क्या संदेश छिपा है पीएम मोदी के श्रीलंका दौरे में

पीएम मोदी का यहा दौरा पूरी दुनिया यानी अंतरराष्ट्रीय समुदाय को यही संदेश देगा कि श्रीलंका के हालात अब सामान्य हो रहे हैं.

अमिताभ सिन्हा | News18Hindi
Updated: June 9, 2019, 4:32 PM IST
क्या संदेश छिपा है पीएम मोदी के श्रीलंका दौरे में
पीएम मोदी श्रीलंका यात्रा के दौरान तमिल प्रतिनिधियों से मिलते हुए(फोटो साभार-पीएमओ)
अमिताभ सिन्हा
अमिताभ सिन्हा | News18Hindi
Updated: June 9, 2019, 4:32 PM IST
दोबारा प्रधानमंत्री का पद संभालने के बाद नरेंद्र मोदी पहली बार विदेश यात्रा पर निकले तो अपने पड़ोसी देश को ही चुना. मालदीव और श्रीलंका दो ऐसे देश हैं, जो न सिर्फ पड़ोसी हैं बल्कि सामरिक दृष्टि से भी काफी महत्वपूर्ण हैं. श्रीलंका के राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरिसेना के बुलावे पर पीएम मोदी श्रीलंका पहुंचे हैं. पीएम मोदी का श्रीलंका दौरे का संदेश साफ था कि भारत अपने नेबरहुड फर्स्ट नीति पर आज भी अमल करता है. बता दें कि पीएम मोदी 21 अप्रैल को श्रीलंका में हुए आतंकी हमले के बाद वहां पहुंचने वाले पहले राष्ट्राध्यक्ष हैं.

इस यात्रा का संदेश साफ है कि इस मुश्किल वक्त में भी भारत आतंकवाद से जूझ रही श्रीलंका की जनता के साथ है. पीएम मोदी का यहा दौरा पूरी दुनिया यानी अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को यही संदेश देगा कि श्रीलंका के हालात अब सामान्य हो रहे हैं. जानकर बताते हैं कि इसका श्रीलंका आने वाले अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों पर भी पीएम मोदी के दौरे का सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा. पीएम मोदी के दौरे से श्रीलंका में पर्यटन उद्योग एक बार फिर से पटरी लौट जाएगा. इससे श्रीलंका की अर्थव्यवस्था में भी तेजी आएगी. क्योंकि श्रीलंका की अर्थव्यवस्था काफी कुछ पर्यटन उद्योग पर ही टिकी है.



श्रीलंका में हुए आतंकी हमले में शीहद हुए लोगों को श्रद्धांजलि देते हुए पीएम मोदी(साभार-पीएमओ)


आतंकी हमले के बाद श्रीलंका पहुंचने वाले मोदी पहले राष्ट्राध्यक्ष  

बता दें कि पीएम मोदी दुनिया भर में एक ही संदेश देते फिर रहे हैं कि आतंकवाद और कट्टरवाद पूरी मानवता के लिए खतरा है. इस लड़ाई में सबको साथ मिलकर लड़ना और सबको साथ मिल कर जूझना है. श्रीलंका पर हुआ आतंकी हमला सिर्फ वहां की जनता पर नही बल्कि पूरी दुनिया में लोगों के दिलोदिमाग पर बुरा असर डालता है. पीएम मोदी यही संदेश देने गए हैं कि आतंकवाद सिर्फ रीजनल सिक्योरिटी बल्कि विश्व शांति के लिए भी खतरा है. इसलिए जिहादी ताकतों को न सिर्फ अलग-थलग किया जाए बल्कि उसका खात्मा भी मिल-जुल कर किया जाए.

पीएम मोदी श्रीलंका यात्रा के दौरान लोगों से बात करते हुए(फोटो साभार-पीएमओ)


पीएम मोदी ने अपनी इस यात्रा के दौरान श्रीलंका सरकार को हर संभव सहायता देने का ऐलान किया है. जब भी श्रीलंका को जरूरत पड़ी है, भारत सबसे पहले मदद के लिए आगे आया है. चाहे वह बाढ़ राहत का मसला हो या फिर सुखा पड़ा हो, भारत ने तुरंत ही मदद पहुंचाई है. भारत ने श्रीलंका में चल रही कई विकास परियोजनाएं तोहफे के रुप में शुरू की है.
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पिछले 5 साल के पीएम मोदी के कार्यकाल में भारत-श्रीलंका के बीच कई ऐतिहासिक पड़ाव आते रहे हैं. मार्च 2015 में पहली बार पीएम मोदी श्रीलंका के दौरे पर गए थे. मई 2017 को मोदी ने एक बार फिर से श्रीलंका की यात्रा की थी. इस मौके पर तो पीएम मोदी अंतरराष्ट्रीय वेश्विक दिवस पर मुख्य अतिथि भी बने थे. इस बार भी जब भारत की जनता ने उन्हें स्पष्ट जनादेश दिया तो साफ था कि जनता भी चाहती है कि मोदी की शुरू की गई नीतियों पर ही देश चले और इन रिश्तों को और प्रगाढ़ करना श्रीलंका के हित भी है.

पीएम मोदी श्रीलंका यात्रा के दौरान तमिल प्रतिनिधियों से मिलते हुए(फोटो साभार-पीएमओ)


 नेबरहुड फर्स्ट की नीति पर भारत आज भी कायम है

इसलिए पीएम मोदी के इस दौरे से साफ है कि नेबरहुड फर्स्ट की नीति और साथ ही सागर डॉक्ट्रिन उनके और भारत के लिए कितना मायने रखता है. सागर डॉक्ट्रिन का मतलब पीएम मोदी ने ही दुनिया को पहली बार बताया था. सिक्योरिटी एंड ग्रोथ फॉर आल इन रीजन जिसमें भारत की समुद्री सीमा के पास के सभी देश शामिल हैं.

कुलमिलाकर पीएम मोदी का श्रीलंका दौरा वहां की जनता को आश्वस्त करने के लिए है कि वो किसी भी लड़ाई में अकेले नही नही हैं, बल्कि उन्हें जब भी जरूरत हो भारत उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है और खड़ा रहेगा.

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