युद्ध में लापता हजारों लोग मर चुके हैं : गोटाभाया राजपक्षे

श्रीलंका में तमिल अलगाववादी विद्रोहियों के साथ करीब 30 वर्ष तक चले गृह युद्ध को समाप्त करने में राष्‍ट्रपति गोटाभाया राजपक्षे ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.

श्रीलंकाई तमिलों के साथ उत्तर और पूर्व में तीन दशक तक चले अलगाववादी युद्ध सहित अन्य संघर्षों में कम से कम एक लाख लोग मारे गए. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक विभिन्न संघर्षों के कारण 20 हजार से अधिक लोग लापता हैं.

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    कोलंबो. श्रीलंका (Sri Lanka) के राष्ट्रपति गोटाभाया राजपक्षे ने पहली बार स्वीकार किया कि एक दशक से भी अधिक समय पहले सरकार और तमिल टाइगर विद्रोहियों के बीच हुए गृह युद्ध की समाप्ति के बाद से लापता हजारों लोग मर चुके हैं.

    'कोलंबो गजट' ने खबर दी कि श्रीलंका में तमिल अलगाववादी विद्रोहियों के साथ करीब 30 वर्ष तक चले गृह युद्ध को समाप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले गोटाभाया राजपक्षे ने पिछले हफ्ते संयुक्त राष्ट्र (United Nations) के स्थानीय समन्वयक हाना सिंगर से कहा कि आवश्यक जांच पूरी होने के बाद इनलापता लोगों के मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने के कदम उठाए जाएंगे.

    सरकारी आंकड़ों के मुताबिक विभिन्न संघर्षों के कारण 20 हजार से अधिक लोग लापता हैं. श्रीलंकाई तमिलों के साथ उत्तर और पूर्व में तीन दशक तक चले अलगाववादी युद्ध सहित अन्य संघर्षों में कम से कम एक लाख लोग मारे गए.

    तमिलों ने आरोप लगाए कि 2009 में समाप्त हुए युद्ध के अंतिम चरण में हजारों लोगों की हत्या कर दी गई, जब सरकारी सुरक्षा बलों ने लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल इलम (लिट्टे) के प्रमुख वेल्लुपिल्लई प्रभाकरण को मार गिराया था. श्रीलंका की सेना ने आरोपों से इंकार करते हुए दावा किया था कि उसने लिट्टे के नियंत्रण से तमिलों को मुक्त कराने के लिए मानवीय अभियान चलाया था.

    अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार समूहों ने दावा किया कि युद्ध के अंतिम चरण में कम से कम 40 हजार तमिल नागरिक मारे गए, लेकिन सरकार ने आंकड़ों को खारिज कर दिया. राष्ट्रपति कार्यालय ने राजपक्षे के हवाले से बताया कि लापता लोगों के मुद्दे के समाधान के लिए उन्होंने योजना बना ली है.
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