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Afghanistan Crisis: काबुल के बेहद करीब पहुंचा तालिबान, अमेरिका ने दूतावास से खुफिया कागज मिटाने को कहा

Afghanistan Crisis: काबुल के बेहद करीब पहुंचा तालिबान, अमेरिका ने दूतावास से खुफिया कागज मिटाने को कहा

तालिबान के लड़ाके अफगानिस्तान की राजधानी काबुल से महज 50 किलोमीटर की दूरी पर हैं. (AP)

तालिबान के लड़ाके अफगानिस्तान की राजधानी काबुल से महज 50 किलोमीटर की दूरी पर हैं. (AP)

Afghanistan Crisis: काबुल से हजारों लोगों को एयरलिफ्ट करने की तैयारी कर रहे अमेरिका ने कहा है कि विद्रोही अफगानिस्तान की राजधानी को अलग-थलग करने की कोशिश में लगे हुए हैं.

    वॉशिंगटन. अफगानिस्तान में तालिबान (Taliban) को लेकर काबुल (Kabul) की ओर बढ़ रहा है. इस बीच अमेरिका के रक्षा विभाग ने कहा है कि राजधानी किसी ‘आसन्न खतरे’ या आने वाले खतरे का सामना नहीं कर रही है. काबुल से हजारों लोगों को एयरलिफ्ट करने की तैयारी कर रहे अमेरिका ने कहा है कि विद्रोही राजधानी शहर को अलग-थलग करने की कोशिश में लगे हुए हैं. तालिबान ने अफगानिस्तान के बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया है. खबर है कि विद्रोही काबुल से महज 50 किलोमीटर की दूरी पर हैं. तालिबान ने एक दिन पहले ही लोगर प्रांत की राजधानी पुल-ए-अलम को अपने कब्जे में ले लिया है.

    वहीं अमेरिका ने अपने दूतावास के कर्मचारियों को संवेदनशील सामग्री को नष्ट करने के लिए कहा है. आदेश में कहा गया है, ‘कृपया दूतावास या एजेंसी के लोगों, अमेरिकी झंडे या उन सामानों को भी नष्ट कर दें, जिनका प्रोपेगैंडा फैलाने के लिए गलत इस्तेमाल किया जा सकता है.’ उधर संयुक्त राष्ट्र भी अफगानिस्तान की स्थिति पर बारीकी से नजर बनाए हुए है. यूएन के प्रवक्ता ने कहा, ‘फिलहाल संयुक्त राष्ट्र के स्टाफ को निकालने का काम नहीं चल रहा है, लेकिन यूएन ने अफगानिस्तान के दूसरे सबसे बड़े शहर कंधार और तीसरे बड़े शहर हेरात समेत अपना स्टाफ कम कर दिया है.’

    यह भी पढ़ें: तालिबान की भारत को खुली चेतावनी- ‘अफगानिस्तान में सेना भेजी तो अच्छा नहीं होगा’

    ‘लचीलापन नहीं दिखा रहा काबुल’
    समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में तालिबान के प्रवक्ता सुहैल शाहीन ने कहा, ‘हम काबुल से बातचीत की उम्मीद करते हैं. शांतिपूर्ण हल तक पहुंचने के लिए उन्होंने आगे आना चाहिए और लचीलापन दिखाना चाहिए, क्योंकि हमारे लोगों को इसकी जरूरत है. हम उम्मीद करते हैं कि ऐसा जल्दी होगा, लेकिन प्रक्रिया धीमी बनी हुई है.’ उन्होंने कहा, ‘पहली बात तो यह कि वह पक्ष हल तक पहुंचने और लचीलापन दिखाने में अनिच्छुक है. हमारे बंदियों को रिहा करने और हमारी ब्लैकलिस्ट हटाने में कुछ परेशानियां हैं, जो दोहा समझौते में साफ लिखी हुई हैं. यह भरोसा कायम करने का बेहद जरूरी उपाय है.’

    इस दौरान उन्होंने दावा किया है कि प्रांत अपने आप उनके कब्जे में आ रहे हैं. साथ ही उन्होंने कहा कि तालिबान के पक्ष से कोई हिंसा नहीं की जा रही है. शाहीन ने कहा, ‘हम प्रांतीय केंद्रों को ले रहे हैं और इलाके खुद हमारे पास आ रहे हैं. वे इच्छा से हमारे कब्जे में आ रहे हैं. आप सुरक्षाबलों के सैकड़ों और हजारों वीडियो देख सकते हैं. यह सच है कि वे हमारे पक्ष में आ रहे हैं और जुड़ रहे हैं, लेकिन वे हिंसा के कारण हमारे साथ नहीं आ रहे.’

    प्रवक्ता ने कहा, ‘मासूम लोगों के साथ हिंसा और हत्या काबुल प्रशासन की तरफ से की जा रही है और हम इसकी निंदा करते हैं. हम क्यों हमारे लोगों से हिंसा बढ़ाने के लिए कहेंगे. जबकि, यह हम हमारी नीति के विपरीत है.’ इस दौरान शाहीन ने तालिबान के तार पाकिस्तान के आतंकी संगठनों से जुड़े होने की बात से इनकार किया है. साथ ही उन्होंने कहा कि अफगान की जमीन का इस्तेमाल भारत समेत किसी भी देश के खिलाफ नहीं होगा.

    Tags: Afghanistan Crisis, Kabul, Taliban, United States

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