ईरान ने तेहरान में जनसभा करने की अमेरिकी विदेश मंत्री की पेशकश ठुकराई

विदेश मंत्री जवाद जरीफ ने कहा, माइक पोम्पियो को ईरान आने की कोई जरूरत नहीं है. जरीफ ने सलाह दी कि ईरान के पत्रकारों को अमेरिका की यात्रा करने और पोम्पियो का साक्षात्कार करने की अनुमति दी जानी चाहिए.

News18Hindi
Updated: July 31, 2019, 8:14 PM IST
ईरान ने तेहरान में जनसभा करने की अमेरिकी विदेश मंत्री की पेशकश ठुकराई
माइक पोम्पियो की ओर इशारा करते हुए ईरान के विदेश मंत्री जवाद जरीफ ने कहा कि अमेरिका के विदेश मंत्री को तेहरान आने की कोई जरूरत नहीं है.
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Updated: July 31, 2019, 8:14 PM IST
अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पियो के ईरान जाने और वहां की जनता को संबोधित करने की पेशकश को इस्लामिक देश ने खारिज कर दिया है. तेहरान ने कहा है कि यह अमेरिका की ड्रामेबाजी है. माइक पोम्पियो की ओर सीधे इशारा करते हुए ईरान के विदेश मंत्री जवाद जरीफ ने कैबिनेट की बैठक के इतर बुधवार को कहा कि अमेरिका के विदेश मंत्री को यहां आने की कोई जरूरत नहीं है.

ईरान के पत्रकारों को अमेरिका की यात्रा की दी जाए अनुमति 

जरीफ ने पोम्पियो को सलाह दी कि ईरान के पत्रकारों को अमेरिका की यात्रा करने की अनुमति दी जाए. साथ ही उनका साक्षात्कार करने के लिए वीजा देने की सलाह दी. ईरान के विदेश मंत्री ने अमेरिका पर पत्रकारों के आग्रह को खारिज करने का आरोप लगाया. पोम्पियो ने ट्वीट कर सोमवार को कहा था कि हम लोग जरीफ के अमेरिका आने से डरे हुए नहीं हैं. वह यहां बोलने के अधिकार का स्वतंत्र होकर इस्तेमाल कर सकते हैं.

क्या हो जाता अगर तेहरान के लोग पूरा सच सुन लेते - पोम्पियो 

पोम्पियो ने ईरान के शीर्ष नेता आयतुल्ला अली खामेनी का जिक्र करते हुए कहा, क्या उनके शासन में व्यवस्था इतनी खराब हो गई कि वे हमें तेहरान में बोलने भी नहीं दे सकते हैं. अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि अगर उनके लोग बिना किसी काट-छांट के पूरा सच सुन लेते तो क्या हो जाता. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले साल ईरान के साथ परमाणु कार्यक्रम पर लगाम लगाने वाले समझौते से अपने देश को अलग कर लिया था. इसके बाद ईरान पर कई प्रतिबंध लगा दिए थे. इसके बाद से अमेरिका और ईरान के बीच तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है.

अमेरिका ने कहा - हमारा लक्ष्य ईरान का व्यवहार बदलना है 

हाल के महीनों में अमेरिका ने फारस की खाड़ी में सैन्य मौजूदगी बढ़ा दी है, जबकि ईरान ने अपनी परमाणु गतिविधियों को खुलेआम बढ़ाना शुरू कर दिया है. ईरान का कहना है कि अगर यूरोपीय देश उन्हें कुछ आर्थिक राहत नहीं देते हैं तो वह लंबे समय तक 2015 के समझौतों को नहीं मान सकते हैं. ट्रंप प्रशासन ने कहा है कि उनकी नीतियों का लक्ष्य क्षेत्र में ईरान का व्यवहार बदलना है न कि वहां की सरकार को बदल देना.
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First published: July 31, 2019, 8:14 PM IST
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