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श्रीलंकाई राष्ट्रपति चुनाव में आई तेज़ी, प्रेमदासा और राजपाकसा दोनों की तमिल वोटों पर नज़र

D P Satish | News18Hindi
Updated: October 14, 2019, 11:18 PM IST
श्रीलंकाई राष्ट्रपति चुनाव में आई तेज़ी, प्रेमदासा और राजपाकसा दोनों की तमिल वोटों पर नज़र
श्रीलंका चुनावों में राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार यूएनपी पार्टी के सजित प्रेमदासा (फाइल फोटो)

श्रीलंका (Sri Lanka) में अगले महीने राष्ट्रपति (President) पद के लिए चुनाव होने वाले हैं. इस बार वहां चुनाव आयोग (Election Commission) 80% मतदान की उम्मीद कर रहा है.

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  • Last Updated: October 14, 2019, 11:18 PM IST
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बेंगलुरु. श्रीलंका (Sri Lanka) में एक माह बाद राष्ट्रपति चुनाव (Presidential Election) होने हैं. इस देश के इतिहास में ऐसा पहली बार हो रहा है जब कोई वर्तमान राष्ट्रपति (President) या प्रधानमंत्री (Prime Minister) देश के इस शीर्ष पदों के लिए चुनाव नहीं लड़ रहा है. यद्यपि इस चुनाव में 35 उम्मीदवार खड़े हैं पर मुख्य लड़ाई यूएनपी (UNP) के उम्मीदवार आवास मंत्री सजित प्रेमदासा और एसएलपीपी के गोताबया राजपाकसा के बीच है. यह चुनाव भी 2015 के चुनावों की तरह ही बहुत ही भयंकर है.

पिछली बार यूएनपी (UNP) ने तानाशाही राष्ट्रपति महिंदा राजपाकसा (Mahinda Rajapaksa) को हराने के लिए अन्य ताक़तों से हाथ मिलाया था और वह इसमें कामयाब रहा जबकि यह कहा जा रहा था कि महिंदा राजपाकसा को हराना असंभव है. इस बार यूएनपी एक बार फिर इसी तरह की लड़ाई में फंसा है जिस पर राजपाकसा ख़ानदान के एक अन्य व्यक्ति को चुने जाने से रोकना है जिसे कुछ यूएनपी (UNP) नेता “दरवाज़े पर खड़ा जंगली” बता रहे हैं.

कुछ अख़बार कर चुके हैं सजित प्रेमदासा के अगला राष्ट्रपति बनने की भविष्यवाणी
जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) संसदीय चुनावों में भारी जीत और प्रधानमंत्री बनने के बाद श्रीलंका (Sri Lanka) की अपनी पहली यात्रा पर गए थे उस समय 52 वर्षीय सजित प्रेमदासा को “मिनिस्टर इन वेटिंग” के रूप में उनकी आवभगत के लिए नियुक्त किया गया था. कुछ अख़बारों ने यह भविष्यवाणी की थी कि वे अगले राष्ट्रपति बनने वाले हैं.

सजित श्रीलंका के पूर्व राष्ट्रपति रणसिंघे प्रेमदासा (Ranasinghe Premadasa) के बेटे हैं जिनकी हत्या कर दी गई थी. वे लंदन स्कूल ऑफ़ इकोनोमिक्स (LSE) से ग्रैजुएट हैं और मेरीलैंड विश्वविद्यालय से उन्होंने अन्तर्राष्ट्रीय संबंधों में पोस्ट ग्रैजूएट की डिग्री हासिल की है. उनके पिता बहुत ही ग़रीब परिवार से आते थे पर सजित के साथ अब ऐसा नहीं है और उन्होंने अपनी ज़िंदगी अमीरी में बिताई है. उनके पास अपने उनके परिवार की प्रसिद्धि, संबंध, विरासत, शिक्षा और संपत्ति है पर अपने पिता की ही तरह वे भी कोलंबो के संभ्रांत लोगों से दूरी बनाए रखते हैं ताकि लोगों को यह बता सकें कि आम लोगों से वे जुड़े हुए हैं.

ठान लेते हैं तो लक्ष्य हासिल करके रहते हैं सजित
सजित जल्दी सबक़ लेने वाले व्यक्ति और उस लक्ष्य को हासिल करके रहने के लिए जाने जाते हैं जिसको हासिल करने की वो ठान लेते हैं. राष्ट्रपति चुनाव में अन्य सभी उम्मीदवारों को दरकिनार करते हुए, सजित ने यूएनपी को राष्ट्रपति चुनाव में उन्हें उम्मीदवार बनाने के लिए बाध्य कर दिया. वह इस बात को जानते हैं कि गोताबया एक मज़बूत उम्मीदवार हैं और उनके राष्ट्रीय सुरक्षा के इर्द गिर्द घूमने वाले चुनाव अभियान (Election Campaign) का मुक़ाबला करने के लिए उन्होंने घोषणा की है कि अगर वे चुनाव जीतने में सफल रहते हैं तो देश के पूर्व सेनाध्यक्ष फ़ील्ड मार्शल शरत फोंसेका उनके राष्ट्रीय सुरक्षा प्रमुख होंगे. वर्ष 2009 में गोताब्या-फोंसेका की जोड़ी ने ही एलटीटीई (LTTE) का श्रीलंका में दमन किया था.
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सजित बहुसंख्यक-अल्पसंख्यक के वोटों के बल पर चुनाव जीतने का भरोसा कर रहे हैं जिनकी जनसंख्या श्रीलंका में 25% है. उन्हें देश की सिंहली वोटों का भी एक बड़ा हिस्सा मिलने की उम्मीद है और इसके बल पर वे 50% से ज़्यादा मत पाकर राष्ट्रपति की कुर्सी तक पहुंचना चाहते हैं. पर गोताबया भी कोई मौक़ा गंवाना नहीं चाहते और उन्होंने प्रेमदासा के ख़िलाफ़ व्यापक अभियान छेड़ दिया है और उनकी पार्टी को राष्ट्र-विरोधी कहना शुरू कर दिया है. राजपाकसा के शासनकाल में 2005-2015 के दौरान जो भारी भ्रष्टाचार था और मानवाधिकार (Human Rights) का खुलकर उल्लंघन हुआ वह इस बार उनका पीछा कर रहा है.

