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जम्मू-कश्मीर गए यूरोपीय नेताओं के बारे ये बात जानते हैं आप?

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Updated: October 29, 2019, 12:38 PM IST
जम्मू-कश्मीर गए यूरोपीय नेताओं के बारे ये बात जानते हैं आप?
27 यूरोपीय सांसदों का प्रतिनिधिमंडल दो दिन के कश्मीर दौरे पर है.

कश्मीर (Kashmir) जाने वाले यूरोपीय सांसदों (EU Pannel) की टीम में इटली के फल्वियो मार्तुसीलो, यूके के डेविड रिचर्ड बुल, इटली की गियाना जेनिसा, फ्रांस की जूली लिचेनटेक्स, चेक रिपब्लिक के टॉमस ज़ेकोवस्की, स्लोवाकिया के पीटर पोलाक और जर्मनी के निकोलस फेस्ट शामिल हैं.

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  • Last Updated: October 29, 2019, 12:38 PM IST
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श्रीनगर. जम्मू-कश्मीर (Jammu Kashmir) में आर्टिकल 370 (Article 370) हटने के करीब तीन महीने बाद यूरोपीय सांसदों का एक डेलीगेशन कश्मीर के अनौपचारिक दौरे पर है. 5 अगस्त को कश्मीर से विशेष राज्य का दर्जा छिनने के बाद ये किसी विदेशी दल का पहला घाटी दौरा है. इन 27 सांसदों में से कम से कम 22 दक्षिणपंथी या धुर दक्षिणपंथी विचारधारा वाले हैं. ऐसे में इन विदेशी सांसदों को कश्मीर जाने की परमिशन देने के बाद मोदी सरकार विपक्ष के निशाने पर आ गई है. कांग्रेस नेता राहुल गांधी, पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा, बीएसपी सुप्रीमो मायावती, एआईएमआईएम चीफ असदुद्दीन ओवैसी, सीपीआई नेता सीताराम येचुरी, राज्य की पूर्व सीएम महबूबा मुफ्ती समेत अन्य राजनीतिक दलों के नेताओं ने केंद्र सरकार की मंशा पर सवाल खड़े किए हैं.




EU डेलीगेशन में शामिल हैं ये नेता

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कश्मीर जाने वाले यूरोपीय सांसदों की टीम में इटली के फल्वियो मार्तुसीलो, यूके के डेविड रिचर्ड बुल, इटली की गियाना जेनिसा, फ्रांस की जूली लिचेनटेक्स, चेक रिपब्लिक के टॉमस ज़ेकोवस्की, स्लोवाकिया के पीटर पोलाक और जर्मनी के निकोलस फेस्ट शामिल हैं.

कश्मीर पर मोदी सरकार के फैसले का कर चुके हैं समर्थन
टॉमस ज़ेकोवस्की ने यूरोपीय संसद के मासिक पत्रिका में जम्मू-कश्मीर में मोदी सरकार के फैसले का समर्थन करते हुए एक आर्टिकल लिखा था. उन्होंने कहा था कि आर्टिकल 370 हटने से राज्य में आतंकवाद को खत्म करने में मदद मिलेगी. हालांकि, बाद में उन्होंने दावा किया था कि इस आर्टिकल को लेकर उन्हें पाकिस्तान से जान की धमकियां भी मिलीं.

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भारत की अनौपचारिक यात्रा पर आए यूरीपीय नेताओं के साथ पीएम मोदी


वहीं, इस डेलीगेशन में पोलैंड के जनप्रतिनिधि रिशर्ड सरनेस्की का नाम भी है. इन्हें यूरोपियन यूनियन के वाइस प्रेसिडेंट पद से बर्खास्त कर दिया गया था. फरवरी 2018 में एक राजनेता पर नाज़ीवादी अभद्र टिप्पणी करने के आरोप में उनपर ये कार्रवाई हुई थी. रिशर्ड सरनेस्की नाज़ी समर्थक माने जाते हैं.

डेलीगेशन के 22 सदस्य दक्षिणपंथी विचारधारा के समर्थक
प्रतिनिधिमंडल के कुल 27 सदस्यों में से 22 दक्षिणपंथी समर्थक के तौर पर जाने जाते हैं. इन सदस्यों में वे नेता शामिल हैं जो इटली में परदेसियों के बसने के विरोधी हैं. ये सांसद यूके में ब्रेक्जिट का समर्थन करते हैं और कुछ सदस्य तो मुस्लिम विरोधी विचारधारा के भी हैं.

