पाकिस्तान में खपत के मुकाबले कम हुआ चीनी का उत्पादन, 3,00,000 मीट्रिक टन आयात करेगा

पाकिस्तान में खपत के मुकाबले कम हुआ चीनी का उत्पादन, 3,00,000 मीट्रिक टन आयात करेगा
पाकिस्तान में इस साल चीनी का उत्पादन कम हुआ है

पाकिस्तान के वित्तीय मंत्रालय ने कहा कि देश में चीनी के उपभोग (Consumption of Sugar) के मुकाबले उत्पादन कम (Less Production) होने के चलते यह फैसला लिया गया है. वित्तीय सहयोग समिति ने मंत्रालय के इस फैसले को मंजूरी दे दी है.

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इस्लामाबाद. पाकिस्तान ने 3,00,000 मीट्रिक टन चीनी आयात (Sugar Import) करने की अनुमति दी है. पाकिस्तान के वित्तीय मंत्रालय ने कहा कि देश में चीनी के उपभोग (Consumption of Sugar) के मुकाबले उत्पादन कम (Less Production) होने के चलते यह फैसला लिया गया है. वित्तीय सहयोग समिति (Economic Coordination Committee) ने मंत्रालय के इस फैसले को मंजूरी दे दी है. ईसीसी पाकिस्तान की शीर्ष संस्था है जो वित्तीय प्रबंधन संबंधी कठिन फैसले लेता है.

बफर स्टॉक मेंटेन रखने के लिए आयात की जा रही है चीनी

मंत्रालय ने बयान जारी करके कहा कि उद्योग और उत्पादन मंत्रालय के रिफाइंड शुगर के आयात के प्रस्ताव पर ईसीसी ने विचार किया ताकि पाकिस्तान ट्रेडिंग कॉरपोरेशन चीनी के बफर स्टॉक को मेंटेन रख सके. यही वजह है कि ईसीसी ने 3,00,000 मीट्रिक टन व्हाइट शुगर आयात करने की इजाजत दे दी है.



चीनी का भाव प्रति किलो 90 रुपये तक पहुंच गया था
पाकिस्तान में चीनी के उत्पादन कम होने के चलते चीनी के आयात की इजाजत दी गई गई. चालू मार्केटिंग ईयर 2019-20 आगामी 30 सितंबर को समाप्त हो जाएगा और यह अनुमान लगाया कि चीनी की खपत के मुकाबले चीनी का उत्पादन कम रह रहा है. पिछले कुछ महीने से चीनी के भाव में बहुत ज्यादा उछाल देखा जा रहा है. चीनी के भाव प्रति किलो 90 रुपये तक चले गए थे और चीनी के व्यापारियों ने अरबों की कमाई की.

चीनी का दाम बढ़ाकर 100 अरब से ज्यादा का मुनाफा कमाया

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान सरकार ने एक खोजी रिपोर्ट को मई में सार्वजनिक किया था और यह पाया था कि चीनी मिल के मालिकों ने शुगर के भाव में उछाल का फायदा उठाकर 100 अरब से ज्यादा रुपयों का मुनाफा कमाया. इस रिपोर्ट में यह बात भी सामने आई कि चीनी मिल उत्पादन का लागत कम करने के नाम पर सरकार से सब्सिडी भी लेते हैं. चीनी मिल मालिक स्टॉक बढ़ाते हैं और किसानों का शोषण करते हैं.

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इस रिपोर्ट में कैबिनेट मंत्रियों का हवाला दिया गया और यह कहा गया है कि पीएम इमरान खान ने चीनी उद्योगों को भाव करने के आदेश दिया है. इमरान ने वर्ष 2018 में जब सरकार बनाई थी तब चीनी के भाव 54 रुपये प्रति किलो थे. विपक्षी दलों का कहना है कि पीएम अपने सहयोगियों को मदद करने का कोई दूसरा तरीका निकालेंगे. इस आरोप को सरकार ने सिरे से खारिज कर दिया है. इस बीच वित्त मंत्रालय ने एक समिति का गठन किया है और वह चीनी की खरीद का क्या तरीका होगा, उसे तय करने में जुटी है.
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