इस बार चुनाव आयोग को श्रीलंकाई चुनावों में 80% मतदान होने की उम्मीद है (न्यूज18 क्रिएटिव)


राजपाकसा को मिल सकता है सिंघली समुदाय का भारी समर्थन
इन लोगों को उम्मीद है कि उन्हें बहुसंख्यक सिंहली समुदाय (Sinhalese Community) का भारी समर्थन मिलेगा साथ ही अल्पसंख्यकों के भी कुछ वोट मिलेंगे जिसके बल पर वे सत्ता में वापसी का मंसूबा पाले हुए हैं. राजपाकसा को तमिलों की तीन पार्टियों ने पहले ही अपना समर्थन दे दिया है. दिलचस्प बात यह है कि सीलोन वरकर्स कांग्रेस (CWC) जो कि भारतीय मूल के चाय बाग़ान मालिक तमिलों की पार्टी है, ने पहले ही गोताबया को अपना समर्थन देने की घोषणा कर दी है और इस तरह से श्रीलंका में राजनीतिक समीकरण को इसने बिगाड़ दिया है.

सीडब्ल्यूसी के नेता अरमुगम थोंडमान जो कि सीडब्ल्यूसी के क़द्दावर नेता एस थोंडमान के पौत्र हैं, ने गोताबया को चाय बाग़ान (Tea Garden) से जुड़े पांच लाख लोगों का वोट दिलाने का वादा किया है बशर्ते उन्हें चुनाव के बाद मंत्रिमंडल (Cabinet) में अहम ओहदा मिले. पर स्थानीय लोगों का मानना है कि चाय बाग़ान से जुड़े सभी लोग सीडब्ल्यूसी के साथ नहीं हैं और अगर हैं भी तो वे सब सिर्फ़ इसलीए एक मत से वोट नहीं डालेंगे क्योंकि थोंडमान ने उन्हें गोताबया को समर्थन देने को कहा है.

जेवीपी 'वोटकटवा' की भूमिका निभा सकती है
तमिल नेशनल अलाइंस (TNA) कई सारे तमिल पार्टियों (Tamil Parties) का एक गठबंधन है, ने अभी तक अपना रुख स्पष्ट नहीं किया है. हालांकि, ऐसा माना जाता है कि उनका वोट चुनाव के दिन संजीत को मिलेगा. इस चुनाव में जो दो अन्य प्रमुख उम्मीदवार खड़े हैं वे संजीत और गोताबया के भाग्य के निर्धारण में अहम भूमिका अदा कर सकते हैं.

मार्क्सिस्ट जेवीपी के प्रमुख अनुरा कुमार दिसनायका और पूर्व सेना प्रमुख महेश सेनानायके भी यह चुनाव लड़ रहे हैं जिसकी वजह से यूएनपी और एसएलपीपी खेमों में तनाव बढ़ गया है. दिलचस्प यह है कि श्रीलंका के संभ्रांत इलाक़ों में जेवीपी को काफ़ी समर्थन मिल रहा है और दिसनायके की सभाओं में काफ़ी संख्या में भीड़ जुट रही है. कोलंबो (Colombo) स्थित एक वरिष्ठ पत्रकार का मानना है कि जेवीपी, यूएनपी और एसएलपीपी दोनों का वोट काट सकती है.

चुनाव आयोग कर रहा है 80% मतदान की उम्मीद
महेश सेनानानायक़े सिविल सोसाइटी के उम्मीदवार हैं जिन्हें सर्वोदय आंदोलन के नेता एटी अरियारत्ने और अन्य लोगों का समर्थन प्राप्त है. 2015 में, सिविल सोसाइटी ने सिरिसेना को राजपाकसा (Mahinda Rajapaksa) के ख़िलाफ़ समर्थन दिया था. इस बार, यूएनपी और एसएलपीपी दोनों ही पार्टियों से निराश होकर अब वे सेनानायके का समर्थन कर रहे हैं. उम्मीद की जा रही है कि इनकी उम्मीदवारी भी यूएनपी और एसएलपीपी दोनों के वोटों में कटौती कर सकती है. सोशल मीडिया (Social Media) जैसे आधुनिक प्लैट्फ़ॉर्म का प्रयोग करते हुए सभी उम्मीदवार पूरे देश में व्यापक चुनाव प्रचार कर रहे हैं. श्रीलंका में कुल पंजीकृत वोटरों की संख्या 1.60 करोड़ है. यहां का चुनाव आयोग इस बार 80% मतदान की उम्मीद कर रहा है.

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First published: October 14, 2019, 11:15 PM IST
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