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जी-7 सम्मेलन: ईरान के विदेश मंत्री को देख हैरान रह गए ट्रंप!

News18Hindi
Updated: August 26, 2019, 12:07 PM IST
जी-7 सम्मेलन: ईरान के विदेश मंत्री को देख हैरान रह गए ट्रंप!
G7 सम्मेलन में ईरान की उपस्थिति ट्रंप के लिए हैरानी का सबब बना हुआ है.

ईरान (Iran) और अमेरिका (America) के बीच तनाव घटाने के मकसद से फ्रांस (France) के राष्ट्रपति एमैनुएल मैक्रों और उनके ईरानी समकक्ष हसन रूहानी ने हालिया दिनों में कई बार फोन पर बातचीत की है.

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  • Last Updated: August 26, 2019, 12:07 PM IST
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ईरान (Iran) के विदेश मंत्री मोहम्मद जवाद जरीफ जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान वार्ता के लिए फ्रांस के शहर बिआरित्ज (Biarritz) पहुंचे. ईरान के विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता प्रवक्ता अब्बास मूसावी ने परमाणु समझौते को बचाने की उनकी कोशिश का हवाला देते हुए एक ट्वीट किया, 'जरीफ ईरान और फ्रांस के राष्ट्रपतियों के बीच हालिया कदमों के संबंध में वार्ता जारी रखने के लिए बिआरित्ज पहुंचे हैं, जहां पर जी-7 की बैठक हो रही है.' उन्होंने कहा, 'इस यात्रा के दौरान अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के साथ कोई बैठक या वार्ता नहीं होगी.' वहीं ईरान का इस मंच पर होना अमेरिकी राष्ट्रपति (Donald Trump) डोनाल्ड ट्रंप को खल रहा है.

ईरान की उपस्थिति ट्रंप के लिए हैरानी का सबब
ट्रंप के पास पूरी दुनिया के नेताओं और वहां हो रहे घटनाक्रम पर कहने के लिए हमेशा कुछ ना कुछ होता है, लेकिन जी-7 सम्मेलन में ईरान की उपस्थिति पर वो खामोश ही रहे. जब उनसे इस संदर्भ में पत्रकारों ने पूछा तो उनका जवाब केवल 'नो कमेंट' था. इससे अंदाजा लागाया जा सकता है कि ईरान की मौजूदगी ने ट्रंप को किस कदर हैरान किया है. ईरान को जी-7 सम्मेलन में आमंत्रित करने की वजह से अमेरिका फ्रांस से खासा नाराज बताया जा रहा है. व्हाइट हाउस के अधिकारियों ने शिकायत की है कि फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों ट्रंप प्रशासन और ईरान के बीच जबरदस्ती वार्ता कराने की कोशिश कर रहे हैं.

ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी


ट्रंप के आते ही तल्ख हुए थे रिश्ते
इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान को नंबर एक आतंकवादी राष्ट्र कहा था. ट्रंप ने मई 2018 में अमेरिका, ईरान और विश्व शक्तियों के बीच ऐतिहासिक परमाणु समझौते को निरस्त कर दिया था. ओबामा प्रशासन के समय बातचीत के दौरान अमेरिका ने ईरान पर लगे प्रतिबंधों को कम कर दिया था, जिसके बदले में ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर रोक लगाई थी. फ्रांसीसी अधिकारियों का कहना है कि ईरान के खिलाफ ट्रंप की अधिकतम दबाव की नीति असफल रही है. उन्होंने व्हाइट हाउस को मौजूदा नीति को बदलने और ईरानियों के साथ एक नए समझौते की मांग की है. ट्रंप के अधिकतम दबाव अभियान में ईरान की अर्थव्यवस्था को कमजोर बनाने के उद्देश्य से चौतरफा प्रतिबंधों और उसके समुद्री रास्तों का घेराव जैसे कदम शामिल हैं.

US-ईरान के बीच तनाव घटाने की कोशिश में मैक्रों
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ईरान और अमेरिका के बीच तनाव घटाने के मकसद से फ्रांस के राष्ट्रपति एमैनुएल मैक्रों और उनके ईरानी समकक्ष हसन रूहानी ने हालिया सप्ताहों में कई बार फोन पर बातचीत की है. ईरान के साथ 2015 में हुए समझौते से अमेरिका के बाहर निकलने के बाद ईरान और अमेरिका के बीच तनाव चरम पर है.

फ्रांस के राष्ट्रपति एमैनुएल मैक्रों


ईरान के विदेश मंत्री परमाणु कार्यक्रम के बारे में चर्चा करने के लिए वह जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान बिआरित्ज पहुंचे हैं. वार्ता के बाद जरीफ ने कहा कि आगे का रास्ता बहुत कठिन है. जरीफ ने ट्वीट किया कि उन्होंने फ्रांस के विदेश मंत्री जीन यवेस ले ड्रियन के साथ बातचीत के बाद राष्ट्रपति मैक्रों से मुलाकात की तथा ब्रिटेन और जर्मन अधिकारियों से भी मिले. उन्होंने कहा, "आगे का रास्ता बहुत कठिन है. लेकिन कोशिश जारी है." (भाषा इनपुट के साथ)

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First published: August 26, 2019, 10:51 AM IST
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