भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती है श्रीलंका में चीन की बढ़ती ताकत

कोलंबो पोर्ट प्रोजेक्ट की वजह से श्रीलंका में राजनीतिक रूप से अस्थिरता भी आई है. पिछले महीने 26 अक्टूबर को राष्ट्रपति मैत्रीपाल सिरिसेना ने तत्कालीन प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे को पद से हटा दिया था.

News18.com
Updated: November 9, 2018, 12:05 PM IST
भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती है श्रीलंका में चीन की बढ़ती ताकत
कोलंबो पोर्ट प्रोजेक्ट की वजह से श्रीलंका में राजनीतिक रूप से अस्थिरता भी आई है. पिछले महीने 26 अक्टूबर को राष्ट्रपति मैत्रीपाल सिरिसेना ने तत्कालीन प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे को पद से हटा दिया था.
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Updated: November 9, 2018, 12:05 PM IST
श्रीलंका में चीन का लगातार बढ़ता दबदबा भारत के लिए चिंता का कारण बनता जा रहा है. दक्षिण एशियाई क्षेत्र में अभी तक भारत एकमात्र शक्ति के रूप में था लेकिन अब भारत को इस बात की चिंता सताने लगी है कि कहीं श्रीलंका चीन का 'मिलिट्री आउटपोस्ट' न बन जाए.

कोलंबो पोर्ट प्रोजेक्ट की वजह से श्रीलंका में राजनीतिक रूप से अस्थिरता भी आई है. पिछले महीने 26 अक्टूबर को राष्ट्रपति मैत्रीपाल सिरिसेना ने तत्कालीन प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे को पद से हटा दिया था. प्रोजेक्ट को स्वीकृति देने के मद्देनज़र राष्ट्रपति सिरिसेना की अध्यक्षता में एक मीटिंग 16 अक्टूबर को हुई थी. बिना किसी का नाम लेते हुए विक्रमसिंघे ने बताया, मीटिंग में कोलंबो पोर्ट के प्रस्ताव को स्वीकृति दिए जाने के मामले में यह बात आगे आ रही थी कि इसका ठेका भारत-जापान को न दिया जाए.' उन्होंने कहा कि मेरा पक्ष था कि भारत-जापान और श्रीलंका के बीच हस्ताक्षर किए गए 'मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग' का सम्मान होना चाहिए.

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भारत 1 बिलियन डॉलर का प्रोजेक्ट पाने को लेकर श्रीलंका के ऊपर लगातार दबाव बनाता रहा है. हालांकि, सरकार के एक पूर्व मंत्री रजित सेनारत्ने के अनुसार राष्ट्रपति सिरिसेना का कहना था कि देश पहले से ही 8 बिलियन डॉलर के चायनीज़ ऋण तले दबा हुआ है. अब इसलिए देश और भी ज़्यादा देश के संसाधनों विदेशियों को नहीं दे सकता. दरअसल, चीन इस वक्त भारत के लगभग सभी पड़ोसी देशों पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, नेपाल में हाईवे, पावर स्टेशन व पोर्ट आदि बना रहा है.

लेकिन कोलंबो में चीन की उपस्थिति का असर दिखना शुरू हो गया है. शहर से दिखने वाले समंदर को एक तरफ से बंद कर दिया गया है क्योंकि इस प्रोजेक्ट के तहत वहां कॉमर्शियल डिस्ट्रिक्ट बनेगा. प्रोजेक्ट वाली जगह के नज़दीक बड़े बिल बोर्ड्स, चीनी भाषा में लिखे हुए दिख रहे हैं. इसके अलावा हंबनटोटा और कोलंबो में चीनी समुदाय को लोग काफी संख्या में दिखने शुरू हो गए हैं. मोदी सरकार लगातार इस बात की कोशिश कर रही है कि अगला प्रोजेक्ट भारत को मिल जाए ताकि वहां चीनी सेना को फ्री पास मिलने से रोका जा सके.

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भारत इस वक्त ऐसी स्थिति में नहीं है कि वो चीन की बढ़ती शक्ति को नज़रअंदाज़ कर सके. लेकिन भारत के लिए कोलंबो पोर्ट ही प्राथमिकता नहीं है. भारत हंबनटोटा में चायनीज़ सीपोर्ट के नज़दीक बने हुए एयरपोर्ट का नियंत्रण भी अपने हाथ में लेने की कोशिश कर रहा है ताकि श्रीलंका में चीन की बढ़ती हुई ताकत को रोका जा सके.
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