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पाकिस्तान के साथ सैन्य अभ्यास पर चीन ने कहा- भारत परेशान न हो, ये किसी के खिलाफ नहीं

इमरान खान और शी जिनपिंग (तस्वीर-News18.com)
इमरान खान और शी जिनपिंग (तस्वीर-News18.com)

India-China Standoff: चीन ने पाकिस्तान के साथ सिंध में जारी सैन्य अभ्यास पर भारत को सकारात्मक रुख अख्तियार करने की सलाह दी है. चीन ने कहा कि ये किसी भी तीसरे देश के खिलाफ नहीं है बल्कि दोनों देशों के बीच सैन्य सहयोग मजबूत करने के लिए है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 22, 2020, 12:21 PM IST
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बीजिंग. चीन (China) ने पाकिस्तान (Pakistan) की वायुसेना के साथ उसकी वायुसेना के चल रहे संयुक्त अभ्यास (Air force drills) का सोमवार को यह कहते हुए बचाव किया कि ये अभ्यास किसी तीसरे देश के विरूद्ध नहीं है और भारत को उसे वस्तुनिष्ठता के साथ देखना चाहिए. चीन और पाकस्तान की वायुसेनाएं पाकिस्तान के दक्षिणी सिंध प्रांत में दिसंबर के दूसरे सप्ताह से अपना वार्षिक अभ्यास ‘शाहीन (ईगल)-नवम’ कर रही हैं. इस अभ्यास से पहले हाल ही चीन के रक्षा मंत्री जनरल वी फेंघे ने पाकिस्तान की यात्रा की थी जिस दौरान दोनों सर्वकालिक सहयोगियों ने नये सहमति ज्ञापन पर हस्ताक्षर किये थे.

चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वांग वेनबिन से जब यहां यहां मीडिया ब्रीफिंग के दौरान सवाल किया गया कि दोनों वायुसेनाओं के बीच के संयुक्त अभ्यास का लक्ष्य भारत को एक संदेश देना तो नहीं हैं, तब उन्होंने कहा, 'सर्वकालिक रणनीतिक साझेदारों के तौर पर चीन और पाकिस्तान के बीच दोस्ताना विनिमय है और राजनीति, अर्थव्यवस्था, सेना एवं सुरक्षा समेत विविध क्षेत्रों के बीच सहयोग है.' उन्होंने कहा, 'हम साथ मिलकर क्षेत्रीय और स्थायित्व बनाये रखने के लिए कटिबद्ध है. प्रासंगिक सहयोग दोनों सेनाओं के बीच दोनों सेनाओं के बीच नियमित व्यवस्था है.' वांग ने बिना भारत का नाम लिये कहा, ;यह किसी तीसरे देश के विरूद्ध नहीं है. हम आशा करते हैं कि प्रासंगिक पक्ष (भारत) इसे वस्तुनिष्ठ तरीके से इसे देख पाए.' चीन की सेना ने पहले कहा था कि संयुक्त वायुसेना अभ्यास दोनों सेनाओं के बीच 2020 की सहयोग योजना के तहत परियोजना है. पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा संयुक्त अभ्यास को देखने के लिए शुक्रवार को वायुसेना अड्डे पर गये थे.

भारत भी बना रहा है प्लान!
लद्दाख और दक्षिण चीन सागर में चीन के आक्रामक व्‍यवहार का जोरदार तरीके से सामना कर रहे भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वियतनाम के प्रधानमंत्री नगुएन शुआन फूक सोमवार को वर्चुअल बैठक की इस बैठक में दोनों देशों के बीच भारत में बने 10 करोड़ डॉलर के गश्‍ती पोतों पर समझौता के बारे में बातचीत हुई. इस दौरान चीन की बढ़ती आक्रामकता के संबंध में व्ही चर्चा हुई. अंतरराष्‍ट्रीय मामलों के विशेषज्ञों का कहना है कि चीन लगातार साउथ चाइना सी में युद्धाभ्‍यास करके भले ही अमेरिका को संदेश रहा है लेकिन इसका असर अब उसके पड़ोसी देशों पर भी पड़ रहा है. इसी वजह से अब चीन की आक्रामकता का सामना कर रहा वियतनाम और भारत साथ आ रहे हैं. उन्‍होंने कहा कि ये दोनों ही देश मिलकर चीन और पाकिस्‍तान की नापाक दोस्‍ती को करारा जवाब दे सकते हैं.
वियतनाम भी चीन से नाराज़


चीन ने दक्षिण चीन सागर में वियतनाम से सटे वूडी द्वीप पर अपना बेहद घातक बमवर्षक विमान एच-6 जे तैनात किया है और इससे वियतनाम काफी खफा है. वियतनाम ने कहा कि यह बॉम्‍बर न केवल वियतनाम की संप्रभुता का उल्‍लंघन है, बल्कि क्षेत्र में शांति के लिए संकट पैदा कर सकता है. बताया जा रहा है कि पिछले दिनों वियतनाम के राजदूत फाम सान्‍ह चाउ ने भारतीय विदेश सचिव हर्ष वर्द्धन श्रृंगला से मुलाकात करके साउथ चाइना सी में बढ़ते तनाव के बारे में बताया था. वियतनाम चीन के खिलाफ राजनीतिक समर्थन जुटाना चाहता है. वियतनाम के विदेशी मामलों के जानकार हूयंच ताम सांग ने कहा कि भारत के साथ संपर्क साधकर वियतनाम ने यह दिखा दिया है कि उसे भारत का न केवल समर्थन हासिल है बल्कि वह खुद भी साउथ चाइना सी में मुक्‍त आवागमन के भारत के मांग का समर्थन करता है.

भारत-वियतनाम दोस्‍ती है जवाब
सांग ने कहा कि भारत और वियतनाम के बीच रक्षा संबंधों की मजबूती ठीक समय पर चीन को संदेश देगा. अमेरिका की रक्षा मंत्रालय में शोधकर्ता मोहन मलिक कहते हैं कि भारत और‍ वियतनाम की दोस्‍ती चीन और पाकिस्‍तान के रिश्‍ते का जवाब है. उन्‍होंने कहा कि जिस तरह से चीन और पाकिस्‍तान भारत के खिलाफ आपस में समन्‍वय करते हैं और सैन्‍य कदम उठाते हैं, उसी तरह से नई दिल्‍ली और हनोई एक-दूसरे को ड्रैगन के खिलाफ जानकारी देने लगे हैं. जिस तरह से पाकिस्‍तान चाहता है कि चीन हिंद महासागर में अपनी मजबूत सैन्‍य उपस्थिति करे, उसी तरह से वियतनाम चाहता है कि भारतीय नौसेना साउथ चाइना सी में अपनी उपस्थित‍ि बढ़ाए.



भारत और वियतनाम दोनों ही रूसी हथियारों पर काफी हद तक निर्भर हैं. इस क्षेत्र में वे आपस में मदद कर सकते हैं. मोहन मलिक कहते हैं कि भारत और वियतनाम आपस में चीनी नेवी के बारे में खुफिया सूचनाओं का आदान-प्रदान करके एक दूसरे की मदद कर सकते हैं. भारत वियतनाम के तेल क्षेत्र में मदद कर रहा है. भारत दक्षिण चीन सागर में तेल और गैस निकालने में अपनी भूमिका को और ज्‍यादा बढ़ा सकता है.
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