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पंजशीर में हमले की तैयारी में तालिबान, काटीं फोनलाइंस, इंटरनेट भी बंद

पंजशीर में हमले की तैयारी में तालिबान, काटीं फोनलाइंस, इंटरनेट भी बंद

तालिबान को लगता है कि घाटी में संचार के माध्यम रोक देने से हमला करना भी आसान होगा. (AP)

तालिबान को लगता है कि घाटी में संचार के माध्यम रोक देने से हमला करना भी आसान होगा. (AP)

पंजशीर (Panjshir) की घाटी ही अफगानिस्ताम (Afghanistan) में एक ऐसा स्थान है जो तालिबान के कब्जे से मुक्त है. 20 साल पहले भी तालिबान ने पंजशीर पर कब्जा करने की कोशिश की थी उस समय भी उसे कामयाबी नहीं मिल पाई थी. अब एक बार फिर वह उसी कोशिश में जुटा हुआ है.

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    नई दिल्ली: तालिबान ने अफगानिस्तान (Afghanistan) पर अब पूरी तरह से कब्जा जमा लिया है. अब उसकी नजर पंजशीर (Panjshir) पर टिकी हुई है. कुछ दिन पहले उसने पंजशीर घाटी पर हमला करके कब्जा करने की कोशिश की थी लेकिन इस कोशिश में तालिबान के 350 से अधिक लड़ाकों को पंजशीर के जवानों ने मौत के घाट उतार दिया था. इसके अलावा पंजशीर के फाइटर्स ने कई जिलों को भी तालिबान के कब्जे से मुक्त करा दिया.

    सूत्रों की मानें तो तालिबान एक बार फिर से पंजशीर पर आक्रमण करने की तैयारी में जुटा हुआ है. उसने अब पंजशीर घाटी की सभी फोन लाइन और संचार के दूसरे माध्यमों को काट दिया है. सूत्रों ने कहा कि तालिबान ने 15 अगस्त को अफगानिस्तान में कब्जा करने के बाद अपने विरोधी दलों के बीच संचार को रोकने के लिए टेली फोन और इंटरनेट की सेवाओं को बंद कर दिया है.

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    तालिबान के कब्जे से बचा हुआ है पंजशीर
    बता दें कि पंजशीर की घाटी ही अफगानिस्तान में एक ऐसी जगह है जो तालिबान के कब्जे से मुक्त है. 20 साल पहले भी तालिबान ने पंजशीर पर कब्जा करने की कोशिश की थी उस समय भी उसे कामयाबी नहीं मिल पाई थी. अब एक बार फिर वह उसी कोशिश में जुटा हुआ है.

    अफगानिस्तान के पूर्व उप राष्ट्रपति इस समय अमरुल्ला सालेह भी पंजशीर में ही हैं और तालिबान किसी भी तरह से अमरुल्ला सालेह को पंजशीर के लड़ाकों की मदद करने से रोकना चाहता है. सूत्रों का यह भी कहना है कि तालिबान को लगता है कि घाटी में संचार के माध्यम रोक देने से हमला करना भी आसान होगा.

    तालिबान को लगता है कि पूर्व उप राष्ट्रपति पंजशीर को खुफिया जानकारी भी दे सकते हैं और पंजशीर के लोग इसका फायदा उठा सकते हैं क्योंकि वह पहले सरकार में था. वहीं पंजशीर के सूत्रों ने कहा कि तालिबान इस तरह से मनोवैज्ञानिक दबाव बनाना चाहता है. उसके इस कदम से आम नागरिकों, घाटी में आए विस्थापित लोगों और यहां चल रहे अस्पतालों पर जरूर पड़ेगा लेकिन इससे सैन्य कार्रवाई पर किसी भी तरह का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा.

    Tags: Afghanistan, ISIS, Panjshir, Taliban

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