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कराची के इस अस्पताल ने संक्रमित डॉक्टर को ही नहीं दिया वेंटिलेटर, हुई मौत

कराची के इस अस्पताल ने संक्रमित डॉक्टर को ही नहीं दिया वेंटिलेटर, हुई मौत

समय पर इलाज न मिलने से गई डॉ. फुरकान की जान. फोटो साभार/ट्विटर

समय पर इलाज न मिलने से गई डॉ. फुरकान की जान. फोटो साभार/ट्विटर

सिंध सरकार ने मामले की जांच के लिए एक समिति बनाई थी और उसे 24 घंटे के भीतर एक रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया गया था. रिपोर्ट के मुताबिक सिविल अस्पताल कराची में ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर ने मरीज की जांच में लापरवाही दिखाई.

    इस्‍लामाबाद. डॉ. फुरकान-उल-हक (Dr Furqanul Haq) की मौत की जांच के लिए बनाई गई समिति ने अपनी जांच रिपोर्ट में सिविल अस्पताल के एक मेडिकल अफसर के गलत अनुमान को डॉक्टर की मौत की वजह करार दिया है. गौरतलब है कि डॉ. फुरकान की मौत के बाद पाकिस्तान मेडिकल एसोसिएशन (PMA) के महासचिव डॉ. कैसर सज्जाद (Dr Qaiser Sajjad) ने आरोप लगाया था कि डॉ. फुरकान को वेंटिलेटर की ज़रूरत थी, लेकिन शहर के कई अस्पतालों में जाने के बावजूद उन्हें यह सुविधा नहीं मिली.

    डॉक्‍टर की लापरवाही बनी मौत की अहम वजह
    'डॉन' की खबर के हवाले से कहा गया है कि इस दावे पर सिंध सरकार ने मामले की जांच के लिए एक समिति बनाई थी और उसे 24 घंटे के भीतर एक रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया गया था. समिति की रिपोर्ट बुधवार सुबह जारी की गई, जिसके मुताबिक सिविल अस्पताल कराची में ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर, जिसने मरीज की जांच की थी, उसने लापरवाही दिखाई और आईसीयू में 9 बेड होने के बावजूद उन्हें भर्ती नहीं किया गया.

    हालांकि रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि शुरू में डॉ. फुरकान किसी भी अस्पताल में भर्ती होने से बच रहे थे. डॉ. फुरकान की मृत्यु के बारे में रिपोर्ट में कहा गया है कि उन्हें 1 मई को वायरस का पता चला था. 3 मई को डॉ. फुरकान की तबियत खराब हो गई और उनकी भतीजी ने उन्हें इंडस अस्पताल आने की सलाह दी, लेकिन उन्होंने इसे नजरअंदाज कर दिया और उन्हें उनके सहयोगी डॉ. आमिर की सलाह पर सिंध इंस्टीट्यूट ऑफ यूरोलॉजी एंड ट्रांसप्लांट (SIUT) में भर्ती कराया गया.

    समय पर इलाज न मिलने से हुई मौत
    हालांकि जब अमन एम्बुलेंस उसके पास पहुंची, तो वह डॉ. फुरकान-उल-हक को इमरजेंसी से कोरोना वायरस कंट्रोल रूम में ले जाया गया, जहां ड्यूटी पर मौजूद डॉ. जगदीश ने उनकी जांच की. हालांकि डॉ. जगदीश ने उन्हें भर्ती करने के बजाय संबंधित डॉक्टर से संपर्क करने की सलाह दी, जिन्होंने उनके लिए बैड की व्यवस्था की थी. रिपोर्ट में कहा गया है कि मरीज एम्बुलेंस में बैठ कर किसी अन्‍य अस्‍पताल जाने के बजाय घर चले गए, जहां उनकी हालत बिगड़ गई और उन्हें ट्राईमैक्स अस्पताल ले जाया गया, जहां वह निजी तौर पर काम करते थे. यहां जिस डॉक्‍टर ने उनकी जांच की उनका कहना था कि डॉ. फुरकान को विशेष ध्यान देने और संभवतः वेंटिलेशन की जरूरत है, जिस पर वह तंग आकर एक बार फिर घर चले गए.

    वेंटिलेटर्स की कमी की बात को खारिज किया
    रिपोर्ट में कहा गया है कि डॉ. जगदीश को उन्‍हें सिविल अस्पताल में भर्ती कराना चाहिए था, क्योंकि उनकी स्थिति ऐसी नहीं थी कि वह किसी अन्य अस्पताल जाते. इसके तहत डॉ. जगदीश के खिलाफ उनके गलत अनुमान के लिए अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की गई है. सिंध सरकार कोरोना वायरस के नाम पर 2 अरब रुपये से ज्‍यादा रुपये खर्च कर चुकी है, लेकिन नतीजा जीरो है. सूत्रों का कहना है कि सिंध में लगभग 350 वेंटिलेटर हैं, जिनमें से 70 से ज्‍यादा खराब हैं.

    दूसरी ओर यह दावा कि सिंध सरकार वेंटिलेटर्स की कमी का सामना कर रही है. इसे प्रांतीय स्वास्थ्य मंत्री अजरा पीचोहो के मीडिया को-ऑर्डिनेटर ने पहले ही खारिज कर दिया था. यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि 30 अप्रैल के आंकड़ों के मुताबिक पाकिस्तान में 8 स्वास्थ्य कर्मचारियों ने कोरोना वायरस के कारण अपनी जान गंवाई है. पहली मौत गिलगित-बाल्टिस्तान में हुई थी, जहां एक युवा डॉक्टर ओसामा रियाज की मौत वायरस की वजह से हुई थी.

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    Tags: Corona, Doctor, Pakistan

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