क्‍या 'गुच्‍ची ग्रेस' की चाहत में मुगाबे से छिन गया जिम्‍बाब्‍वे

News18Hindi
Updated: November 15, 2017, 9:10 PM IST
क्‍या 'गुच्‍ची ग्रेस' की चाहत में मुगाबे से छिन गया जिम्‍बाब्‍वे
जिम्बाब्वे के राष्ट्रपति रॉबर्ट मुगाबे के साथ उनकी पत्नी ग्रेस मुगाबे Image: Getty Images
News18Hindi
Updated: November 15, 2017, 9:10 PM IST
दक्षिण अफ्रीका के देश जिम्बाब्वे में राजनीतिक संकट गहराने लगा है. देश की राजधानी में सशस्त्र सैनिकों को देखा गया. राजधानी में अचानक सैनिकों की मौजूदगी राजनीतिक तख्तापलट की ओर इशारा करती है. हालांकि सेना इससे इनकार कर रही है.

जिम्बाब्वे के राष्ट्रपति का घर सैनिकों से घिरा देखा गया. वहां गोलियों की आवाज भी सुनी गई. लेकिन ऐसी भी संभावना जताई जा रही है कि 37 साल का शासन जाते देख खुद की रक्षा के लिए फायरिंग की गई है. ऐसे में इस बात का अंदेशा जाहिर होता है कि सैनिकों की तरफ से तख्तापलट के तहत ये कार्रवाई की गई.

अचानक हुए इस घटनाक्रम के पीछे एक बड़ा कारण उपराष्‍ट्रपति एमरसन मनांगाग्वा को बर्खास्त किया जाना बताया जाता है. सेना ने मनांगाग्वा को हटाए जाने की निंदा की थी. मनांगाग्वा के हटने से मुगाबे की पत्नी ग्रेस (52) राष्ट्रपति पद की उत्तराधिकारी बनने की प्रबल दावेदार बन गई. सेना में वरिष्ठ रैंक के अधिकारियों ने राष्ट्रपति पद के लिए ग्रेस की दावेदारी का कड़ा विरोध किया है.

कहा जा रहा है कि राष्ट्रपति रॉबर्ट मुगाबे के घर के पास जुटे क्रिमिनल्स को टार्गेट करते हुए फायरिंग की गई है. यह सैन्य शासन लगाने का प्रयास नहीं है. राष्ट्रपति और उनका परिवार सुरक्षित है. हालांं‍कि दक्षिण अफ्रीका के राष्‍ट्रपति जैकब जुमा ने बताया कि मुगाबे को नजरबंद किया गया है.

जिम्बाब्वे के 93 वर्षीय राष्ट्रपति राबर्ट मुगाबे ने देश की सत्ता पर लंबे समय से पकड़ बनाए रखी थी. लगभग चार दशकों से देश पर राज करने वाले मुगाबे पहली बार इतने कमजोर दिखे. पहले प्रधानमंत्री बनकर और फिर राष्ट्रपति के रूप में उन्होंने देश पर नियंत्रण बनाए रखा. मुगाबे को विश्व का सबसे पुराना राष्ट्रपति माना जाता है.

जिम्‍बाब्‍वे की राजनीति में आए इस बदलाव के बीच ये लोग काफी अहम है-

पूर्व उपराष्ट्रपति इमर्सन मनांगागवा-
इमर्सन मनांग्‍गवा को कई लोग नगवेन्या या क्रोकोडाइल (मगरमच्‍छ) भी कहते हैं. लगभग 4 दशकों से वो राष्ट्रपति मुगाबे के दाहिने हाथ रहे. सबसे पहले आजादी की लड़ाई में वो मुगाबे के सहयोगी रहे बाद में खुफिया प्रमुख, कैबिनेट मंत्री और फिर उप राष्ट्रपति बने. मुगाबे के बाद देश में उन्हीं का ओहदा था. पहले कहा जाता था कि मुगाबे के बाद देश की सत्ता वहीं संभालेंगे.

पूर्व कैबिनेट मंत्री और विपक्षी नेता डेविड कोलटार्ट ने कहा कि सेना पर भी उनकी अच्छी पकड़ है और देश की आजादी के लिए लड़ने वाले पुराने लोगों पर भी उनकी अच्छी पकड़ है. लेकिन इस साल के शुरुआत में मुगाबे ने अपने बाद अपनी पत्नी को सत्ता का उत्तराधिकारी बनाने के लिए इमर्सन पर धोखाधड़ी और अनादर का आरोप लगाकर उन्हें उप राष्ट्रपति के पद से हटा दिया.

मुगाबे की पत्नी ग्रेस मुगाबे-
साउथ अफ्रीका में जन्मी ग्रेस को काफी चालाक, खर्चीली और कुशल राजनीतिज्ञ माना जाता है. अपनी शॉपिंग की आदत की वजह से उन्हें गुच्ची ग्रेस कहा जाता है. गरीबी से जूझ रहे देश के लिए वो इस वजह से केंद्र बिंदु भी रहीं. इसके बावजूद उन्हें युवा राजनेताओं का समर्थन मिला हुआ है.

मुगाबे द्वारा पूर्व राष्ट्रपति इमर्सन की बर्खास्तगी को अपनी पत्नी के लिए सत्ता का रास्ता साफ करने के तौर पर देखा जा रहा है. इस वजह से मुगाबे के कई समर्थकों में भी असंतोष की स्थिति बनी.

रक्षामंत्री सिडनी सेकेरामयी-
द अफ्रीकन स्टडीज एसोसिएशन ऑफ द पेसिफिक के विश्लेषक टिनाशे जकवा के अनुसार रक्षामंत्री को उप-राष्ट्रपति पद का प्रबल दावेदार माना जाता है. वो इस खेल के छिपे हुए खिलाड़ी हो सकते हैं. मुगाबे शासन के प्रति लोगों की नकारात्मक धारणा को खत्म करने के लिए उन्हें उप राष्ट्रपति बनाना मुगाबे शासन के लिए बेहतर होगा.

जनरल कॉन्स्टेन्टिनो चिवेंगा-
पहले भी सेना के कमांडर कॉन्स्टेन्टिनो चिवेंगा ने उपराष्ट्रपति की बर्खास्तगी की निंदा की थी. मंगलवार को उन्होंने एक प्रेस कॉन्फेंस आयोजित की थी और धमकी दी कि अगर ZANU-PF अधिकारी उनके राजनीतिक सहयोगियों को इसी तरह दरकिनार करते रहे तो सैन्य कार्रवाई करने से वो पीछे नहीं हटेंगे. इस कॉन्फ्रेंस के जवाब में ZANU-PF ने उनके इस रवैये को धोखेबाज कहा.

ये भी पढ़ें-
जिम्बाब्वे में तख्ता पलट की खबरें लेकिन सेना ने किया इनकार
जिम्बाब्वे पर सेना का कब्ज़ा, द.अफ्रीकी राष्ट्रपति बोले-नजरबंद हैं मुगाबे 
First published: November 15, 2017
पूरी ख़बर पढ़ें
अगली ख़बर