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ग्लोबल वॉर्मिंग को और बढ़ा सकती है क्रिप्टोकरेंसी! दुनिया में बढ़ते बिजली खर्च से चिंता

ग्लोबल वार्मिंग और बढ़ा सकती है क्रिप्टोकरेंसी (News18)

ग्लोबल वार्मिंग और बढ़ा सकती है क्रिप्टोकरेंसी (News18)

दुनिया भर में क्रिप्टोकरेंसी बनाने के लिए ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी महत्वपूर्ण है. इसे लगातार चलाए रखने की जरूरत से पूरी दुनिया में बिजली खर्च का बोझ बढ़ रहा है. विशेषज्ञ इसके पर्यावरण पर खऱाब असर को लेकर आशंका जता रहे हैं.

नई दिल्ली. आज से एक दशक पहले सबसे चर्चित क्रिप्टोकरेंसी बिटकॉइन के रूप में आई थी. तब से अब तक दुनिया भर में सभी ने इसका नाम सुन लिया है लेकिन ब्लॉकचेन या वह तकनीक जिस पर यह क्रिप्टोकरेंसी आधारित है, उसके बारे में कम ही लोगों को जानकारी है. 2011 में प्यू रिसर्च सेंटर ने एक सर्वेक्षण किया था. जिससे मालूम चला था कि अमेरिका के महज 16 फीसद लोगो ने ही आज तक कभी क्रिप्टोकरेंसी में निवेश किया था. इसमें भी ज्यादातर निवेशकों की उम्र 18 से 29 साल थी. दुनिया में अभी भी एक बड़ा तबका है जो इस करेंसी को शक की निगाह से देखता है. लेकिन क्रिप्टोकरेंसी और इससे जुड़ी तकनीक धीरे-धीरे राजनीति, अर्थव्यवस्था के साथ ही पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचाने की ओर बढ़ रही है.

क्या है ब्लॉकचेन और क्रिप्टोकरेंसी से इसका क्या संबंध है
ब्लॉकचेन तकनीक एक तरह का कंप्यूटर कोड है जो क्रिप्टोकरेंसी के लेनदेन का रिकॉर्ड रखता है. वैसे इसका इस्तेमाल और भी कई कामों में हो सकता है. ब्लॉकचेन क्रिप्टोकरेंसी के लेनदेने को एन्क्रिप्टेड या डिजिटल तौर पर रिकॉर्ड में रखते हैं जो दुनिया भर के सर्वर में मौजूद रहता है. लेकिन यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि अलग अलग ब्लॉकचेन पर अलग अलग करेंसी बनाई जाती है जैसे बिटकॉइन के लिए बिटकॉइन ब्लॉकचेन है तो वहीं ईथर, एथेरियम ब्लॉकचेन पर तैयार होता है. इसके अलावा ब्लॉकचेन का उपयोग दूसरी सूचनाओं जैसे संपत्ति का रिकॉर्ड या किसी खाद्य पदार्थ की उत्पत्ति की जानकारी रखता है. कुल मिलाकर क्रिप्टोकरेंसी एक तरह का डिजिटल पैसा है. ब्लॉकचेन इसका डेटाबेस है जो इस पैसे के लेनदेन की पूरी जानकारी रखता है. चूंकी यह डिजिटल पैसा है इसलिए कोई भी सरकार प्रत्यक्ष रूप से इसका समर्थन नहीं करती है.

कैसे बनती है क्रिप्टोकरेंसी
यह एक तरह का एल्गोरिदम है जो कंप्यूटर ही पढ़ सकता है. खास बात यह है कि इसे कोई भी बदल नहीं सकता है. क्रिप्टकरेंसी के निर्माण में क्रिप्टोग्राफी को आधार बनाकर एक यूनिट का निर्माण किया जाता है, फिर हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करके मुद्रा की कीमत निर्धारित की जाती है. इसे ही आम बोल चाल की भाषा में कॉइन कहा जाता है. जैसे बिटकॉइन, ऑल्टकॉइन, लिटकॉइन.

