अल नीनो का प्रभाव: सितंबर से नवंबर तक रहेगा ज्यादा तापमान, जानिए वजह

आज से समय में सबसे बड़ा सवाल उठ खड़ा हुआ है कि अल नीनो (El Nino) घटना क्या है, इसके सामान्य होने का क्या मतलब है और विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO), जो कि संयुक्त राष्ट्र की एक विशेष एजेंसी है, वो दुनिया के लिए अगले तीन महीनों में भयंकर गर्मी की भविष्यवाणी क्यों कर रही है?

News18Hindi
Updated: September 6, 2019, 11:17 AM IST
अल नीनो का प्रभाव: सितंबर से नवंबर तक रहेगा ज्यादा तापमान, जानिए वजह
अगले तीन महीनों में भयंकर गर्मी की भविष्यवाणी.
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Updated: September 6, 2019, 11:17 AM IST
अल नीनो के दुष्प्रभाव कभी भी एक जैसा नहीं होता. इसकी पहचान एक समुद्री घटना के तौर पर होती रही है. इसके दुष्प्रभाव से 19 वीं सदी में अनुमानित 50 मिलियन लोगों की जानें गई हैं. जिसमें 2017 में मध्य अमेरिका की पर्वतों के नीचे फिसलने वाली घटना भी शामिल है. इस घटना में एक पूरा का पूरा गांव पहाड़ों में धंस गया था. अल निनो गर्म जलधारा है जिसके आगमन पर सागरीय जल का तापमान सामान्य से 3 से चार डिग्री तक बढ़ जाता है.

भारत में मॉनसून की शुरुआत धीमी गति से होने की वजह से जून तक भारत में 45 प्रतिशत तक कम बारिश दर्ज की गई. अल नीनो बारिश में वृद्धि का प्रमुख कारकों में से एक है. पश्चिमी तटीय इलाके और मध्य भारत में मॉनसून मजबूत हुआ है और अगले दो दिनों में गुजरात में और कल गोवा, महाराष्ट्र, उत्तरी तटीय आंध्र प्रदेश और दक्षिणी ओडिशा में भारी वर्षा होने की संभावना है.

लेकिन आज से समय में सबसे बड़ा सवाल उठ खड़ा हुआ है कि अल नीनो घटना क्या है, इसके सामान्य होने का क्या मतलब है और विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO), जो कि संयुक्त राष्ट्र की एक विशेष एजेंसी है, वो दुनिया के लिए अगले तीन महीनों में भयंकर गर्मी की भविष्यवाणी क्यों कर रही है?

अल नीनो क्या है?

अल नीनो घटना प्राकृतिक रूप से होने वाले मौसम चक्र का एक आधा हिस्सा है, जिसे 'अल नीनो साउदर्न ऑसिलेशन' (ENSO) कहा जाता है. ये उष्णकटिबंधीय पूर्वी प्रशांत महासागर के ऊपर समुद्र की सतह की हवाओं और तापमान में आने वाली विविधता है. ये उष्णकटिबंधीय और उप-उष्णकटिबंधीय की जलवायु पर सीधा प्रभाव डालता है. अल नीनो गरम फेज है, जबकि ठंडे फेज को ला नीनो के तौर पर जाना जाता है. विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्लूएमओ) बताता है कि ये दो घटनाओं की वजह से होता है और स्वाभाविक रूप से जलवायु परिवर्तनशीलता में अहम किरदार निभाता है. ये उष्णकटिबंधीय में बारिश के सामान्य पैटर्न को बाधित करते हैं और मौसम पर व्यापक प्रभाव डालते हैं.

अल नीनो एक बार शुरू होने पर ये प्रक्रिया कई हफ्ते या महीनों चलती है. अल नीनो अक्सर दस साल में दो बार आती है और कभी-कभी तीन बार भी. अल-नीनो हवाओं के दिशा बदलने, कमजोर पड़ने तथा समुद्र के सतही जल के ताप में बढोत्तरी की खास किरदार निभाती है. अल-नीनो का एक प्रभाव ये होता है कि वर्षा के प्रमुख क्षेत्र बदल जाते हैं. जिसके चलते विश्व के ज्यादा बारिश वाले इलाकों में कम बारिश और कम बारिश वाले इलाकों में ज्यादा बारिश होने लगती है. कभी-कभी इसके उलट भी होता है. ये घटना दक्षिण अमेरिका में तो भारी बारिश करवाती है लेकिन ऑस्ट्रेलिया और इंडोनेशिया में सूखे की स्थिति को पैदा कर देती है. ये पेरु की ठंडी जलधारा को विस्थापित करके गरम जलधारा को विकसित करती है.

अगले तीन महीनों में भयंकर गर्मी की भविष्यवाणी
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इस हफ्ते की शुरुआत में, WMO ने कहा कि "दुनिया के बड़े हिस्से में औसत समुद्री सतह और जमीनी तापमान सितंबर-नवंबर में सामान्य से ज्यादा रहने का अनुमान है." और ऐसा तब हो रहा है जब अल नीनो की घटना अपने पूर्ण स्वरूप में नहीं है. WMO ने बताया कि "तथाकथित ENSO अपने सामान्य महीने में पहले की तुलना में ज्यादा गर्म हैं क्योंकि जलवायु परिवर्तन की वजह से हवा और समुद्र की सतह के तापमान और समुद्र की गर्मी बढ़ गई है."

समुद्र में उतरने वाली ग्रीनहाउस गैसों से 90 प्रतिशत से ज्यादा ऊर्जा समुद्र में आ चुकी है. इन्हीं वजहों से समुद्र की गर्मी 2018 में रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई थी. जुलाई 2019, गर्म लहरों की वजह से दूसरे चरम मौसमों के रिकॉर्ड में सबसे गर्म महीना रहा है. डब्लूएमओ जलवायु अनुकूलन और भविष्यवाणी शाखा के निदेशक मैक्सिक्स डिलेय ने कहा, "मानव-प्रेरित जलवायु परिवर्तन के संकेत अब प्राकृति को संतुलित करने की शक्ति से भी ज्यादा शक्तिशाली हो गया है." इस वजह से समुद्र की सतह का तापमान बहुत ज्यादा होने की संभावना है."

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First published: September 6, 2019, 11:17 AM IST
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