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पाकिस्तान के क्वारंटाइन कैंप में रहे शख्स ने सुनाई आपबीती, 'वहां जानवरों से भी बुरा हाल है.'

News18Hindi
Updated: March 24, 2020, 2:16 PM IST
पाकिस्तान के क्वारंटाइन कैंप में रहे शख्स ने सुनाई आपबीती, 'वहां जानवरों से भी बुरा हाल है.'
पाकिस्‍तान में ज्‍यादातर वही लोग कोरोना वायरस से संक्रमित हैं, जो ईरान से आए हैं.

क्‍वारंटाइन कैंप में रह रहे लोगों को खराब खाना खाने को दिया जाता है और ठंडे कैंपों में थोड़े से कंबलों के साथ गुजारा करने को मजबूर किया जा रहा है.

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  • Last Updated: March 24, 2020, 2:16 PM IST
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इस्‍लामाबाद. पाकिस्‍तान (Pakistan) के क्‍वारंटाइन कैंपों में रह चुुके ईरान (Iran) के कई जायरीन ने आरोप लगाया है कि इन कैंपों में स्‍वास्‍थ्‍य सुविधाएं सीमित हैं और मरीजों को इन्‍हीं के सहारे रहने पर मजबूर किया जा रहा है. 'एएफपी' से बात करते हुए ताफ्तान में रह चुके और वर्तमान में वहां रहने वालों का कहना है कि क्वारंटाइन कैंपों में पानी और फ्लश करने के लायक वॉशरूम मुहैया नहीं हैं. इन्‍हें यहां रह रहे जायरीन खुद साफ करते हैं.

बुधवार को बलूचिस्तान सरकार ने ईरान (Iran) से वापस आने वाले एक हजार, 652 लोगों को 14 दिनों तक ताफ्तान (Taftan) में क्‍वारंटाइन सेंटर में रखने के बाद उन्‍हें उनके राज्‍य भेज दिया था. इनमें से एक हजार, 230 का संबंध पंजाब से, 232 का खैबर पख्तूनख्वा और 190 का गिलगित-बाल्टिस्तान और पीओके से था. इससे एक रोज पहले करीब 700 जायरीन को 18 बसों में सिंध रवाना किया गया था.

हाल में 'डॉन' में प्रकाशित होने वाली एक रिपोर्ट के हवाले से कहा गया था कि दो हजार से ज्‍यादा जायरीन और व्‍यापारी ताफ्तान में हैं और वे 14 दिन की मुद्दत खत्‍म होने का इंतजार कर रहे हैं. इसके बाद उन्‍हें वापस जाने की अनुमति दे दी जाएगी. आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक पाकिस्‍तान (Pakistan) में कोरोना वायरस (Coronavirus) के ज्‍यादातर मामले ईरान से आने वाले जायरीन में ही सामने आए हैं. पाकिस्तान की ईरान के साथ 960 किलोमीटर लंबी सरहद है. इसका मुख्य क्रॉसिंग प्‍वाइंट ताफ्तान है.

लोग जमीन पर सोने पर मजबूर हैं, कैंप भर चुके



'डॉन' की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक ताफ्तान के क्‍वारंटाइन कैंप में मौजूद एक व्‍यक्ति ने नाम न जाहिर करने की शर्त पर टेलीफोन पर हुई बातचीत में बताया 'मैं 7 दिन से एक ही मास्‍क इस्‍तेमाल कर रहा हूं.' उनका कहना था कि 'जब मैं यहां आया था, तो हो सकता है कि मुझमें वायरस न हो, लेकिन अगर अब मुझमें वायरस हो तो यह मेरे लिए हैरत की बात नहीं होगी.' वहीं सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि लोग जमीन पर सोने पर मजबूर हैं और कैंप भर चुके हैं.

ताफ्तान का आरामगाह के तौर पर इस्‍तेमाल होता है
ईरान में पिछले महीने कोरोना वायरस की वजह से दो लोगों की मौत की खबर सामने आने के बाद ईरान में कोरोना वायरस तेजी से फैल रहा है. ताफ्तान सरहद को 16 मार्च को बंद किया गया था. ईरान में धार्मिक स्थलों पर जाने वाले पाकिस्तानी जायरीन को दो सप्ताह के लिए क्वारंटाइन कैंप में रखा जाता है. इसके बाद उन्‍हें उनके इलाकों में और दो सप्ताह के लिए क्‍वारंटाइन कैंप में रहना होता है. क्‍योंकि ताफ्तान को कई सालों से जायरीन के वापस आने पर आरामगाह के तौर पर इस्‍तेमाल किया जाता रहा है.

खराब खाना दिया जा रहा, जानवरों जैसा सुलूक
प्रत्यक्षदर्शियों ने कहा कि क्‍वारंटाइन कैंपों में रह रहे लोगों ने बेहतर सहूलियतें न मिल पाने की वजह से प्रदर्शन भी किया था, तो वहीं कुछ भाग निकले. तेहरान में एक यूनिवर्सिटी के छात्र इश्तियाक हुसैन उन लोगों में से एक हैं, जो ताफ्तान से आए हैं. उनके मुता‍बिक उनका भी कोरोना वायरस का कोई टेस्‍ट नहीं किया गया. उनका कहना था कि लोगों के साथ जानवरों से भी बद्तर सुलूक किया जा रहा है. उन्‍हें खराब खाना खाने को और उन्‍हें सख्‍त ठंडे कैंपों में थोड़े से कंबलों के साथ गुजारा करने को मजबूर किया जा रहा है.

वहीं ताफ्तान के असिस्टेंट कमिश्‍नर नजीब कंबरानी का कहना था कि कैंप के दूर-दराज के इलाके में होने की वजह से वहां सहूलियतें मुहैया कराना मुश्किल हो गया है. इसके बावजूद हम सभी संभव सुविधाएं मुहैया करा रहे हैं.

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First published: March 24, 2020, 1:43 PM IST
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