ट्रंप प्रशासन के यमन के फंड में कटौती से बच्चों की मौत में होने लगी बढ़ोतरी

यमन में कुपोषण से बच्चों की मौत में इजाफा हुआ है.
यमन में कुपोषण से बच्चों की मौत में इजाफा हुआ है.

ट्रंप प्रशासन (Trump Administration) ने मार्च में अमेरिका और उसके मध्य पूर्व के सहयोगी राष्ट्रों साउदी अरब और यूएई ने यमन को दिए जाने वाले फंड में कटौती (Reduced the Fund) कर ली है. इसके चलते बच्चों की मौत में इजाफा हो रहा है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 21, 2020, 11:15 AM IST
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सना. यमन के एबीएस अस्पताल में कुपोषण वार्ड (Malnutrition Ward) में डॉक्टरों और नर्सों को चीखते हुए बच्चे पांव मारते हैं. डॉक्टरों और नर्सों के लिए अस्पताल में शायद ही ऐसा कोई दिन हो जब दुर्बल या कुपोषित बच्चें इलाज के ना पहुंचते हों. हालांकि कभी भी हालात इतने बुरे नहीं रहे. पिछले कुछ महीनों में बिजली और ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है. इसका मतलब है कि वे हमेशा अपने जनरेटर को चालू नहीं रख सकते हैं और जब ऐसा होता है तब बच्चों के इलाज में लगे उनके मॉनिटर और वेंटिलेटर बंद हो जाते हैं. जो बच्चे बचाए जा सकते थे, वे मर गए. राजधानी सना के उत्तर पश्चिम में हज्जाह हॉस्पिटल के डॉक्टर अली अल अश्वाल ने सीएनएन को बताया कि जो एयरस्ट्राइल या युद्द में नहीं मारे गए वे मेडिकल की आपूर्ति की कमी से मारे गए हैं. इन हालातों के लिए ट्रंप प्रशासन (Trump Administration) को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है. दरअसल, ट्रंप प्रशासन ने मार्च में अमेरिका और उसके मध्य पूर्व के सहयोगी राष्ट्रों साउदी अरब और यूएई ने यमन को दिए जाने वाले फंड में कटौती (Reduced the Fund) कर ली है.

फंड में कमी आने से हॉस्पिटलों को बंद करना पड़ा

संयुक्त राष्ट्र ने अमेरिका और उनके मध्य पूर्व के सहयोगी राष्ट्रों से अपील की है कि वे अमन की आर्थिक सहयोग करते रहें. लेकिन यमन की फंडिंग में कटौती किए जाने का मतलब यहां के नागरिक में हेल्थ केयर सर्विस में कमी आना स्वाभाविक है. फंड में कमी आने से यहां के हॉस्पिटलों को बंद करना पड़ा है. उन्होंने सहयोगी एजेंसियों को भोजन को कम करने के लिए मजबूर किया गया है.



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फंड की कमी होने का असर यहां के एक बड़े अस्पताल एबीएस पर भी पड़ा है. साल की पहली छमाही में करीब 700 रोगी कुपोषण से पीड़ित पाए गए. अगस्त महीने में कुपोषण के मामलों में दोगुनी बढ़ोतरी पाई गई. डॉ. अल अश्वाल ने कहा कि हमारे क्लिनिक में कुपोषण के 100—150 मामले आते थे लेकिन अगस्त में दोगुने मामले पाए गए.
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