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CAB में शामिल देश ने जताया विरोध, कहा- हमें पाकिस्तान सरीखे देश के साथ क्यों रखा

News18Hindi
Updated: December 12, 2019, 12:58 PM IST
CAB में शामिल देश ने जताया विरोध, कहा- हमें पाकिस्तान सरीखे देश के साथ क्यों रखा
Citizenship Amendment Bill 2019 पर अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश ने अपना विरोध दर्ज कराया है.

Citizenship Amendment Bill 2019 पर अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश ने अपना विरोध दर्ज कराया है.

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  • Last Updated: December 12, 2019, 12:58 PM IST
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नई दिल्ली. Citizenship Amendment Bill 2019 के संसद में पारित होने के बाद पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से प्रतिक्रिया आई है. तीनों देशों ने भारत के इस कदम पर आपत्ति जाहिर की है. पाकिस्तान की ओर से इमरान खान ने बयान दिया.  पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने विधेयक की कड़ी निंदा की है. खान ने ट्वीट किया नागरिकता विधेयक 'अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून के सभी नियमों और पाकिस्तान के साथ द्विपक्षीय समझौतों का उल्लंघन करता है.' उन्होंने कहा, 'यह आरएसएस की हिंदू राष्ट्र की विस्तारवादी योजना का हिस्सा है.'

इससे पहले पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने मध्य रात्रि के बाद एक बयान जारी किया. उसमें कहा, ‘हम इस विधेयक की निंदा करते हैं. यह प्रतिगामी और भेदभावपूर्ण है और सभी संबद्ध अंतरराष्ट्रीय संधियों और मानदंडों का उल्लंघन करता है. यह पड़ोसी देशों में दखल का भारत का दुर्भावनापूर्ण प्रयास है.’

दूसरी ओर अफगानिस्तान ने भी इस विधेयक पर आपत्ति जाहिर की है. अफगानिस्तान के राजदूत ने कहा कि वह ऐसा देश नहीं है जहां पर सरकार अल्पसंख्यकों के साथ भेदभाव करती हो. एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार राजदूत ताहिर कादिरी ने कहा कि हम अपने अल्पसंख्यक भाईयों का पूरा सम्मान करते हैं. संसद में उनके लिए सीटें भी रिजर्व हैं. उन्होंने कहा कि अफगानिसतान को पाकिस्तान सरीखे देशों के साथ नहीं देखा जा सकता है.

बांग्लादेश ने जताई नाराजगी

वहीं बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने भी प्रतिक्रिया दी.  बांग्लादेश के विदेश मंत्री एके अब्दुल मोमेन ने कहा कि नागरिकता (संशोधन) विधेयक से भारत की ऐतिहासिक धर्मनिरपेक्ष छवि कमजोर होगी. उन्होंने अपने देश में धार्मिक अल्पसंख्यकों को सताए जाने के आरोपों का भी खंडन किया. उल्लेखनीय है कि नागरिकता (संशोधन) विधेयक में 31 दिसंबर 2014 तक भारत में बांग्लादेश, अफगानिस्तान और पाकिस्तान से धार्मिक आधार पर सताए जाने के कारण आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदाय को भारतीय नागरिकता देने का प्रावधान है.

मोमेन ने कहा, ‘ऐतिहासिक रूप से भारत सहिष्णु देश है जो धर्मनिरपेक्षता में भरोसा करता है लेकिन यह छवि कमजोर होगी अगर वे इससे हटेंगे.' उन्होंने कहा कि भारत और बांग्लादेश के मित्रवत संबंध हैं और इसे द्विपक्षीय संबंधों का ‘‘सुनहरा अध्याय' करार दिया जाता है. इसलिए स्वभाविक है कि हमारे लोग (बांग्लादेशी) उम्मीद करते हैं कि भारत ऐसा कुछ नहीं करें जिससे उनमें व्यग्रता पैदा हो.' एजेंसी इनपुट के साथ

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First published: December 12, 2019, 12:54 PM IST
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