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तालिबान ने दिया काम के बदले गेहूं का ऑफर, UN बोला-विकट होगा खाद्य सकंट

तालिबान ने दिया काम के बदले गेहूं का ऑफर, UN बोला-विकट होगा खाद्य सकंट

अफगानिस्तान विकट खाद्य संकट की तरफ बढ़ रहा है. (सांकेतिक तस्वीर)

अफगानिस्तान विकट खाद्य संकट की तरफ बढ़ रहा है. (सांकेतिक तस्वीर)

Food Crisis in Afghanistan: तालिबान की सरकार आने के बाद अफगानिस्तान के दुर्दिन आ गए हैं. आर्थिक और मानवीय त्रासदी से ये युद्धग्रस्त देश बुरी तरह जूझ रहा है. इस बीच तालिबान ने काम के बदले अनाज जैसे कार्यक्रम की शुरुआत की है तो वहीं संयुक्त राष्ट्र ने खाद्य संकट के और गहराने की आशंका जताई है.

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    नई दिल्ली. अफगानिस्तान (Afghanistan) में आर्थिक और मानवीय त्रासदी (Humanitarian Crisis) दिन-ब-दिन गहराती जा रही है. संयुक्त राष्ट्र (United Nations) ने आगाह किया है कि देश में नवंबर महीने में खाद्य संकट और ज्यादा विकट (Acute Food Crisis) हो सकता है. बढ़ती बेरोजगारी के बीच तालिबान ने देश के लोगों को काम के बदले गेहूं देने का ऑफर दिया है. तालिबान ने भले ही लोगों को राहत देने के लिए ये स्कीम शुरू की है लेकिन देश इतने बुरे हालात में फंसा हुआ है कि इस प्रयास को बेहद कम माना जा रहा है.

    तालिबान प्रवक्ता जबिउल्लाह मुजाहिद ने एक प्रेस कांफ्रेंस ने बताया है कि तालिबान सरकार ने एक कार्यक्रम लॉन्च किया है जिसके तहत लोगों को काम के बदले अनाज दिया जाएगा. मुजाहिद के मुताबिक ये कार्यक्रम देश के तकरीबन सभी बड़े शहरों में चलाया जाएगा. अकेले काबुल शहर में इसके तहत 40 हजार लोगों को रोजगार मुहैया करवाने की तैयारी है.

    क्या कहती है संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट
    वहीं संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट बताती है कि अब तक करीब 1.9 करोड़ अफगान लोगों को विकट खाद्य संकट से जूझना पड़ा है. रिपोर्ट ने चेताया है कि नवंबर महीने में देश की आधी से ज्यादा आबादी के सामने विकट खाद्य संकट मौजूद होगा.

    दुनिया से मान्यता चाहता है तालिबान
    दरअसल के सितंबर की शुरुआत में अंतरिम सरकार बनाने के बाद से ही तालिबान लगातार दुनिया से मान्यता मांगने के प्रयास कर रहा है. पश्चिमी देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों द्वारा आर्थिक मदद रोके जाने के कारण अफगानिस्तान की हालत बेहद दयनीय हो गई है. हाल में तालिबान ने रूस, चीन, भारत समेत दुनिया के दस देशों से बातचीत कर ये भरोसा दिया है कि अफगानिस्तान की जमीन का इस्तेमाल आतंकवादी गतिविधियों के लिए नहीं होने दिया जाएगा.

    तालिबान लड़ाकों के भूखे मरने की आई थी रिपोर्ट
    बीते महीने न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट कहा गया था कि देश के प्रमुख शहरों के बाहर मौजूद तालिबान लड़ाकों को खाने के लिए काफी कम खाना मिल पा रहा है. वो ट्रकों में या कहीं जमीन पर सोते हैं. उनके पास रहने के लिए कोई घर नहीं है और वो किसी भी तरह से अपनी जिंदगी को बचा रहे हैं और तालिबान के पास पैसे नहीं हैं कि वो अपने लड़ाकों की मदद कर सके. रिपोर्ट में दावा किया गया था कि स्थानीय लोग तालिबान के लड़ाकों को खाने-पीने का सामान दे रहे हैं.

    Tags: Afghanistan, Taliban

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