क्राउन प्रिंस सलमान के खिलाफ दावेदारी ठोकने की तैयारी में थे प्रिंस नयेफ, ऐसे खुला राज

क्राउन प्रिंस सलमान के खिलाफ दावेदारी ठोकने की तैयारी में थे प्रिंस नयेफ, ऐसे खुला राज
सऊदी अरब में नाबालिगों की फांसी की सज़ा खत्म कर दी गई है

सऊदी अरब में इस बात को लेकर अब तक चर्चा जारी है कि राजपरिवार के सदस्य किस तरह से तख्तापलट की साजिश रच रहे थे. इतना ही नहीं इस बात की अफवाह ने भी जोर पकड़ लिया था कि किंग सलमान की सेहत बिगड़ती जा रही है और उनकी जगह उनके बेटे गद्दी संभाल सकते हैं..

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 11, 2020, 3:13 PM IST
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रियाद: सऊदी अरब (Saudi Arab) में राजपरिवार (Royal Family) के भीतर विश्वासघात और मौजूदा किंग के तख्तापलट की साजिश को लेकर कई तरह की खबरें सामने आ रही है. अब पता चला है कि राजपरिवार के जिन दो सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है, उनकी प्लानिंग क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (Crown Prince Mohammed bin salman) के सत्ता हासिल करने में व्यवधान पैदा करना था.

गार्जियन की एक खबर के मुताबिक कुछ विश्वस्त सूत्रों के हवाले से कहा जा रहा है कि गिरफ्तार हुए राजपरिवार के सदस्य आपस में बातचीत करते हुए पाए गए थे, कि अगर मौजूदा किंग की मौत होती है या वो दूसरे किन्हीं कारणों से अक्षम होते हैं तो उनमें से किसी एक को क्राउन प्रिंस सलमान की ताजपोशी में व्यवधान पैदा करना है और एक दावेदार के तौर पर सामने आना है.

गार्जियन के मुताबिक राजकुमार अहमद बिन अब्दुल अजीज (किंग सलमान के एकलौते बचे भाई) और पूर्व क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन नयेफ को दोनों के बीच हुई बातचीत लीक होने के बाद गिरफ्तार किया गया है. उनदोनों के बीच हुई बातचीत को रॉयल कोर्ट में पेश किया गया है. बताया जा रहा है रॉयल कोर्ट में पेश किए गए बातचीत के सबूत में राजपरिवार के दोनों सदस्य क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की ताजपोशी में व्यवधान पैदा करने की बातें कर रहे हैं.



क्राउन प्रिंस ने अपने खिलाफ साजिश पर करवाई गिरफ्तारी
राजपरिवार के दोनों सदस्यों की गिरफ्तारी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के कहने पर हुई है. 2007 में बिना किसी विवाद के क्राउन प्रिंस की ताजपोशी के लिए निष्ठा परिषद का गठन किया गया था. किंग की मौत या फिर उनके अक्षम होने पर इसी परिषद के जरिए क्राउन प्रिंस की ताजपोशी होती है. बताया जा रहा है कि इसी परिषद के साथ साजिश करके राजपरिवार के दो सदस्यों ने मोहम्मद बिन सलमान को किनारे लगाने की प्लानिंग कर रहे थे.

2017 में उसी परिषद ने मोहम्मद बिन सलमान को क्राउन प्रिंस घोषित किया था. उन्हें परिषद में 34 में से 31 वोट मिले थे. इसके बाद मोहम्मद बिन नयेफ का पत्ता साफ हो गया था. इसके बाद मोहम्मद बिन सलमान लगातार अपनेआप को मजबूत बनाते गए हैं. सत्ता पर उनकी पकड़ तबसे लगातार बनी हुई है.

राजपरिवार के सदस्य प्रिंस अहमद, जिन्हें गिरफ्तार किया गया है, क्राउन प्रिंस के आलोचकों में से रहे हैं. प्रिंस अहमद और मोहम्मद बिन नयेफ तख्तापलट की साजिश रचने के गंभीर आरोपों का सामना कर रहे हैं. हालांकि रियाद में सोमावर को कहा गया कि इतने संगीन आरोप लगाने से बचना चाहिए.

गार्जियन के हवाले से कहा जा रहा है कि प्रिंस अहमद के निष्ठा परिषद का चेयरमैन बनाने की कोशिश चल रही थी. फिलहाल इस पद पर कोई भी आसीन नहीं है. ये पद खाली है. अगर प्रिंस अहमद इस पद को पा जाते तो उनकी भूमिका अहम हो जाती.

सऊदी अरब के राजपरिवार में सत्ता हासिल करने को लेकर साजिश
इस बात को लेकर अब तक चर्चा जारी है कि राजपरिवार के सदस्य किस तरह से तख्तापलट की साजिश रच रहे थे. इतना ही नहीं इस बात की अफवाह ने भी जोर पकड़ लिया था कि किंग सलमान की सेहत बिगड़ती जा रही है और उनकी जगह उनके बेटे गद्दी संभाल सकते हैं.

हालांकि रविवार को सऊदी किंग अपने डिप्लोमैट्स से मिलते दिखे. किंग सलमान की तस्वीरें मीडिया में छाई रहीं. उनके समर्थकों की तरफ से कहा जा रहा है कि नवंबर में रियाद में होने वाले जी 20 समिट से पहले किंग सलमान अपना पद छोड़ने नहीं जा रहे हैं. कुछ पश्चिमी अधिकारियों, जिन्होंने 84 साल के किंग से पिछले दिनों मुलाकात की थी. उनके हवाले से कहा जा रहा है कि किंग पिछले दो वर्षों में कुछ बदल गए हैं. अब वो ज्यादा स्पष्ट और केंद्रित नजर आते हैं.

राजपरिवार के दो सदस्यों आतंरिक मंत्री अब्दुल अजीज बिन सौद औक सौद अल नायेफ, जिन्हें शुक्रवार को गिरफ्तार किया गया था, उन्हें रविवार को पूछताछ के बाद छोड़ दिया गया. हालांकि कहा जा रहा है कि अभी भी राजपरिवार के कई सदस्य हिरासत में हैं. मोहम्मद बिन सलमान ने सत्ता पर अपनी मजबूत पकड़ बनाने के लिए अपने दुश्मनों का निर्दयता से सफाया किया है. हालांकि सऊदी अरब में सांस्कृतिक सुधार के कार्यक्रमों को चलाने और महिलाओं की समाज में ज्यादा भागीदारी देने की वजह से उनकी प्रशंसा होती है. लेकिन यूरोप के कई देश उनकी आलोचना भी करते हैं.

2018 में वाशिंगटन पोस्ट के स्तंभकार जमाल खशोगी की हत्या वाले मामले ने क्राउन प्रिंस को बदनाम किया है. लोग उनके नेतृत्व और फैसले लेने के कौशल को लेकर सवाल खड़े कर रहे हैं.

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