SC ने केंद्र से कहा, कोरोना से बचाव के लिए लोगों पर केमिकल छिड़काव को लेकर 1 महीने के भीतर जारी करें निर्देश

फाइल फोटोः सुप्रीम कोर्ट ने लोगों पर केमिकल छिड़काव को लेकर 1 महीने के भीतर निर्देश जारी करने को कहा है.
फाइल फोटोः सुप्रीम कोर्ट ने लोगों पर केमिकल छिड़काव को लेकर 1 महीने के भीतर निर्देश जारी करने को कहा है.

सुप्रीम कोर्ट ने कोरोना वायरस (Coronavirus) से बचाव के लिए बनाए जा रहे डिसइंफेक्शन टनल, लोगों पर किए जा रहे रासायनिक छिड़काव पर तत्काल प्रतिबंध लगाने को लेकर निर्देश जारी करने के लिए केंद्र को 1 महीने का समय दिया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 5, 2020, 11:00 PM IST
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नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने गुरुवार को केंद्र से कहा कि कोरोना वायरस (Coronavirus) से निपटने के लिए लोगों पर रोगाणुनाशक छिड़काव और अल्ट्रा वायलट किरणों का इस्तेमाल बैन करने के बारे में एक महीने के भीतर निर्देश जारी करे.

कोर्ट ने रोगाणुओं से मुक्त करने के लिये बनाये जा रहे टनल के प्रयोग, लोगों पर रासायनिक छिड़काव एवं उसके उत्पादन पर तत्काल प्रतिबंध लगाने के लिये गुरसिमरन सिंह नरूला की जनहित याचिका पर सरकार को यह निर्देश दिया. कोर्ट ने कहा कि लोगों पर कृत्रिम परागामी किरणें डालना प्रतिबंधित करने के बारे में भी इसी तरह के निर्देश जारी किये जायें.

न्यायमूर्ति अशोक भूषण, न्यायमूर्ति आर सुभाष रेड्डी और न्यायमूर्ति एम आर शाह की पीठ ने अपने फैसले में कहा कि हालांकि सरकार ने इस पर परामर्श जारी किया था, जिसमें कहा गया था कि कोविड-19 (COVID-19) के रोगाणुओं से मुक्त करने के लिए मनुष्य पर अल्ट्रा वायलट किरणों के इस्तेमाल की सलाह नहीं दी जाती है, लेकिन इसके बाद इसकी रोकथाम के लिये आगे कोई कदम नहीं उठाये गये थे.



पीठ ने कहा कि जनता के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुये जरूरी है कि यह कवायद एक महीने के भीतर पूरी की जाये.
पीठ ने अपने 37 पेज के फैसले में कहा, ‘‘हमारा विचार है कि मानव शरीर पर रोगाणुनाशक रसायन का छिड़काव या धुआं छोड़ना या परागामी किरणों के प्रयोग को नियंत्रित करने की जरूरत है, जब केन्द्र का स्वयं का मानना है कि इसके उपयोग की सलाह नहीं है.

कोर्ट ने कहा कि केन्द्र आपदा प्रबंधन कानून, 2005 के तहत प्रदत्त अधिकार का इस्तेमाल करके रोगाणुनाशक टनल से छिड़काव या रासायनिक धुआं छोड़ने को नियंत्रित या प्रतिबंधित करने के लिये आवश्यक निर्देश जारी करने पर विचार कर सकता है.

शीर्ष कोर्ट ने कहा कि अगर मानव शरीर पर रोगाणुनाशकों का उपयोग प्रतिकूल असर डालता है तो इसके लिये तत्काल उपचारात्मक कार्रवाई की जरूरत है और अधिकारी यह कह कर इतिश्री नहीं मान सकते कि इसके उपयोग की सलाह नहीं दी जाती है.

कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई के दौरान सात सितंबर को केन्द्र से सवाल किया था कि कोविड-19 के दौरान रोगाणुओं से मुक्त करने वाले रसायन का लोगों पर छिड़काव हानिकारक होने के बावजूद उसने अभी तक रोगाणुओं से मुक्त करने वाले टनल के प्रयोग पर प्रतिबंध क्यों नहीं लगाया है.

केन्द्र ने नौ जून को कोर्ट को बताया था कि स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक की अध्यक्षता में विशेषज्ञ समिति की बैठक में रोगाणुओं से मुक्ति के लिये रसायन का छिड़काव करने वाले टनल बनाना और उनका छिड़काव करना या उनके धुएं से मनुष्य पर पड़ने वाले प्रभावों की समीक्षा की गयी थी.

केन्द्र ने कहा था कि विशेषज्ञ समिति ने इस बात को दोहराया है कि इस तरह के टनल, चौखट या चैंबर्स के माध्यम से लोगों पर रसायन का छिड़काव उपयोगी नहीं है और यह संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने या संक्रमण की छोटी छोटी बूंदे इसके प्रसार की क्षमता कम नहीं करता है.
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