लगातार बढ़ती क्रिप्टोकरेंसी की लोकप्रियता की वजह से इसकी संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है, वैसे भी ओपन सोर्स वाली संकल्पना पर काम करने की वजह से कोई भी इसका निर्माण कर सकता है. वर्तमान में दुनिया में 500 अलग-अलग तरह की क्रिप्टोकरेंसी मौजूद हैं. अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा का विकल्प बन कर उभरी क्रिप्टोकरेंसी का निर्माण कोई भी संस्था, व्यक्ति या संगठन कर सकता है. इसका मूल्य भी उस व्यक्ति या संस्था की विश्वनीयता के आधार पर ही तय होता है जो उसी के आधार पर बढ़ता या घटता या समाप्त हो सकता है. वैसे तो इसे किसी क्यूआर कोड रीडेबल कोड के तौर पर छापा या ढाला जा सकता है लेकिन यह अभी चलन में नहीं है, अभी इसका लेनदेन ऑनलाइन स्तर पर ही होता है.

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ब्लॉकचेन की एक खास बात और है कि इसमें लेनदेन का रिकॉर्ड कई कंप्यूटरों में होता है जो एक साथ मिलकर एक वैश्विक नेटवर्क तैयार करते हैं. रिकॉर्ड की सटीकता की जांच के लिए यह कंप्यूटर लगातार एक दूसरे की जांच कर रहे होते हैं और ऐसे में रिकॉर्ड की एक भी गलत कॉफी या नकली लेनदेन तुरंत पकड़ में आ जाता है और उसे रोका जा सकता है. चूंकि ब्लॉकचेन विकेंद्रीकृत और ओपन सोर्स पर काम करता है इसलिए कोई भी एक संस्था या व्यक्ति इसे निंयत्रित नहीं कर सकता है. हालांकि कुछ परिस्थितियों में सरकार या बड़े निगम इसकी पहुंच को सीमित जरूर कर सकते हैं. चीन ने ऐसा ही कदम उठाते हुए 2021 में क्रिप्टोकंरेसी की ट्रेडिंग को गैरकानूनी घोषित कर दिया था. क्योंकि उनका मानना था कि यह वित्तीय प्रणाली को कमजोर कर रहा है और इससे अपराध को बढ़ावा मिल रहा है.

हालांकि क्रिप्टोकरेंसी पर भरोसा रखने वाले इसे सुरक्षित मानते हैं और यह कहते हैं कि इसे हैक करना मुश्किल है. यहा तक कि हाल ही में जब इसकी हैकिंग की बात आई थी तो यही दलील दी गई थी कि एथेरियम ब्लॉकचेन हैक नहीं हुई थी बल्कि 50 मिलियन डॉलर मूल्य के ईथर की चोरी हुई थी. और इस तरह की चोरी तो अधिकृत मुद्रा की भी होती है.

कैसे होता है मूल्य निर्धारण
करेंसी का मूल्य निर्धारण कौन करता है यह सवाल तो अधिकृत मुद्रा के साथ भी बना रहा है. ऐसे में क्रिप्टोकरेंसी जिसे कोई संस्था, सरकार, बैंक ने अधिकृत किया है उसको लेकर यह सवाल उठना लाजिमी है. दरअसल इसका मूल्य निर्धारण लोगों के विश्वास पर आधारित है. इसका समर्थन करने वाले मानते हैं कि दुनिया में ज्यादातर लोग डिजिटल मुद्रा का समर्थन करते हैं, ऐसी मुद्रा जो सरकारी निगरानी से दूर हो. ऐसे में क्रिप्टोकरेंसी पर लोगों की उम्मीद बढ़ जाती है.

पर्यावरण पर असर डाल रही है क्रिप्टोकरेंसी
क्रिप्टोकरेंसी के लिए दुनियाभर के कंप्यूटर लगातार चलते हैं जिससे बहुत अधिक बिजली की खपत होती है. एक अध्ययन के मुताबिक नवंबर 2018 तक बिटकॉइन की सालाना बिजली खपत 45.8 टेरावॉट प्रति घंटा थी जो हांगकांग की बिजली खपत के बराबर थी. यह केवल बिटकॉइन का आंकड़ा है. तो इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि इससे कितनी बिजली की खपत हो रही है. बिटकॉइन माइनिंग काउंसिल का अनुमान है कि क्रिप्टोकरेंसी ने 2021 में करीब 220 टेरावॉट प्रति घंटा बिजली की खपत की है. खास बात यह है कि इसमें उस बिजली को नहीं जोड़ा गया है जो इससे जुड़े संसाधनों को ठंडा करने में खर्च होती है.

Tags: Bitcoin, Cryptocurrency, Electricity, Environment, New blockchain technology-based currency Petro

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