वहीं, ईयू डेलीगेशन में शामिल इटली के फल्वियो मार्तुसीलो, गियाना जेनिसा समेत कुछ सदस्य कई मौकों पर प्रवासियों के विरोध में आवाज़ बुलंद कर चुके हैं. इसके अलावा अन्य सदस्य भी इस्लाम विरोधी बताए जाते हैं.


कश्मीर में क्या करेगी विदेशी सांसदों की टीम
बता दें कि 27 यूरोपीय सांसदों का प्रतिनिधिमंडल दो दिन के कश्मीर दौरे पर है. इस दौरान ये सांसद आर्टिकल 370 हटने के बाद जमीनी हकीकत का जायजा लेंगे. वहीं जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिव सांसदों के लिए डिनर का भी इंतजाम कर रहे हैं. EU सांसदों की टीम जम्मू-कश्मीर जाने के बाद दो हिस्सों में बंटेगी. इसमें पहली टीम राज्यपाल, एडवाइज़र्स से मुलाकात करेगी, इसके साथ ही चुने हुए प्रतिनिधियों से भी मुलाकात होगी. जहां पर वह स्थानीय निवासियों और DC से मुलाकात करेंगे. दोनों ही टीम श्रीनगर की मशहूर डल लेक भी जाएगी. इस पूरे दौरे को एक यूरोपियन NGO द्वारा आयोजित किया जा रहा है. इसमें अधिकतर इटालियन मेंबर हैं.

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यूरोपीय सांसदों की टीम से मिलते पीएम मोदी.


विदेशी सांसदों के दौरे पर विपक्ष के नेताओं ने उठाए सवाल
यूरोपियन यूनियन सांसदों के कश्मीर दौरे पर कांग्रेस समेत कई राजनीतिक दलों ने सवाल खड़े किए हैं. कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि एक तरफ सरकार विदेशी सांसदों को कश्मीर जाने की परमिशन दे रही है, दूसरी ओर भारतीय सांसदों को रोक रही है. वहीं, राज्य की पूर्व सीएम महबूबा मुफ्ती ने ट्वीट किया, 'विदेशी सांसदों का ये दौरा ऐसे समय पर हो रहा है, जब कश्मीर में बोर्ड परीक्षाएं शुरू होनी हैं, जिसमें 60 हजार बच्चे शामिल होंगे. सरकार इसे नॉर्मल बता रही है.'

कांग्रेस प्रवक्ता आनंद शर्मा ने कहा, 'पार्टी इस मुद्दे को संसद में उठाएगी. क्योंकि, ये दौरा भारतीय सांसदों के विशेषाधिकार का उल्लंघ है. मोदी सरकार ने विदेशी सांसदों को कश्मीर जाने की इजाजत देकर भारत के संसद की संप्रभुता का असम्मान किया है.'

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EU सांसदों की टीम जम्मू-कश्मीर जाने के बाद दो हिस्सों में बंटेगी.


इसके अलावा एआईएमआईएम चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने कहा, 'यूरोपीय संसद के सांसद जो इस्लामोफोबिया के शिकार हैं, कश्मीर दौरे के लिए उनका चुनाव किया गया है. ऐसे लोग मुस्लिम बहुल घाटी जा रहे हैं.' ओवैसी ने दल में शामिल सांसदों को नाजी लवर भी बताया है. यहां तक कि बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने भी सरकार के इस कदम का विरोध किया है.


कश्मीर में लगी है ये पाबंदियां
बता दें कि भारत सरकार ने जम्मू-कश्मीर पर 5 अगस्त को ऐतिहासिक फैसला लेते हुए अनुच्छेद 370 को कमजोर कर दिया. इस अनुच्छेद के एक प्रावधान को छोड़कर बाकी सभी को खत्म कर दिया गया है. इसके बाद से जम्मू-कश्मीर को मिलने वाले सभी विशेषाधिकार वापस ले लिए गए. 31 अक्टूबर से जम्मू-कश्मीर और लद्दाख दो अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेश बन जाएगा. अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद से ही जम्मू-कश्मीर में कई तरह की पाबंदियां लगाई गई थीं, जैसे कि हजारों की संख्या में सुरक्षाबलों की तैनाती, स्थानीय नेताओं को नज़रबंद रखना, फोन-इंटरनेट की सुविधा को बंद कर देना. धीरे-धीरे सरकार कुछ इलाकों से प्रतिबंध हटा रही है, जबकि कुछ इलाकों में अभी भी बैन लागू है.

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First published: October 29, 2019, 11:51 AM IST
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