नई आफत! 8000 KM दूर आ पहुंचा है रेत का तूफ़ान, दिन में भी नज़र नहीं आ रहा सूरज

अब आ रहा है रेत का तूफ़ान
अब आ रहा है रेत का तूफ़ान

सहारा रेगिस्तान (Sahara Desert) से उड़कर आई रेत ने कई देशों का आसमान ढक लिया है और अब ये 8000 किलोमीटर दूर अमेरिका के प्युर्तो रिको और सैन जुआन तक भी पहुंच गयी है. अभी इस रेत के तूफ़ान के हवा के साथ और ट्रेवल करने की आशंकाएं जाहिर की जा रहीं हैं.

  • Share this:
वाशिंगटन. कोरोना संक्रमण (Coronavirus) की मार झेल रही दुनिया की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. कैरेबियाई (Caribbean) देशों में कई दिनों से सूरज नहीं नज़र आया है और अब यही हाल अमेरिका (US) का भी होने जा रहा है. सहारा रेगिस्तान (Sahara Desert) से उड़कर आई रेत ने कई देशों का आसमान ढक लिया है और अब ये 8000 किलोमीटर दूर अमेरिका के प्यूर्तो रिको और सैन जुआन तक भी पहुंच गयी है. अभी इस रेत के तूफ़ान के हवा के साथ और ट्रेवल करने की आशंकाएं जाहिर की जा रहीं हैं.

इस रेत के तूफ़ान को 'सहारन डस्ट' के नाम से जाना जाता है और ये आम रेत के तूफानों जैसा नहीं होता है. CNN में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक ये रेत के काफी बारीक कण होते हैं, जो कि 3 हज़ार से 7 हज़ार फीट की ऊंचाई पर हवा के साथ ट्रेवल करते हैं. ये देखने में एक बादल की तरह नज़र आता है, लेकिन असल में सहारा रेगिस्तान की धूल होती है. कैरेबियाई देशों में बीते कई हफ़्तों से इस धूल ने पूरा आसमान ढका हुआ है. मौसम वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि कैरेबियाई देशों में स्थिति और भी बिगड़ सकती है.





आमतौर पर समुद्र में गिर जाती है रेत
यूनिवर्सिटी ऑफ़ प्युर्तो रिको की मौसम विज्ञानी ओल्गा मायोल ने सीएनएन से बातचीत में कहा कि ये एतिहासिक क्षण है, ऐसा करीब 50 सालों में एक बार देखने को मिलता है. कैरेबियाई देशों में तो एयर क्वालिटी काफी बुरी स्थिति में पहुंच गयी है. उन्होंने कहा कि ये काफी आश्चर्यजनक है कि इतनी भारी मात्रा में रेत हजारों किलोमीटर का सफ़र कर सेन्ट्रल अमेरिका तक पहुंचने वाली है. NERC की मौसम विज्ञानी क्लेयर राइडर बताती हैं कि आमतौर पर हर साल इस तरह का एक तूफ़ान सहारा के रेगिस्तान से उठता है और समुद्र पार करने के दौरान ही बारिश के चलते ख़त्म हो जाता है. अमेरिका तक तो इसका 4% हिस्सा भी मुश्किल से ही पहुंच पाता है.

 



अफ्रीका में आए तूफानों से मिली मदद
राइडर के मुताबिक अफ्रीका में लगातार आए तूफानों से इस डस्ट स्ट्रोम को काफी मदद मिली है. उन्हीं के चलते इस बार ये रेत का तूफ़ान 8 हज़ार किलोमीटर से भी ज्यादा का सफ़र तय कर चुका है. हवा में रेत की मात्रा सामान्य से कहीं ज्यादा है जो कि काफी नुकसानदायक साबित हो सकती है. उन्होंने कहा कि ये काफी गंभीर स्थिति है और इसके लिए लोगों को तैयार रहना चाहिए. नासा के इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन से भी अंतरिक्षयात्रियों ने इस तूफ़ान के कई वीडियो और फोटो सोशल मीडिया पर शेयर किये हैं. इस तूफ़ान के अमेरिकी शहरों तक गुरूवार की सुबह तक पहुंचने का अंदाजा लगाया गया है.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज