ग्रीनलैंड को खरीदकर अमेरिका में मिलाना चाहते हैं ट्रंप, चीन है बड़ी वजह

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Updated: August 24, 2019, 12:16 PM IST
ग्रीनलैंड को खरीदकर अमेरिका में मिलाना चाहते हैं ट्रंप, चीन है बड़ी वजह
ग्रीनलैंड

क्षेत्रफल की दृष्टि से ग्रीनलैंड (Greenland) दुनिया का 12वां सबसे बड़ा देश (Country) है. इसकी 20 लाख वर्ग किमी जमीन चट्टान और बर्फ से ढकी हुई हैं. ग्रीनलैंड की आबादी केवल 56 हजार है.

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अमेरिकी (America) राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) दुनिया के सबसे बड़े द्विपों में से एक ग्रीनलैंड (Greenland) को खरीदना चाहते हैं. माना जा रहा है कि ट्रंप के इस विचार के पीछे चीन (China) के साथ चल रही प्रतिस्पर्धा है. हलांकि ट्रंप के इस प्रस्ताव की काफी आलोचना हुई है. ग्रीनलैंड के स्थानीय लोग इसे ट्रंप का सनक भरा प्रस्ताव बता रहे हैं. इससे पहले डेनमार्क (Denmark) की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन (Mette Frederiksen) ने कहा था कि ग्रीनलैंड डेनमार्क की संपत्ति नहीं है, इसलिए वह उसे नहीं बेच सकतीं. उन्होंने कहा था कि ग्रीनलैंड वहां के लोगों का है. मैं उम्मीद करती हूं कि इसे खरीदने के प्रस्ताव में कोई गंभीरता नहीं होगी. यूं तो ग्रीनलैंड स्वायत्त है पर बाहरी तौर पर डेनमार्क के अधिन है. डेनमार्क के पीएम के बयान के बाद से ट्रंप गुस्से में हैं. उन्होंने मंगलवार को एक ट्वीट में कहा, "डेनमार्क की प्रधानमंत्री को ग्रीनलैंड बेचने में कोई दिलचस्पी नहीं है, इसलिए उन्होंने डेनिश पीएम से मुलाकात स्थगित करने का फैसला किया है."

ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका और चीन, दोनों ही सक्रिय दिख रहे हैं.


ग्रीनलैंड पर हैं चीन की निगाहें

क्षेत्रफल की दृष्टि से ग्रीनलैंड दुनिया का 12वां सबसे बड़ा देश है. इसकी 20 लाख वर्ग किमी जमीन चट्टान और बर्फ से ढकी हुई हैं. ग्रीनलैंड की जनसंख्या सिर्फ़ 56 हज़ार है. यहां की 88 प्रतिशत जनसंख्या इनूएट की है और बाक़ी डेनिश (डेनमार्क की भाषा बोलने वाले) लोग रहते हैं. ग्रीनलैंड की आर्थिक स्थिति सही नहीं है. दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होने की वजह से चीन का एशिया, अफ़्रीका और लातिन अमरीका में हर जगह दख़ल है. चीन बाकी दुनिया की पहुंच से कटे हिस्से आर्कटिक में भी अपनी मौजूदगी बढ़ा रहा है. आर्कटिक सर्कल से बीजिंग की दूरी 3,000 किमी की है और चीन वहां निवेश के रास्तों को ढूंढ रहा है. चीन ने आर्कटिक की बर्फ़ के ऊपर से सामान ले जाने के लिए कई आइसब्रेकर्स वहां भेज दिए हैं. जिसमें एटॉमिक पावर से चलने वाले आइसब्रेकर्स भी शामिल हैं. अपने इसी मिशन के तहत चीन की नजर ग्रीनलैंड पर है. यहां चीन अपने पोलर सिल्क रोड पर स्टेशन बनाने की संभावनाएं ढूंढ रहा है. ग्रीनलैंड के कई इलाकों को चीन अपने कब्जे में लेने के लिए प्रयासरत है. चीन के इन्हीं कदमों की वजह से अमेरिका चिंतित है और ग्रीनलैंड को खरीदना चाहता है.

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First published: August 24, 2019, 12:10 PM IST
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