने नागरिकों को वापस बुला रहे थे, उसी समय पाकिस्तान के राष्ट्रपति फरवरी के प्रारंभ में अपने नागरिकों को चीन से वापस बुलाने के बजाय इसके विरुद्ध हदीस से दृष्टान्त दिए जा रहे थे. डॉ आरिफ अल्वी ने सोशल मीडिया पर अपना बयान शेयर करते हुए प्रोफेट मोहम्मद की एक हदीस का उल्लेख करते हुए कहा था कि पाकिस्तान अपनी जनता को कोरोनावायरस प्रभावित चीन से बाहर नहीं निकालेगा क्योंकि ऐसा करना इस्लामिक विचारों के विरुद्ध होगा. अल्वी ने इमाम मुस्लिम इब्न हज्जाज की इस हदीस को उद्धृत करते हुए कहा कि “अगर तुम किसी जगह पर प्लेग के बारे में सुनो तो वहां पर मत जाओ, लेकिन अगर किसी जगह जहां तुम रह रहे हो वहां प्लेग फ़ैल जाता है तो उस जगह को मत छोड़ो”.



सत्ता के सर्वोच्च स्तर पर कट्टरपंथ के इस प्रभाव से स्पष्ट है कि शासन और प्रशासन का कोई भी कोना अछूता नहीं है. और वर्तमान परिस्थितियों में सरकार इन कट्टरपंथी मौलानाओं और मदरसों के आगे आत्मसमर्पण करती प्रतीत हो रही है. इमरान खान के वक्तव्य के बाद पाकिस्तान के पंजाब प्रान्त के मुख्यमंत्री सरदार उस्मान बुजदार ने एक बैठक आयोजित की जिसमें अनेकों धार्मिक मुखिया उपस्थित हुए. इसमें बुजदार ने साफ तौर पर कहा कि पाकिस्तान के अंदर किसी भी मस्जिद को बंद नहीं किया जाएगा.

पंजाब सरकार के विधि मंत्री उससे पहले कह चुके हैं कि सरकार के साथ मौलानाओं का गठबंधन एक सकारात्मक परम्परा है, वहीं दूसरी ओर एक और मंत्री जो इस प्रान्त के सूचना मंत्री हैं, यह कह चुके हैं कि जो बच्चों में विकलांगता का कारण ईश्वर का अभिशाप है! पाकिस्तान की आबादी का एक बहुत बड़ा भाग इन्ही मौलानाओं के प्रभाव में है. साथ ही साथ पूरा मदरसा तंत्र जो पाकिस्तान के लगभग 50 लाख बच्चों की शिक्षा के लिए सीधे तौर पर उत्तरदायी है, इसी तरह की तर्कहीन और कट्टरपंथी शिक्षाओं के प्रसार का सबसे बड़ा साधन बना हुआ है. वर्तमान समय में में अगर हम देखे तो धर्मनिरपेक्ष और वैज्ञानिक शिक्षा जैसी कोई चीज पाकिस्तान में मौजूद नहीं है. और जब ऐसे मौलाना धार्मिक आधार पर वैज्ञानिक चीजों की व्याख्या करें लगते हैं तो स्थितियां और बिगड़ जाती हैं और यही वर्तमान में पाकिस्तान में देखा जा रहा है.

कोरोना के प्रसार में सहायक!
धार्मिक यात्राये और आयोजन इस समय पाकिस्तान में संक्रमण फैलाने के सबसे बड़े साधन बने हुए हैं. पाकिस्तान में कोरोना से होने वाली पहली मौत, सऊदी अरब से आये एक धार्मिक यात्री की ही हुई थी जो वहीँ संक्रमित हुआ. इसी तरह ईरान जो सबसे ज्यादा बड़ी मात्रा में प्रभावित देशों में से एक है, से बड़ी संख्या में जायरीन वापस आ रहे हैं और उनके इनफेक्टेड होकर मरने की तादाद बहुत ज्यादा तेजी से बढ़ती चली जा रही है. वहीँ दूसरी ओर इस आपदा के बाद भी पाकिस्तान में ऐसे बड़े धार्मिक आयोजनों पर कोई भी लगाम नही दिखाई देती. अभी मार्च के शुरूआत में ही पाकिस्तान के अंदर तबलीगी जमात का एक बड़ा सम्मलेन आयोजित किया गया, जिसमें दुनिया के अनेक देशों से प्रतिनिधि शामिल हुए. स्थानीय मीडिया के अनुसार इस कार्यक्रम में ढाई लाख से ज्यादा एकत्र हुए. इसके बाद पाकिस्तान में COVID-19 को लेकर जो टेस्ट किए गए उसमें जो 12 ऐसे लोग संक्रमित पाए गए जिन्होंने इस कार्यक्रम में हिस्सा लिया था. इसके साथ-साथ एक फिलिस्तीनी भी संक्रमित पाया गया है जिसने पाकिस्तान के इस कार्यक्रम में उपस्थिति दर्ज कराई थी.

इस गहन आपदा के समय दुनिया भर में धार्मिक तंत्र, सरकारों के साथ लगातार सहयोग कर रहा है वहीं पाकिस्तान के विषय में यह स्थिति बिल्कुल ही उलटी है, जहां धार्मिक क्षेत्र पाकिस्तान की सरकार के विरुद्ध आकर खड़ा हो गया है और इस्लामी मूल्यों और आस्थाओं की दुहाई देकर, बचाव के उपायों में रोड़े अटका आने का काम कर रहा है जिससे पाकिस्तान में यह समस्या दिनोंदिन और भी तेजी से बढ़ती ही जा रही है.

वर्तमान सरकार पाकिस्तान के इतिहास में सर्वाधिक कमजोर सरकार साबित होती हुई दिखाई दे रही है जिसने धार्मिक कट्टरपंथियों के आगे पूर्ण रूप से समर्पण कर दिया है और उनके हर दुराग्रह पर हां में हां मिलाने के अलावा सरकार के पास कोई और विकल्प नहीं रह गया है. अगर आपदा का प्रसार होता है तो पाकिस्तान को गहरी क्षति उठानी पड़ सकती है. वर्तमान में पाकिस्तान की सरकार की तैयारी जिस स्तर पर है, इस महामारी से निपटने के लिए वह हद दर्जे तक अपर्याप्त हैं. पाकिस्तान के पास इस समय योजना और उपायों और उनके अनुपालन में समग्रता और एकता का अभाव है. पाकिस्तान में सार्वजनिक स्वास्थ्य रक्षा तंत्र का लगभग अभाव ही है, पाकिस्तान की बहुसंख्यक जनता शिक्षित नहीं है, और शिक्षित वर्ग में जागरूकता की अत्यंत कमी है. और इस सबके बीच पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था वेंटिलेटर पर है. यह समस्त तथ्य इशारा करते हैं कि आगे आने वाला समय पाकिस्तान के लिए कठिन सिद्ध हो सकता है.

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First published: March 25, 2020, 1:10 PM IST
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