Exclusive: राजपक्षे बोले- भारत से NSG नहीं चाहिए, श्रीलंका आतंकियों से खुद निपट लेगा

News18 को एक इंटरव्यू में महिंदा राजपक्षे ने कहा- भारत की मदद का शुक्रिया लेकिन आपकी NSG नहीं चाहिए.

News18Hindi
Updated: April 28, 2019, 6:58 PM IST
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Updated: April 28, 2019, 6:58 PM IST
प्रदीप पिल्लै

ईस्टर रविवार के दिन श्रीलंका के कोलंबो में हुए आतंकी हमले के बाद भारत की तरफ से मिली मदद पर पूर्व राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे ने शुक्रिया अदा किया है. हालांकि उन्होंने ये भी कहा कि श्रीलंका की जमीन पर कोई विदेशी सुरक्षाबल नहीं चाहिए इसलिए भारत को NSG (नेशनल सिक्योरिटी गार्ड) भेजने की कोई ज़रूरत नहीं है.

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News18 को दिए एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में महिंदा राजपक्षे ने कहा कि 'भारत मददगार रहा है. लेकिन एनएसजी (नेशनल सिक्योरिटी गार्ड) के आने की आवश्यकता नहीं है. हमें विदेशी सैनिक नहीं चाहिए. हमारे अपने सुरक्षा बल काफी सक्षम हैं. हमें उन्हें और आजादी और शक्ति देने की ज़रूरत है.'

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महिंदा राजपक्षे की यह टिप्पणी एक सरकारी अधिकारी के  CNN-NEWS18 को यह बताए जाने के बाद आई है कि श्रीलंका की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने NSG को स्टैंडबाय पर रखा है.

पिछले साल तख्तापलट में शामिल पूर्व राष्ट्रपति राजपक्षे ने श्रीलंका सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि राष्ट्रपति मैत्रिपाला सिरिसेना और प्रधानमंत्री रनिल विक्रमसिंघे ही ईस्टर धमाकों के जिम्मेदार हैं, जिसमें करीब 250 से ज्यादा लोगों की जान चली गई.
बता दें कि राष्ट्रपति सिरिसेना के पास ही रक्षा मंत्रालय और राष्ट्रीय पुलिस की देखरेख की जिम्मेदारी है. ऐसा कहा जा रहा है कि रनिल विक्रमसिंघे को पिछले साल सत्ता से बेदखल करने की कोशिशें विफल होने के बाद उन्हें सुरक्षा से जुड़ी अहम बैठकों से दूर रखा जा रहा था.

राजपक्षे ने NEWS18 से कहा, 'वे राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर भी राजनीति करने में व्यस्त हैं. देश में बढ़ते कट्टरपंथ के बारे में सभी जानते हैं. उन्हें बस वोट बैंक की फिक्र है और इस कारण उन्होंने कार्रवाई नहीं की.'

पहले ही यह बात स्वीकार कर चुके हैं अधिकारी

श्रीलंका के शीर्ष अधिकारी पहले ही ये स्वीकार कर चुके हैं कि बम धमाकों से एक हफ्ते पहले उन्हें कुछ इंटेलीजेंस यूनिस्ट से इसकी सूचना मिली थी. लेकिन, इन धमाकों को रोकने के लिए ज्यादा कुछ नहीं किया गया. श्रीलंका के पुलिस चीफ पूजीथ जयसुंदरा और डिफेंस सेक्रेटरी हेमासिरी फर्नेंडो ने बम धमाकों के बाद अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है.

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अधिकारियों ने ये भी माना कि सूचना होने के बाद भी वे सब बम धमाकों को रोकने में नाकाम रहे. 8 सीरियल बम धमाकों के बाद श्रीलंका के प्रधानमंत्री विक्रमसिंघे ने ट्वीट किया था, 'हम सामूहिक रूप से इसकी जिम्मेदारी लेते हैं. हमारी सरकार, पुलिस और इंटेलीजेंस एजेंसियां धमाकों को रोकने में नाकाम रही, इसके लिए हम नागरिकों से माफी मांगते हैं.

सीरियल बम धमाकों के बाद श्रीलंका के प्रधानमंत्री विक्रमसिंघे ने ट्वीट किया, 'हम सामूहिक रूप से इसकी जिम्मेदारी लेते हैं. हमारी सरकार, पुलिस और इंटेलीजेंस एजेंसियां धमाकों को रोकने में नाकाम रही, इसके लिए हम नागरिकों और धमाके के पीड़ितों से माफी मांगते हैं.'

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पीएम के दावे के महिंदा ने किया खारिज

इधर, पूर्व राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे ने पीएम विक्रमसिंघे के उस दावे को खारिज किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि जिन लोगों ने इस्लामिक स्टेट (ISIS) ज्वॉइन करने के लिए राज्य छोड़ा है, उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा सकती. राजपक्षे ने कहा, 'देश का मौजूदा कानून ऐसे टेरर लिंक से निपटने के लिए काफी है.'

पीएम विक्रमसिंघे ने कहा था-

बता दें कि पीएम विक्रमसिंघे ने दो दिन पहले कहा था कि सरकार के पास जानकारी है कि जो लोग आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट ज्वॉइन करने के लिए श्रीलंका छोड़ कर गए थे, वो अब लौट आए हैं. लेकिन, उनपर कोई कार्रवाई नहीं की जा सकती, क्योंकि फॉरिन टेररिस्ट ऑर्गनाइजेशन में शामिल होना श्रीलंका के कानून के खिलाफ नहीं है.

गौरतलब है कि आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट ने श्रीलंका बम धमाकों की जिम्मेदारी ली है. ईस्टर के दिन कोलंबो के कई कैथोलिक चर्चों और लग्ज़री होटेल्स को निशाना बनाया था. अलग-अलग जगहों पर सिलसिलेवार 8 बम धमाके हुए थे. इन धमाकों में 253 लोगों की जान चली गई और 500 से ज्यादा घायल हो गए. हालांकि, सरकार ने इन धमाकों के पीछे स्थानीय आतंकी संगठन नेशनल तौहीद जमात (NTJ) पर शक जाहिर किया है.

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