तेजी से पिघल रहा है चीन में मौजूद दुनिया का थर्ड पोल, वैज्ञानिकों में बढ़ी चिंता

(प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)
(प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

ग्लेशियर (Glacier) के इस तरह से पिघलने से दुनिया के कई वैज्ञानिकों को हैरत में डाल दिया है. मामले की जांच में जुटे एक्सपर्ट्स ने जब खोजबीन शुरू की तो पाया कि यह ग्लेशियर हर साल 7 प्रतिशत हर साल गायब हो रहा है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 13, 2020, 4:46 PM IST
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बीजिंग. कोरोना वायरस (Corona Virus) के बाद चीन से एक और बुरी खबर सामने आ रही है. यहां तिब्बत (Tibet) पठार के उत्तरपूर्वी किनारे पर 800 किमी की पहाड़ी श्रृंखला का सबसे बड़ा ग्लेशियर तेजी से पिघल रहा है. फिलहाल शोधकर्ता इस मामले की जांच कर रहे हैं. लाओहुगु नंबर 12 का यह ग्लेशियर चीन के तिब्बत के पठारों पर मौजूद है. गौरतलब है कि यह बीते 50 सालों में 450 मीटर तक पीछे खिसक गया है.

ग्लेशियर के इस तरह से पिघलने से दुनिया के कई वैज्ञानिकों को हैरत में डाल दिया है. मामले की जांच में जुटे एक्सपर्ट्स ने जब खोजबीन शुरू की तो पाया कि यह ग्लेशियर हर साल 7 प्रतिशत हर साल गायब हो रहा है. मॉनिटरिंग स्टेशन के निदेशक किन जियांग बताते हैं कि ग्लेशियर से करीब 42 फीट मोटी बर्फ की परत गायब हो चुकी है. इस ग्लेशियर के इलाके को थर्ड पोल (Third Pole) यानी तीसरा ध्रुव भी कहा जाता है.

बढ़ गया है इलाके का तापमान
किन बताते हैं कि 1950 के दशक के बाद से ही इलाके में तापमान औसतन 1.5 डिग्री सेल्सियस बढ़ गया है. इसके अलावा उन्होंने कहा कि यह समय किलियन रेंज के 2684 ग्लेशियरों के लिए बुरा समय है. एक्सपर्ट्स इसके पीछे का कारण ग्लोबल वॉर्मिंग (Global Warming) और प्रदूषण को बता रहे हैं. किन के मुताबिक, चीन की एकेडमी ऑफ साइंस के 1956 से लेकर 1990 तक के आंकड़े बताते हैं कि 1990 से 2010 के बीच ग्लेशियरों के पिघलने की रफ्तार करीब 50 फीसदी रही है.



इसके अलावा कई बार कम बारिश और बर्फबारी भी ग्लेशियरों की बर्फ के बह जाने का कारण हो सकते हैं. हालांकि, अगर ऐसा ही रहा तो किसानों के अलावा जानवरों को परेशानी की कमी हो सकती है. किन बताते हैं कि जब वो 2005 में यहां पहली बार आए थे, तो ग्लेशियर नदी के झुकाव वाले इलाके के काफी करीब था, लेकिन अब यह दूसरी करीब आधा किलोमीटर हो गई है.
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