नेपाल में राजनीतिक हलचल, ओली और प्रचंड के बीच फिर हुई बातचीत

नेपाल में राजनीतिक हलचल, ओली और प्रचंड के बीच फिर हुई बातचीत
फाइल फोटो.

नेपाल (Nepal) में मंगलवार को पीएम केपी शर्मा ओली और NCP के कार्यकारी अध्यक्ष पुष्पकमल दहल 'प्रचंड' के बीच हुई बातचीत के ब्योरे का अभी खुलासा नहीं किया गया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 25, 2020, 11:23 PM IST
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काठमांडू. नेपाल के प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली (KP Sharma Oli) और सत्तारूढ़ नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (NCP) के कार्यकारी अध्यक्ष पुष्पकमल दहल 'प्रचंड' के बीच मंगलवार को बातचीत हुई. पार्टी में जारी गतिरोध का समाधान करने के लिए छह सदस्यीय समिति द्वारा रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद यह बैठक हुई है. हालांकि, दोनों शीर्ष नेताओं के बीच बातचीत के ब्योरे का अभी खुलासा नहीं हुआ है, लेकिन पार्टी की स्थायी समिति के सदस्य गणेश शाह ने कहा कि दोनों नेता शुक्रवार को पार्टी के केंद्रीय सचिवालय की बैठक आयोजित करने पर सहमत हुए. नौ सदस्यीय इकाई दोनों शीर्ष नेताओं द्वारा बनाए गए कार्यबल की रिपोर्ट पर चर्चा करेगी. समिति ने 23 अगस्त को अपनी रिपोर्ट में सुझाव दिया था कि ओली को प्रधानमंत्री के रूप में पांच साल का कार्यकाल पूरा करने दिया जाए, जबकि पार्टी मामलों की पूरी कार्यकारी शक्ति कार्यकारी अध्यक्ष प्रचंड के पास रहे. मतभेदों को दूर करने के लिए ओली और प्रचंड के बीच इससे पहले लगभग एक दर्जन बैठकें हो चुकी हैं. प्रचंड ने ओली की भारत विरोधी टिप्पणियों को अनुचित करार देते हुए उनसे प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देने को कहा था.

एनसीपी के वरिष्ठ नेता एवं स्थायी समिति के सदस्य गणेश शाह के मुताबिक समिति ने अपनी रिपोर्ट में सुझाव दिया है कि प्रधानमंत्री ओली को पूरे पांच साल तक सत्ता में बने रहना चाहिए, जबकि प्रचंड को पार्टी के कामकाज पर पूरी कार्यकारी शक्तियां मिलनी चाहिए. उल्लेखनीय है कि ओली जब ढाई साल पहले 2018 में प्रधानमंत्री बने थे तब उनके और प्रचंड के बीच यह सहमति बनी थी कि वे प्रधानमंत्री का पद बारी-बारी से साझा करेंगे. शाह ने कहा कि समिति ने सुझाव दिया है कि पार्टी के शीर्ष नेताओं को एक व्यक्ति एक पद के सिद्धांत का पालन करना होगा और दोनों शीर्ष नेताओं के बीच समन्वय एवं सहयोग को बढ़ाना होगा. हालांकि, इस रिपोर्ट को स्थायी समिति की बैठक से अनुमोदित कराने की जरूरत है. यह बैठक इस हफ्ते बुलाये जाने की संभावना है.

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पार्टी के अंदर एकजुटता
समिति के सदस्य शंकर पोखरेल ने कहा कि इस वक्त पार्टी के अंदर एकजुटता बनाये रखने के लिये कोई अन्य रास्ता नहीं है. शाह ने कहा कि हालांकि यह देखना होगा कि समिति के सुझावों को कैसे लागू किया जाता है. पार्टी के अंदर मौजूद लोगों के मुताबिक प्रचंड के साथ शक्ति संतुलन के लिये समिति की रिपोर्ट को स्थायी समिति का अनुमोदन मिलने के शीघ्र बाद प्रधानमंत्री ओली द्वारा मंत्रिमंडल में फेरबदल करने की संभावना है. उल्लेखनीय है कि ओली और प्रचंड ने आपसी मतभेदों को दूर करने के लिये कई बैठकें की लेकिन वे नाकाम रहीं. दरअसल, प्रधानमंत्री ने एक व्यक्ति एक पद के सिद्धाांत को स्वीकार नहीं किया और बातचीत नाकाम हो गई. ओली ने प्रधानमंत्री और पार्टी के सह-अध्यक्ष, दोनों ही पदों को छोड़ने से इनकार कर दिया है. हाल ही में ओली के भारत विरोधी टिप्पणी के बाद पार्टी में अंदरूनी कलह बढ़ गया. प्रचंड सहित शीर्ष नेताओं ने ओली के प्रधानमंत्री पद से इस्तीफे की मांग की थी. वे ओली की कामकाज की निरंकुश शैली के खिलाफ हैं.
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