अस्पतालों में हुई बच्चों की अदलाबदली, 80 साल तक दोनों दूसरे परिवारों में रहे

अस्पतालों में हुई बच्चों की अदलाबदली, 80 साल तक दोनों दूसरे परिवारों में रहे
प्रतीकात्मक तस्वीर

अमरीका (America)में एक बहुत हैरान करने वाली घटना का पता चला. दो लोगों ने दावा किया है कि 80 साल पहले जिस अस्पताल में उनका जन्म हुआ था, वहां उन दोनों को आपस में बदल (Children Exchange With Eache Other) दिया गया था.

  • News18Hindi
  • Last Updated: June 10, 2020, 10:35 PM IST
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वेस्ट वर्जीनिया. अमेरिका (America)में एक बहुत हैरान करने वाली घटना का पता चला. दो लोगों ने दावा किया है कि 80 साल पहले जिस अस्पताल में उनका जन्म हुआ था, वहां उन दोनों को आपस में बदल (Children Swapping ) दिया गया था. जॉन विलियम कार्र III और जैकी ली स्पेंसर का जन्म 29 अगस्त 1942 को बकेनन के सेंट जोसफ अस्पताल में हुआ था. इस अदलाबदली के बारे में राज तब खुला जब पिछले साल दोनों के डीएनए (DNA Not Matched) उन्हें पालने वाले परिवारों के साथ मैच नहीं हुए बल्कि दोनों के डीएनए एक दूसरे के परिवारों के साथ मिल गए. यह बात उन दोनों द्वारा दायर किये मुकदमे के दौरान बताई. दोनों ने वेस्ट वर्जीनिया के एक रोमन कैथोलिक अस्पताल पर लापरवाही और कर्तव्य भंग का आरोप लगाते हुए मुकदमा दायर किया है.

कार्र और स्पेंसर ने कहा कि उन्हें और उनके परिवारों को इस अदलाबदली से जिंदगी भर का दुःख भोगना पड़ा है और वे कोर्ट से अनिर्दिष्ट क्षति की मांग करते हैं. चर्च के प्रवक्ता टीम बिशप ने कहा कि बिशप क्षेत्र इस मुकदमेबाजी पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहता है.

50 साल से ज्यादा समय पिता की खोज में स्पेंसर ने लगा दिए



स्पेंसर ने बताया कि अपने जन्म प्रमाण पत्र में लिखित उसके पिता की खोज में उसने 50 से अधिक साल लगा दिए. उन्हें बताया गया था कि उस आदमी ने उनके जन्म से पहले उनकी माँ को छोड़ दिया था. अपने तथाकथित पिता के रिश्तेदारों को खोजने के बाद स्पेंसर ने यह देखने के लिए डीएनए परीक्षण करवाया कि क्या वह उस परिवार से संबंधित है और वह जानकर बहुत हैरान हुआ कि वह उनके परिवार का हिस्सा नहीं था. बाद में डीएनए टेस्ट से यह पता चला कि वह वास्तव में कार्र के परिवार से संबंधित था और आगे की छानबीन में यह पता चला कि कार्र का जन्म भी उसी दिन सेंट जोसेफ में हुआ था.
'परिवार से अलग रंग की आंखों की वजह से हुई परेशानी'

स्पेंसर और उनकी पत्नी ने कार्र से संपर्क किया और इन्हें बताया कि वे उन लोगों के सम्बंधित थे जिन्हे स्पेंसर अपना परिवार मानते आये थे. मुकदमे के दौरान स्पेंसर ने दुःख जताते हुए कहा कि वे अपने आखिरी दिनों में हैं और वे आजतक अपने परिवार के सदस्यों को नहीं मिल पाए. कार्र ने भी अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि उनकी आँखें नीली थी जो उन्हें पालने वाले परिवार से बिलकुल अलग थीं. उनके माता पिता और उनके भाई बहनों के बाल और आँखें भूरी थी और वे कार्र से बिलकुल अलग दिखते थे जिस कारण वे जीवन में कभी भी परिवार के साथ सहज नहीं रह पाए.

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